माननीय अध्यक्ष महोदय का संदेश......


Shri Vijay Kumar Sinha,
Hon'ble Speaker,
Bihar Vidhan Sabha

दिनांक 21.07.2021


■ बकरीद के शुभ अवसर पर सभी मुस्लिम भाइयों को बधाई देता हूं । ईद अल अजहा या बकरीद इस्लाम धर्मावलंबियों का प्रमुख त्यौहार है । ईद अल अजहा का अर्थ कुरबानी का ईद माना जाता है । यह रमजान के पवित्र महीने के पश्चात् लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है ।
■ इस्लामिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने पुत्र हजरत इस्माइल को बकरीद के दिन ही खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान करने जा रहे थे तो अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवन दान दे दिया । जिसकी याद में बकरीद का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।
■ बकरीद हमें यह संदेश देता है कि परिवार के बड़े सदस्य को स्वार्थ से परे होना चाहिये और मनुष्य को अपने कार्य का संपादन मानव कल्याण हेतु करना चाहिये ।
■ इस महीने इस्लाम धर्मावलंबी मक्का (सउदी अरब) में एकत्रित होकर हज करते हैं ।

दिनांक 18.07.2021


■ नेल्सन रोलिहलाहला मंडेला की जयंती पर मैं उन्हें नमन करता हूं। वे एक दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद विरोधी क्रांतिकारी राजनेता थे । उन्होंने 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वह दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत प्रमुख थे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुए चुनाव में चुने गए थे। उनकी सरकार ने संस्थागत नस्लवाद से निपटने और नस्लीय सुलह को बढ़ावा देकर रंगभेद को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया। वैचारिक रूप से वे राष्ट्रवादी और समाजवादी थे ।

दिनांक 17.07.2021

■ सभी के लिए समान न्याय व्यवस्था, स्वस्थ और सुदृढ़ समाज के निर्माण हेतु अतिआवश्यक शर्त है।आईये अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर हम संकल्प लें कि कोई व्यक्ति या वर्ग न्याय से वंचित न रहे व सबको आसानी से न्याय मिल सके ।

दिनांक 15.07.2021

■ आज विश्व युवा कौशल दिवस पर मैं सभी युवाओं को शुभकामना देता हूँ ।
■ संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में युवाओं को रोजगार, अच्छे काम और उद्यमिता के लिए कौशल से युक्त हुनर को निखारने के लिए 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में घोषित किया । तब से विश्व युवा कौशल दिवस ने युवा लोगों को जागरूक किया है । इस दिवस ने प्रशिक्षण संस्थानों, फर्मों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नीति निर्माताओं और विकास भागीदारों के बीच संवाद का एक अनूठा अवसर प्रदान किया है । प्रतिभागियों ने कौशल के लगातार बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला है क्योंकि दुनिया विकास के एक स्थाई मॉडल की ओर अग्रसर है ।

दिनांक 12.07.2021

■ आज राष्ट्रीय सादगी दिवस पर मैं आह्वान करता हूं कि आइए हम अपने जीवन में सादगी अपनाएं ।
■ राष्ट्रीय सादगी दिवस हर साल 12 जुलाई को मनाया जाता है । यह एक जीवनशैली है। सादा जीवन के लिए प्रमुख हैं अपनी सम्पत्ति को कम करना और भौतिक सुविधाओं पर निर्भरता कम करना। सादा जीवन की विशेषता है कि व्यक्ति उससे संतुष्ट होता है जो उसे प्राप्त है न कि जो वह चाहता है। आम तौर पर तप और योग सादा जीवन जीने और विलास से बचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं । मजबूरी के कारण गरीबी में रहने वाले लोग सादा जीवन नहीं जीते बल्कि यह एक स्वैच्छिक जीवनशैली है। सादा जीवन के दौरान आप सरल चीजों में आनंद लेते हैं जैसे टहलना, बादलों को निहारना आदि । गैरजरूरी चीजों पर ध्यान नहीं देने के कारण आपकी मानसिक शांति अपेक्षाकृत अधिक होती है।

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■ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं।
■ जगन्नाथपुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का धाम हिंदुओं के चार धामों में से एक है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सैकड़ों साल से हो रही है। इसके महत्व का वर्णन पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। भगवान जगन्नाथ, विष्णु जी के पूर्णावतार श्री कृष्ण के ही एक रूप हैं। रथ यात्रा में सबसे आगे बलभद्र के रूप में बलरामजी बीच में बहन सुभद्रा और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ निकलता है। मान्यता है कि इस रथ यात्रा के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं और भगवत् कृपा से वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। जगन्नाथ पुरी की यात्रा आदिशंकराचार्य, चैतन्य महाप्रभु, रामानुजाचार्य, जयदेव, कबीर और तुलसी जैसे अनेक संतों ने की है और भगवान जगन्नाथ की महिमा को स्वीकार कर उनके अनन्य भक्त बन गये।

दिनांक 11.07.2021

■ विश्व जनसंख्या दिवस पर मैं शुभकामना देता हूं। यह कार्यक्रम हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है ताकि वैश्विक जनसंख्या के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़े । यह दिवस 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालन परिषद द्वारा स्थापित किया गया था । 11 जुलाई, 1987 को दुनिया की आबादी पांच अरब तक पहुंच गई थी।
■ विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य लोगों में जनसंख्या के मुद्दों जैसे परिवार नियोजन, लैंगिक समानता , गरीबी , मातृ स्वास्थ्य और मानवाधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

दिनांक 10.07.2021




■ भिखारी ठाकुरजी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें नमन करता हूं।
■ स्वर्गीय ठाकुर भोजपुरी भाषा के कवि, नाटककार, गीतकार, अभिनेता, लोक नर्तक, लोक गायक और सामंती व्यवस्था के विरोधी थे । उन्हें भोजपुरी भाषा के सबसे महान लेखक और पूर्वांचल के सबसे लोकप्रिय लोक लेखक के रूप में माना जाता है। उन्हें "भोजपुरी का शेक्सपियर" और "राय बहादुर" कहा जाता है।उनकी रचनाओं में एक दर्जन से अधिक नाटक, एकालाप, कविताएँ, भजन आदि शामिल हैं जो लगभग तीन दर्जन पुस्तकों के रूप में छपे। उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ बिदेसिया, गबरघिचोर, बेटी बेचवा और भाई बिरोध हैं। उन्हें बिदेसिया लोक रंगमंच परंपरा के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

दिनांक 08.07.2021




■ हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह के निधन की सूचना से मन व्यथित है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को चिर शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को दारूण दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। भावपूर्ण और विनम्र श्रद्धांजलि।।

दिनांक 07.07.2021




■ स्वर्गीय दिलीप कुमार हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय अभिनेता थे जो राज्य सभा के सदस्य रह चुके थे। दिलीप कुमारजी को उनके दौर का बेहतरीन अभिनेता माना जाता है, त्रासद या दु:खद भूमिकाओं के लिए मशहूर होने के कारण उन्हें 'ट्रेजिडी किंग' भी कहा जाता था। उन्हें भारतीय फ़िल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, इसके अलावा दिलीप कुमार को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज़ से भी सम्मानित किया गया था। आज दिनाँक 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार जी का दुःखद निधन सुबह 7:30 पर हो गया जिससे भारतीय सिनेमा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
■ उनकी पहली फ़िल्म 'ज्वार भाटा' थी, जो 1944 में आई। 1949 में बनी फ़िल्म अंदाज़ की सफलता ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई, इस फ़िल्म में उन्होंने स्वर्गीय राज कपूर के साथ काम किया। दीदार (1951) और देवदास (1955) जैसी फिल्मों में दुखद भूमिकाओं के मशहूर होने के कारण उन्हें ट्रेजिडी किंग कहा गया। मुगल-ए-आज़म (1960) में उन्होंने मुग़ल राजकुमार जहांगीर की भूमिका निभाई। वे आज भी अभिनेताओं के प्रेरणास्रोत्र है।
■ भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

दिनांक 06.07.2021




■ आदरणीय डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं ।
■ डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे । 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता के अत्यन्त प्रतिष्ठित परिवार में स्व0 मुखर्जी जी का जन्म हुआ । वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उन्होंने अल्प आयु में ही विद्या-अध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित कीं । 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने । एक विचारक तथा प्रखर शिक्षाविद् के रूप में उनकी उपलब्धि तथा ख्याति निरंतर आगे बढ़ती गयी ।
■ डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया । वे सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धांतवादी थे । उन्होंने बहुत से गैर कांग्रेसी की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबंधन का निर्माण किया । इस सरकार में वे वित्तमंत्री बने । इसी समय स्व0 वी0डी0 सावरकर जी के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए ।
■ मुस्लिम लीग की राजनीति से बंगाल का वातावरण अशांत हो रहा था । वहां सांप्रदायिक विभाजन की नौबत आ गयी एवं ब्रिटिश सरकार भी सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही थी । ऐसी विषम परिस्थितियों में अपनी विशिष्ट रणनीति से उन्होंने बंगाल के विभाजन के मुस्लिम लीग के प्रयासों को नाकाम कर दिया ।
■ डाॅ0 मुखर्जी का मानना था कि सभी भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि से समान हैं । एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है ।
■ महात्मा गांधी एवं सरदार पटेल के अनुरोध पर वे भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में शामिल हुए । उन्हें उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेवारी मिली । संविधान सभा और प्रांतीय संसद के सदस्य और केन्द्रीय मंत्री के नाते उन्होंने शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान बना लिया । राष्ट्रीय हितों की प्रतिबद्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानने के कारण उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया । कश्मीर को एक संविधान के अंतर्गत लाने के लिये उन्होंने अपना बलिदान दे दिया । उनका नारा था:
■ एक राष्ट्र, एक विधान ।
■ एक प्रधान, एक निशान ।।
■ आदरणीय स्वर्गीय डॉक्टर मुखर्जी के इस सपने को 21वीं सदी में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पूरा किया और डॉक्टर मुखर्जी का यह नारा आज कामयाब हो गया ।

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■ आदरणीय दलाई लामा के जन्म दिवस पर मैं उन्हें नमन करता हूँ ।
■ आदरणीय दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू हैं । उनका जन्म 6 जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर क्षेत्र में रहने वाले ओमान परिवार में हुआ था । दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है जिसका अर्थ है ज्ञान का महासागर ।
■ आदरणीय दलाई लामा के वंशज, अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप माने जाते हैं एवं मान्यता है कि मानवता की रक्षा के लिए इनका पुनर्जन्म हुआ है । आदरणीय दलाई लामा ने तिब्बत के लिए एक लोकतांत्रिक संविधान का प्रारूप प्रस्तुत किया ।
■ तिब्बत में शांति बहाल करने हेतु उन्होंने शांति योजना प्रस्तुत की । उन्होंने विचार रखा कि तिब्बत को एशिया के हृदय स्थल में स्थित एक शांति क्षेत्र में बदला जा सकता है ।
■ आदरणीय दलाई लामा के द्वारा तिब्बत मुक्ति के लिए अहिंसक संघर्ष जारी रखने हेतु 1989 को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया । उनका मानना है कि शांति, अहिंसा और हर सचेतन प्राणी के कल्याण हेतु कार्य करना बुनियादी सिद्धान्त है ।

दिनांक 01.07.2021

■ आज डॉक्टर्स डे पर मैं सभी चिकित्सकों, जो धरती के लिए भगवान समान हैं, को शुभकामनाएं देता हूं। कोरोना के इस भीषण दौर में जिस त्याग, तपस्या, निष्ठा और समर्पण से चिकित्सकों ने पीड़ितों की सेवा की है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।
■ नेशनल डॉक्टर्स डे डॉक्टर बी. सी. राय के चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उनकी जन्मतिथि पर 1जुलाई को मनाया जाता है।

दिनांक 26.06.2021

■ नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। यह नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध नशीली दवाओं के व्यापार के खिलाफ एक संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। यह 1989 से 26 जून को प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
■ आइये इस दिवस पर नशा मुक्त समाज बनाने का संकल्प लें।

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■ भारत में किसान आंदोलन के जनक, महान समाज-सुधारक, प्रकांड विद्वान, इतिहासकार और शंकराचार्य सम्प्रदाय के दसनामी संन्यासी अखाड़े के दण्डी संन्यासी स्वामी सहजानंद सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन ।

दिनांक 24.06.2021

■ दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे को होय॥
■ ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय । औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय ।।
■ दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय । मरी खाल की सांस से, लोह भसम हो जाय ।।
■ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोई ।।
■ ऐसे कालजयी दोहों और कविताओं के रचयिता कवि व समाज सुधारक, ज्ञानाश्रयी और निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक महान संत कबीरदास जी की जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूं। ।
■ कबीरदास ऐसे सरल और दृढ़निश्चयी थे कि समाज का कोई भी रंग कबीर पर नहीं चढ़ पाया । जीवन जीने और जीवन के उद्देश्य को पहचानने का प्रतिरूप हैं कबीर । कबीर का उद्देश्य किसी का विरोध करना मात्र नहीं था बल्कि उनका व्यक्तित्व एक दर्शन था। उन्होंने हर कुरीति, आडंबर और मानव के पतन के कारणों का विरोध किया तथा मानव जीवन के लिए जो सर्वोत्तम और एकमात्र सही रास्ता है, सदाचार, उसके बारे में बताया ।

दिनांक 23.06.2021

■ ओलंपिक दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं।
■ ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने और इस आयोजन के दौरान आयोजित खेलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 23 जून को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाया जाता है।
■ मेरी शुभकामना है कि भारत के खिलाड़ी ओलंपिक में देश का नाम रौशन करें ।

दिनांक 21.06.2021

■ 7वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ और योग से जुड़ने के लिए आह्वान करता हूँ ।
■ 27 सितंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी ने योग को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया जिसे 11 दिसंबर, 2014 को स्वीकार करते हुए 21जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया ।
■ योग किसी धर्म, किसी संप्रदाय की निजी वस्तु नहीं बल्कि यह मानव के लिए सबसे उपयोगी क्रियाओं में से एक है । प्रधानमंत्रीजी ने योग को विश्व स्वीकार्य बनाने के लिए कहा था "स्वास्थ्य और कल्याण के लिए योग सार्वभौमिक आकांक्षा का प्रतीक है । यह शून्य बजट में स्वास्थ्य बीमा, शरीर एवं आत्मा के सहज एकीकरण का विज्ञान, मानवता के लिए सद्भाव और शांति प्रकट करता है । यह स्वयं के लिए और स्वास्थ्य के लिए यात्रा है ।"
■ आज जब पूरी दुनिया कोविड-19 जैसी महामारी से जूझ रही है ऐसी परिस्थिति में योग और भी प्रासंगिक हो जाता है । योग ही एक ऐसा साधन है जो बिना किसी खर्च के अपने शरीर को कोविड-19 जैसी महामारी से लड़कर विजय प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है ।

दिनांक 20.06.2021

■ पितृ देवो भवः । भारत में यह मूल मंत्र है पिता को सम्मान देने के लिए । फादर्स डे मनाए जाने की परंपरा यूरोप में शुरू हुई और अब भारत में भी जोर शोर से मनाया जा रहा है । यह दिवस पिता को सम्मान देकर उनके साथ अपने संबंध को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है ।
■ फादर्स डे पर मैं युवाओं से आह्वान करता हूं कि वह पिता को सम्मान देने की भारत की स्वस्थ परंपरा को आगे बढ़ाएं और इसी आह्वान के साथ मैं फादर्स डे पर सभी पिताओं को शुभकामना देता हूं।

दिनांक 19.06.2021

■ आज वर्ल्ड एथनिक डे है। इस दिन के मनाने का आधार है अपनी संस्कृति के दायरे में डूबने और जीवन भर के अनुभवों का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करना।विभिन्न सांस्कृतिक, अनुवांशिक, भाषाई और सामाजिक विविधता के साथ दुनिया में यह मानव जीवन यात्रा चलती है । सोशल मीडिया और डिजिटलीकरण के युग ने हम सभी को एक-दूसरे की संस्कृतियों का अनुभव करने का अवसर दिया है ।

दिनांक 18.06.2021

■ महान वीरांगना, अप्रतिम शौर्य की प्रतिमूर्ति, मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाली, नारी शक्ति एवं वीरता की प्रतीक महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

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■ बिहार विभूति, शिक्षक, वकील, चंपारण सत्याग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी राजनीतिज्ञ तथा बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री अनुग्रह नारायण सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन ।

दिनांक 15.06.2021

■ आज विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस है । यह इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों को जागरूक कर बुजुर्गों के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया जा सके । मैं आह्वान करता हूँ कि आइये, सभी वृद्धजनों के साथ हम सम्मानपूर्ण व्यवहार करें ।

दिनांक 14.06.2021

■ आज विश्व रक्तदान दिवस है। आईए इस अवसर पर हम सभी रक्तदान जैसे पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें एवं लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित और जागरूक करने का संकल्प लें ।
■ रक्तदान महादान ।

दिनांक 12.06.2021

■ आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस है । इस अवसर पर मैं आह्वान करता हूँ कि हमलोग संकल्प लें कि बाल श्रम न करायेंगे और न ही उसे प्रोत्साहन देंगे ।
■ बालक किसी भी देश का भविष्य होता है । उसकी पढ़ाई-लिखाई, उसकी देखभाल आदि उसके मौलिक अधिकार हैं लेकिन बाल श्रम के रूप में उसके मौलिक अधिकारों का हनन कर हम उसे प्रदत्त अधिकारों से वंचित कर अन्य कामों में लगा देते हैं ।
■ विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत 2002 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ ने की थी । इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है ।

दिनांक 09.06.2021

■ आदिवासियों की संस्कृति, अधिकार एवं स्वाभिमान की रक्षा तथा गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक उठ खड़े होने वाले बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं। बिरसा मुंडाजी का संघर्ष सदा अमर स्मृति बनकर रहेगा।

दिनांक 08.06.2021

■ आज विश्व महासागर दिवस है । इस दिवस पर हम लोग महासागर के प्रति जागरूक होने के लिए संकल्प लें । महासागर हमारे पृथ्वी पर जीवन का प्रतीक है । पर्यावरण संतुलन में यह प्रमुख भूमिका अदा करता है । अगर महासागर नहीं हो तो न बादल बने, न ही बारिश हो और बारिश बंद होने से धरती पर मानव जीवन नष्ट हो जायेगा ।
■ पहला विश्व महासागर दिवस 8 जून, 2009 को मनाया गया था जिसे 2008 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी । महासागर दिवस का उद्देश्य महासागरों के महत्व और उनकी वजह से आने वाली चुनौतियों के प्रति विश्व में जागरूकता पैदा करना है ।

दिनांक 05.06.2021

विश्व पर्यावरण दिवस
■ आज विश्व पर्यावरण दिवस है । पर्यावरण की रक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है । 1972 में पर्यावरण पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन स्टॉकहोम में हुआ था । इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम निर्धारित करने एवं 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया ।
■ वर्ष 2021 के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली है जो कई रूपों में हो सकती है जैसे पेड़ लगाना, शहर को हरा-भरा करना, नदियों एवं तटों की सफाई इत्यादि । कोविड- 19 महामारी ने जिस तरह से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है उसके मूल में कहीं न कहीं पर्यावरण भी है । यदि हरे-भरे ऑक्सीजन दायक पेड़ होते तो साफ आकाश, शुद्ध हवा और पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन लोगों को मिलता जिससे कोरोना का दुष्प्रभाव कम होता । संपूर्ण मानव जीवन प्रकृति पर ही निर्भर है । प्रकृति को बचाये रखने हेतु हम सबको को संकल्प लेने की जरूरत है अन्यथा प्रकृति के कोपभाजन हम लोग होंगे और उस स्थिति में हमारी मानव जाति संकट में आ जायेगी ।

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स्वर्गीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकरजी
■ आज स्वर्गीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकरजी की पुण्यतिथि है । उनकी विद्वत्ता और अध्यापन कार्य के कारण उन्हें गुरु गोलवलकर के नाम से ज्यादा जाना जाता है।स्व॰ गोलवलकरजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक थे । गुरु गोलवलकरजी अत्यंत मेधावी थे । विश्वविद्यालय में बिताये चार वर्षों के कालखंड में उन्होंने संस्कृत महाकाव्य, पाश्चात्य दर्शन, श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद के विचारों को तथा भिन्न-भिन्न उपासना ग्रंथों, शास्त्रों का आस्थापूर्वक अध्ययन किया जिसके कारण उनकी रुचि आध्यात्मिक जीवन की ओर जागृत हुई । 1946 में देश विभाजन के निर्णय के खिलाफ डटकर खड़ा होने के लिए वे जनता से आह्वान करते रहे । उनका प्रेरणादायक कथन है :
■ "मेरा रूझान राष्ट्र संगठन कार्य की ओर प्रारंभ से है । यह कार्य संघ में रहकर अधिक परिणामकारिता से मैं कर सकूँगा । इसलिए मैंने संघ के कार्य में ही स्वयं को समर्पित कर दिया । मुझे लगता है कि स्वामी विवेकानंद के तत्वज्ञान और कार्यपद्धति से मेरा यह आचरण सर्वथा सुसंगत है ।"

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आज संपूर्ण क्रांति दिवस है । 5 जून 1974 को स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण जी द्वारा संपूर्ण क्रांति का नारा और विचार दिया गया था । उन्होंने तत्कालीन जनविरोधी सरकार की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए इस नारे के माध्यम से लोगों का आह्वान किया था ।
■ लोकनायक स्वर्गीय जय प्रकाश नारायण जी ने कहा था :
■ "संपूर्ण क्रांति से मेरा तात्पर्य समाज के सबसे अधिक दबे कुचले व्यक्ति को सत्ता के शिखर पर देखना है ।"
■ 5 जून के विशाल प्रदर्शन को देख कर ऐसा लगता था जैसे पूरा बिहार खड़ा हो गया हो । स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण के इस संपूर्ण क्रांति के नारे ने जनता में अभूतपूर्व साहस भर दिया यह संघर्ष सत्ता बनाम आम जनता का हो गया था ।
■ संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 04.06.2021

■ आज अंतर्राष्ट्रीय अबोध बालक दिवस है। समाज में बच्चों के प्रति हिंसा एवं अन्याय को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष 4 जून को विशेष तौर पर मासूम बच्चों को हिंसा से बचाने के लिए International day of innocent children victims of aggression घोषित किया । यह कदम संयुक्त राष्ट्र ने फिलीस्तीन और लेबनान युद्ध में बच्चों की मौत के बाद उठाया । संयुक्त राष्ट्र का मानना था कि यह केवल दो देशों की बात नहीं विश्व के हरेक घर मुहल्ले में अबोध बच्चे किसी न किसी तरह की हिंसा के शिकार हैं ।
■ आईए, अंतरराष्ट्रीय अबोध बालक दिवस पर हम सब संकल्प लें कि बच्चों के भविष्य की रक्षा करेंगे और उन्हें हिंसा से बचाने के लिए भरपूर प्रयास करेंगे ।

दिनांक 03.06.2021

■ आज विश्व साइकिल दिवस पर मैं पर्यावरण के संरक्षक के तौर पर साइकिल चलाने वाले लोगों को बधाई देता हूं।
■ अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 3 जून को अंतरराष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस घोषित किया गया। विश्व साइकिल दिवस का संकल्प साइकिल की विशेषता के कारण लिया गया। साइकिल के उपयोग से जहां पर्यावरण संरक्षित होता है वहीं लोग स्वस्थ और दीर्घायु होते हैं। साईकिल दो शताब्दियों से उपयोग में है और यह परिवहन का एक सरल एवं विश्वसनीय साधन है।

दिनांक 31.05.2021

■ तंबाकू सेवन से विश्व में 50 लाख लोगों की और भारत में 14 लाख लोगों की मृत्यु हर वर्ष होती है। तंबाकू से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। तंबाकू का सेवन बिहार में 25% लोग करते हैं। कैंसर से होनेवाली कुल मौतों में से 40% की मौत तंबाकूजनित कैंसर से होती है। आज अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस है। आईए, इस अवसर पर बिहार को तंबाकू मुक्त बनाने का हमलोग संकल्प लें।

दिनांक 30.05.2021

■ हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर मैं हिंदी पत्रकारिता से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन करते हुए उन्हें शुभकामना देता हूं
■ हिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ 1826 में एक साप्ताहिक पत्र "उदंत मार्तंड" के रूप में प्रारंभ हुआ । इसके संपादक पंडित जुगल किशोर थे। पत्र की भाषा को संपादकों ने मध्यदेशीय भाषा कहा । यह पत्र सरकारी सहयोग के अभाव में अगले ही वर्ष बंद हो गया । कंपनी सरकार ने मिशनरियों के पत्र को डाक आदि की सुविधा दे रखी थी परंतु काफी प्रयास करने पर भी उदंत मार्तंड को यह सुविधा नहीं दी गई ।
■ हिंदी पत्रकारिता का दूसरा युग 1873 से 1900 तक चला । इस दौर में एक किनारे पर भारतेंदु हरिश्चंद्र पत्रिका थी और दूसरे किनारे पर सरस्वती । इन 27 वर्षों में प्रकाशित पत्रों की संख्या 300 से 350 तक हो गई इनमें से अधिकांश पत्र मासिक थे या साप्ताहिक।
■ आज हिंदी की पत्र, पत्रिकाएं और पत्रकारिता स्थापित हो चुकी है तथा किसी भी अन्य भाषा से कमतर नहीं है।

दिनांक 29.05.2021

■ स्वंतत्रता सेनानी, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और महान् किसान नेता स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें सादर नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

दिनांक 28.05.2021

■ आज श्रद्धेय विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती के अवसर पर उन्हें सादर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ विनायक दामोदर सावरकरजी जो सामान्यतः वीर सावरकर के नाम से जाने जाते हैं उन्होंने हिंदुत्व के राष्ट्रीय दर्शन को स्थापित किया । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी अतुलनीय है । उन्हें मारने के लिए अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी और अंडमान में काल कोठरी में बंद करके रखा । उन्हें वहां जितनी यातनाएं दी गईं उसे बर्दाश्त करना किसी सामान्य मानव के लिए संभव नहीं है । उनके प्रति जितनी श्रद्धा की जाए वह कम है ।
■ वीर सावरकर बाल्यावस्था से ही प्रखर बुद्धि के थे । चाफेकर बंधुओं को जब ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा दी तो यह बालक बेचैन हो गया और 14 वर्ष की अवस्था का वह सुकुमार बालक देवी को साक्षी मानकर शपथ ले बैठा कि मैं क्रांति करके भारत को स्वतंत्रता दिलाउंगा ।
■ सन 1857 में जो स्वतंत्रता की पहली क्रांति हुई थी उसे ब्रिटिश सरकार ने सिपाही विद्रोह नाम दे दिया ताकि वह आगे नहीं फैले लेकिन मेधावी सावरकर ने तर्क और वास्तविक तथ्यों के आधार पर The Indian War of Independence 1857 नामक ऐसी पुस्तक तैयार की जिसने साबित कर दिया कि वह स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रथम आंदोलन था।
■ मैं उन महान् विभूति वीर सावरकर को पुनः नमन करता हूं ।

दिनांक 26.05.2021

■ बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
■ वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था । इसी दिन वे गौतम से गौतम बुद्ध हुए।
■ गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म विकसित किया जिसकी मूल अवधारणा है कि जन्म मरण का चक्र ही सारे दुखों की जड़ है और इस चक्र का मूल कारण तीन हैं मोह, राग और द्वेष अर्थात् भ्रम, लालच और जलन । इन्हीं तीनों पर नियंत्रण के लिए गौतम बुद्ध ने लोगों को उपदेश दिया और बताया कि कैसे पुनर्जन्म के चक्र से मनुष्य बचेगा ।
■ यही मूल अवधारणा सनातन धर्म की भी है कि जन्म मरण के चक्र से बचने के लिए अपनी आत्मा को जानो और सभी को समान जानो किसी से लोभ,मोह, द्वेष न करो और सदाचार को सर्वोच्च मानो । इसीलिए गौतम बुद्ध को हिंदू विष्णु भगवान के दशावतारों में से एक मानते हैं।
■ भगवान बुद्ध ने प्रेम, सत्य, अहिंसा, करूणा, सदाचार और भाईचारा का जो संदेश दिया वह आज भी हमारी प्रेरणा है ।

दिनांक 25.05.2021

■ आज नृसिंह जयंती के शुभ अवसर पर मैं सभी को बधाई देता हूं।
■ हिरण्यकशिपु नामक दैत्य ने ऐसा अद्भुत वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसका वध न दिन में न रात में, न घर के अंदर न घर के बाहर, न जल में, न आकाश में न धरती पर, न पाताल में, न किसी शस्त्र से, न मनुष्य से, न देवता से, न असुर से, न किसी जानवर से मारा जा सकेगा लेकिन भगवान विष्णु ने चौथा अवतार नृसिंह के रूप में लेकर हिरण्यकशिपु का वध करके यह सन्देश दिया कि बुराई में चाहे जितनी भी ताकत हो अच्छाई के हाथों उसकी मौत होना सुनिश्चित है।

दिनांक 22.05.2021

■ सती प्रथा जैसे समाजिक कोढ़ को समाप्त करने वाले समाज सुधारक राजा राममोहन रायजी की जयंती पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
■ राजा राममोहन रायजी ब्रह्म समाज, आत्मीय सभा, प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, साधारण ब्रह्म समाज और हिंदू स्कूल के संस्थापक थे । उनके जैसे समाज सुधारक विरले ही पैदा होते हैं।
■ राजा राममोहन रायजी को राजा की पदवी मुगल सम्राट अकबर-II द्वारा दी गई थी । राजा राममोहन राय को बहुत सारे इतिहासकारों ने बंगाल के नवयुग का पिता घोषित किया है।

दिनांक 20.05.2021

■ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की अर्द्धांगिनी जनकनंदिनी मां सीता के जन्मोत्सव जानकी नवमी के पावन अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं।
■ मां सीता ने जिस उत्तम चरित्र का उदाहरण जगत में प्रस्तुत किया वह अनुपम और अनुकरणीय है। भगवान श्रीराम के लिए उनमें जो सेवा भाव तथा प्रेम था वह आज भी अमर और प्रेरणादायक है ।
■ मां जानकी सम्पूर्ण जगत की जननी हैं । उन्हें मैं सादर नमन करता हूं ।

दिनांक 17.05.2021

■ अल्प आयु में ही भारत के चारों कोणों पर भगवान विष्णु के विभिन्न रूपोंवाले पीठ के संस्थापक, प्रकांड विद्वान, उपनिषदों के भाष्यकार,सनातन धर्मरक्षक, संन्यासी आदिगुरू शंकराचार्य जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन करता हूं ।

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■ हिंदी साहित्य में भक्ति संबंधी कविताओं के अनुपम रचनाकार, जिनकी कविताएं हमें भगवान श्रीकृष्ण के सानिध्य का एहसास कराती हैं, भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त,भक्त शिरोमणि महाकवि सूरदास को उनकी जयंती पर सादर प्रणाम करता हूँ।

दिनांक 14.05.2021

■ मैं सभी मुस्लिम भाइयों को ईद उल फित्र की शुभकामनाएं देता हूं।
■ ईद उल फित्र की शुरुआत मोहम्मद साहब द्वारा की गई । कई मान्यताओं के अनुसार जब मोहम्मद साहब मक्का से मदीना स्थानांतरित हुए तब उन्होंने वहां इसकी शुरुआत की ।

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■ तेज के पुंज, पुरुषार्थ के प्रतीक, अन्याय के घोर वैरी तथा विष्णु भगवान के दशावतारों में से छठे अवतार भगवान श्री परशुरामजी की जयंती पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं ।
■ कहा जाता है कि वे भगवान विष्णु के आवेशावतार हैं ।
■ पितामह भृगु द्वारा नामकरण राम किए जाने और शिवजी द्वारा प्रदत्त दिव्य परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये।
■ परशुराम जी का तेज, शौर्य और धनुर्विद्या की महानता इसी से प्रकट होती है कि वे भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों के गुरु थे।

दिनांक 12.05.2021

■ महर्षि पराशर मन्त्रद्रष्टा ऋषि, शास्त्रवेत्ता, ब्रह्मज्ञानी थे। येे महर्षि वसिष्ठ के पौत्र और व्यासजी के पिता हैं। कहा जाता है कि प्राचीन विष्णु पुराण पराशर जी ने ही लिखा था । ये गोत्रप्रवर्तक भी थे।
■ महर्षि पराशर की जयंती पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं।

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■ अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस पर 12 मई को मनाया जाता है। नर्स का एक शाब्दिक अर्थ यह भी होता है "किसी व्यक्ति या वस्तु को प्यार से हाथों या गोद में लेना।" नर्सों का काम है अपनी सेवा से मरीजों को जीवन दान देना । नर्सेज जिस तरह से मरीजों की देखभाल करती हैं उतनी सेवा सुश्रुषा तो मरीजों के अपने परिजन भी शायद नहीं कर पाते । अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस पर मैं सभी नर्सेज को बधाई देता हूं और उनकी सेवा को सलाम करता हूं।

दिनांक 09.05.2021

■ आज मैं मदर्स डे की शुभकामनाएं देता हूं।
■ यह दिन मां और मातृत्व को सम्मान देने के लिए यूरोप और अमेरिका में प्रारंभ हुआ और आज हमारे यहां भी प्रचलित हो गया ।
■ भारतवर्ष में तो मां को जीवनदायिनी कहा गया है । इसीलिए हमारे यहां जो भी जीवन में सहयोग देती है सभी को मां पुकार कर चरम सम्मान दिया गया है जैसे गाय को दूध देने के कारण गो माता कहा जाता है, नदी को जल देने के कारण माता कहा जाता है और धरती जो अपनी छाती चीर कर हमें अन्न प्रदान करती है उसे धरती माता कहा जाता है । मां है तो सृष्टि है, मां नहीं तो सृष्टि नहीं । मां सर्वोपरि है । हिंदुओं में धन, विद्या शक्ति सभी की अधिष्ठात्री मां ही कही जाती हैं । भारतवर्ष में सब दिन मां को पूजने की परंपरा है वह चाहे जिस रूप में भी हो ।

दिनांक 08.05.2021

■ वर्ल्ड रेड क्रॉस डे पर मैं शुभकामनाएं देता हूं ।
■ इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमिटी के संस्थापक हेनरी डुना की जन्म तिथि 8 मई को वर्ल्ड रेड क्रॉस डे के रूप में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है ।
■ 8 मई 1948 से शुरू हुआ यह सफर 73 वर्षों से लगातार जारी है । यह ऐसी संस्था है जो विश्व के किसी भी कोने में आई किसी भी आपदा की घड़ी में सक्रिय हो जाती है । इसके सम्मेलनों में जो विचार विमर्श होता है वह बहुत ही सार्थक होता है और मानवता ही उसका आधार होती है। 2009 में जो विमर्श हुआ उसका विषय था Change in climate. 2013 के सम्मेलन का विषय था Be together for the reason of humanity. 2014 में विषय था Get together for everyone people और 2015 में चर्चा का विषय था Together for humanity .
■ Red cross society मनुष्य जाति की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहती है।

दिनांक 07.05.2021

■ आज सगुण धारा की कृष्ण भक्ति शाखा के आधार स्तंभ स्व० वल्लभाचार्य जी की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं।
■ वल्लभाचार्यजी के अनुसार ब्रह्म के तीन स्वरूप हैं अधिदैविक, आध्यात्मिक एवं अंतर्यामी रूप । लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण को ही परब्रह्म स्वीकारते हुए उनके रूप और लीलाओं को ही उन्होंने जगत में आनंद का स्रोत माना गया । उनके मतानुसार जगत ब्रह्म की लीला का विलास है संपूर्ण सृष्टि लीला के निमित्त ब्रह्म की कृति है ।
■ मैं एक बार फिर वल्लभाचार्यजी को सादर प्रणाम करता हूं ।
■ आज स्वर्गीय रवींद्रनाथ टैगोर की भी जयंती है । मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ स्व० टैगोर एशिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। उन्हें गीतांजलि लिखने के लिए नोबेल साहित्य पुरस्कार दिया गया । स्वर्गीय टैगोर लेखक, कवि के साथ साथ दार्शनिक थे । वे भारतीय संस्कृति की चेतना में बंगला साहित्य के माध्यम से जान फूंकने वाले माने जाते हैं ।
■ वे एकमात्र ऐसे कवि थे जिन्होंने दो देशों को राष्ट्रगान दिया, भारत को जन गण मन और बंगलादेश को आमार सोनार बांगला ।
■ स्वर्गीय रवींद्र नाथ टैगोर को उनकी विद्वत्ता और उनके प्रति श्रद्धा के कारण गुरुदेव के नाम से भी पुकारा जाता है ।
■ बंगला साहित्य में बोलचाल की भाषा का नवीन प्रयोग कर उन्होंने बंगला साहित्य को अभिजात्य के प्रभाव से मुक्त किया ।

दिनांक 03.05.2021

■ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर मैं सभी प्रेस मीडिया के बंधुओं को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ संयुक्त राष्ट्र संघ ने 3 मई की तारीख को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया । संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा यह कदम प्रेस के प्रति सरकारों के कर्तव्य को याद कराने के लिए उठाया गया । यूनेस्को प्रेस मीडिया के लोगों का प्रत्येक वर्ष कांफ्रेंस आयोजित करता है जिसमें अन्य विषयों के साथ साथ चर्चा का मुख्य विषय होता है प्रेस की स्वतंत्रता की विश्व में स्थिति ।
■ प्रेस भारत में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है इसलिए उसकी स्वतंत्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र मीडिया सरकारों का पथ प्रदर्शन करने का काम करती है ।

दिनांक 01.05.2021

■ आज विश्व श्रम दिवस पर मैं सभी कर्मयोगी श्रमिक भाइयों को शुभकामनाएं देता हूं।
■ श्रम को सम्मान देने की बहुत ही स्वस्थ परंपरा हमारे देश में, हमारे धर्म में रही है । श्रमिक आंदोलन जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चले उसी के परिणामस्वरुप एक दिन के 24 घंटों को तीन भागों में बांटा गया और 8 घंटे काम के, 8 घंटे मनोरंजन के तथा 8 घंटे विश्राम के निर्धारित किए गए । आज का दिन श्रमिकों के लिए जश्न का दिन होता है । हर आदमी के अंदर एक श्रमिक होता है। श्रम के बिना इस देश और समाज का विकास नहीं हो सकता ।श्रमिक ही विकास की बुनियाद होते हैं । इसलिए "श्रमिक का सम्मान, राष्ट्र का उत्थान" है । श्रमिक कर्मयोगी हैं।
■ मैं प्रदेश और देश के सभी कर्मवीरों, कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूं, उनके श्रम को नमन करता हूं ।

दिनांक 27.04.2021

■ हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ हनुमानजी असीमित शक्तिशाली और ज्ञान के भंडार हैं । वे संकट मोचन हैं । लोग किसी भी भय के अवसर पर हनुमानजी को याद करते हैं जिससे उन्हें आत्मिक बल प्राप्त होता है ।
■ कोरोना काल के भीषण संकट से हनुमानजी ही पार लगायेंगे -
■ ‘‘नासै रोग हरै सब पीड़ा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ।’’
■ कोरोना जैसी महामारी भी भाग जायेगी यदि हनुमानजी हमें सम्बल देंगे, आत्मविश्वास देंगे ।
■ मैं सभी के लिये प्रार्थना करता हूं कि संकट मोचन हनुमानजी सभी को आरोग्य प्रदान करें तथा मानवता पर छाये सबसे बड़े संकट कोरोना से हम सबकी रक्षा करें ।

दिनांक 25.04.2021

■ जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पर मैं सभी जैन धर्मावलंबी बंधुओं को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ भारत में जो सर्व धर्म समभाव है उसी का यह प्रभाव है कि इस देश में दुनिया के सभी धर्मावलंबी रहते हैं और स्वतंत्र एवम् निर्भीक वातावरण में अपने अपने धर्म का पालन करते हैं।
■ यह बिहार का सौभाग्य है कि यहां 24 वें तीर्थंकर ने जन्म लिया । भगवान महावीर का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी को हुआ था।
■ जैन धर्म की मूल अवधारणा अहिंसा है और सनातन धर्म की भी मूल अवधारणा अहिंसा ही है।
■ मैं फिर एक बार महावीर जयंती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 24.04.2021

■ बिहार के सिमरिया में 23 सितंबर 1908 को जन्म लेने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की आज 24 अप्रैल को पुण्यतिथि है । मैं उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं ।
■ दिनकरजी क्रांतिकारी और वीर रस से भरी कविताओं द्वारा लोगों में जोश का जो वातावरण तैयार करते थे वह किसी से छुपा नहीं है । उनके वीर रस की कविताएं लोगों को क्रांति के लिए जोश से भर देती थीं । शुरू में दिनकरजी क्रांतिकारियों के पक्ष में रहे परंतु बाद में उन्होंने गांधीवाद को स्वीकार किया परंतु उनका यह भी मानना था कि युद्ध विनाशकारी है परंतु स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए युद्ध अपरिहार्य है।
■ चीन से मिली हार के बाद जहां देश का मनोबल टूटा हुआ था दिनकर जी ने संसद में हुंकार भरते हुए सरकार और आम जनता का आह्वान किया था :
■ "रे रोक युधिष्ठिर को न यहां, जाने दे उनको स्वर्ग धीर ।
■ पर फिरा हमें गांडीव गदा, लौटा दे अर्जुन भीम वीर ।।"
■ इमर्जेंसी के विरुद्ध स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में दिनकर जी की कविता को ही उद्धृत किया गया
■ "सिहासन खाली करो कि जनता आती है " ।
■ इस नारे के साथ जयप्रकाश नारायण जी ने जो आंदोलन शुरू किया उसने कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंका ।
■ मैं एक बार फिर कालजयी कविताओं के रचनाकार महान् कवि दिनकर जी को नमन करता हूं ।

दिनांक 21.04.2021

सियाराम मय सब जग जानी ।
करहुं प्रणाम जोरी जुग पानी ।।
■ प्रभु श्रीराम और मां सीता पूरे जगत में व्याप्त हैं । सियाराम के चरणों में वंदना करते हुए मैं श्रीराम की जन्म तिथि रामनवमी के शुभ अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देता हूँ ।
■श्रीराम मर्यादा और आदर्श के साकार स्वरूप हैं । श्रीराम ने मर्यादा का जो उदाहरण समाज को दिया वह युगों के परिवर्तन के बावजूद आज भी सबों के लिए अनुकरणीय है । वे पिता की इच्छा को ही आदेश मानकर राजसत्ता को मिट्टी के ढेले के समान त्याग कर वन को चले गये । किष्किंधा और लंका पर विजय प्राप्त कर लेने के बावजूद उन्होंने वहाँ का राजा बनना स्वीकार नहीं किया बल्कि दोनों राज्यों को अपने मित्रों सुग्रीव और विभीषण के सुपुर्द कर दिया ।
■ राजा की मर्यादा के लिए उन्होंने लोकापवाद को ध्यान में रखते हुए माँ जानकी तक को वन में भेज दिया । यहाँ तक कि अपने वचन की मर्यादा का पालन करने के लिए उन्होंने अपने परमप्रिय भाई लक्ष्मण को मृत्युदंड दे दिया ।
■ भगवान श्रीराम के चरणों में सबके लिए स्थान रहा वह चाहे पशु-पक्षी हो, राक्षस हो या नगरवासी-वनवासी मानव की कोई भी जाति हो । भगवान श्रीराम के चरित्र को जिसने भी सुना उसने उन्हें अपना आदर्श पाया । इसीलिए हजारों वर्ष बीत जाने के बावजूद मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम आज भी हमारे आदर्श हैं। श्रीराम की कथा रामायण सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी के लिए आदर्श संबंधी ग्रंथों में सबसे ऊपर है ।
■कलियुग में श्रीराम का नाम ही भवसागर पार कराने वाला है ।
नामु राम को कल्पतरू कलि कल्याण निवासु ।
जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु ।।
■कलियुग में श्रीराम का नाम कल्पतरू और कल्याण कराने वाला है जिसके स्मरण करने से भाँग-सा का निकृष्ट तुलसीदास तुलसी के समान पवित्र हो गया ।
■ राम नाम मनिदीप धरू जीह देहरीं द्वार ।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर ।।
■ तुलसीदासजी कहते हैं यदि तू भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहता है तो मुखरूपी द्वार की जीभरूपी देहली पर रामनामरूपी मणि-दीपक को रख ।
■ प्रभु श्रीराम के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए उनके नाम का जप करते रहें ।
■आज मां सिद्धिदात्री की आराधना का भी दिन है । मैं प्रभु श्रीराम और मां सिद्धिदात्री से मानव जाति पर आए कोरोना महामारी जैसे संकट को दूर करने हेतु प्रार्थना करता हूं और एक बार फिर सभी को रामनवमी तथा नवरात्र की शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 19.04.2021

■ जनता दल (यू ) के प्रत्याशी के रुप में 2015 और 2020 में तारापुर विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित माननीय सदस्य, श्री मेवालाल चौधरी जी का निधन 19.4.21 को हो गया । मैं इसे सुनकर अवाक हूं। काल ने असमय ही एक विद्वान और समाज को कुछ दे सकने योग्य व्यक्ति को समाज से छीन लिया जिसकी भरपाई कतई नहीं हो पाएगी ।
■ श्री मेवालाल चौधरी अत्यंत लोकप्रिय होने के साथ साथ उद्यान विधा के बहुत ही अच्छे जानकार थे। वे भारत सरकार में हॉर्टिकल्चर कमिश्नर, राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय,पूसा, समस्तीपुर और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति रहे।
■ मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को वे चिर शांति प्रदान करें।

दिनांक 14.04.2021

■ आज 14 अप्रैल को डाॅ॰ भीम राव अम्बेदकर या बाबा साहब अम्बेदकर की जन्मतिथि के अवसर पर मैं उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं ।
■ बाबा साहब अम्बेदकर एक भारतीय न्यायविद्, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे जिन्होंने दलित आंदोलन को प्रेरित किया और अस्पृश्यता(दलितों) तथा सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाया ।
■ बाबा साहब अम्बेदकर की विद्वत्ता और स्पष्ट सकारात्मक सोच के कारण ही संविधान सभा ने संविधान की रचना का भार देते हुए उन्हें संविधान प्रारूप समिति (ड्राफ्ट्स कमिटी) का अध्यक्ष नियुक्त किया और इसीलिये वे भारत के संविधान के मुख्य वास्तुकार माने जाते हैं । 25 नवम्बर, 1949 को बाबा साहब द्वारा संविधान का प्रारूप अंतिम रूप से तैयार कर संविधान सभा के अध्यक्ष डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसादजी को प्रस्तुत किया गया ।
■ उनकी विद्वत्ता और दूरदर्शिता का ही प्रभाव था कि उन्हें स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया ।
■ बाबा साहब को 1990 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न दिया गया ।

दिनांक 29.03.2021

■ मैं होली के शुभ अवसर पर सभी बिहारवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
■ होली केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि संस्कृति है । यह संस्कृति हमें सिखाती है कि चाहे विगत एक वर्ष में हमारा रिश्ता किसी के साथ कैसा भी रहा हो सब भूल कर नये सिरे से उत्साहजनक रिश्ता कायम हो । किसी से कोई शिकवा शिकायत शेष न रहे । होली सारे तनावों को भूल कर उत्साह से सराबोर हो मस्त हो जाने का त्यौहार है ।
■ मैं कामना करता हूं कि राज्य में सबों के बीच सकारात्मक एवं सौहार्द का माहौल कायम हो ।

दिनांक 22.03.2021

■संघीय ढांचे का एक राज्य बिहार जो 1912 में स्वतंत्र रुप से एक राज्य के तौर पर अस्तित्व में आया वह बिहार राज्य 94,163 किलोमीटर में फैला हुआ एक भूभाग मात्र नहीं है बल्कि यह संवेदना की जीती जागती मिसाल है ।
■ यह बिहार की ही धरती है जहां मां सीता ने जन्म लिया और जहां देव नदी गंगा बहती है।
■ बिहार क्रांति की धरती रही है, परिवर्तन की धरती रही है और यही कारण है कि बिहार ने दुनिया को सबसे पहला लोकतंत्र दिया।
■ बिहार की धरती वह धरती है जो गौतम को बुद्ध बना देती है, मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा बनने की शुरुआत करा देती है।
■ यह हम लोगों के लिए गौरव का विषय है कि बिहार में सबसे अधिक आबादी युवाओं की है । दुनिया को बिहार ने गुप्त काल और मौर्य काल जैसे कालखंड दिए हैं ।गुप्त काल को भारत का स्वर्णिम काल कहा जाता है । मगध साम्राज्य की सीमाएं तो आज के भारत की सीमाओं से बहुत आगे थीं ।
■ हिंदी भाषी बिहार राज्य की मिट्टी अत्यंत ही संवेदनशील है और यही कारण है कि जितनी भी क्रांतियां देश में हुई हैं उनमें बिहार आगे रहा है लेकिन बिहार में क्रांति अफवाहों पर नहीं होती है बल्कि यहां के संवेदनशील लोग सारी सच्चाई को जानकर आगे बढ़ते हैं और पूरे भारत में नेतृत्व करते हैं। यही कारण है कि चाहे नागरिकता कानून हो या कृषि कानून, दोनों के संबंध में फैलाए गए भ्रम पर बिहार ने प्रतिक्रिया नहीं दी ।
■ बिहार समाजवाद और सामाजिक परिवर्तन की भूमि है । बिहार में ही पहली बार जमींदारी उन्मूलन कानून बनाया गया जिसने देश को दिशा दी।
■ जयप्रकाश आंदोलन बिहार से ही शुरू हुआ जिसने देश की राजनीतिक दिशा और दशा बदल कर रख दी। आज राजनीति में जितने भी अग्रणी लोग हैं अधिकांश उसी आंदोलन की उपज हैं।
■ बिहार ने चाणक्य जैसी विभूति को जन्म दिया जिन्होंने सत्ता को कुछ नहीं समझा ।
■ बिहार में राजनीतिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी अपने चरम पर रही है और आज भी है।
■ गंगाजल से पवित्र, दुनिया को लोकतंत्र से परिचित करानेवाली और भारत को एक कर देनेवाले मगध साम्राज्य की धरती है बिहार ।
■ इस पावन धरती को नमन करते हुए मैं बिहार वासियों को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

दिनांक 11.03.2021

■ आशुतोष, शशांक शेखर, चंद्रमौलि, देवों के देव महादेव के चरणों में सादर वंदना करते हुए आज प्रदेश एवं देश के सभी वासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनायें देता हूँ।
■ महादेव इस भौतिक जगत के सभी प्राणियों को अपार सुखों के दाता हैं । महाशिवरात्रि के बारे में विभिन्न मान्यतायें हैं जिनमें एक महादेवजी का विवाह है और दूसरा उनका मनमोहक नृत्य ।
■ स्वयं भभूत लपेटकर रहने वाले भोले शंकर जरा-सी आराधना में ही प्रसन्न होकर कोई भी वर देने के लिए प्रसिद्ध हैं । ये ऐसे देव हैं जिनके परिवार में एक-दूसरे के घोर विरोधी प्रेम से रहते हैं जैसे भोले शंकर के गले में लिपटे हुए नाग का प्रिय भोजन चूहा है जो गणेशजी का वाहन है । इसी तरह नाग का वैरी मोर है जो कार्तिकेयजी का वाहन है और महादेवजी की सवारी बैल देवी पार्वती की सवारी सिंह का प्रिय आहार है । परस्पर विरोधी होने के बावजूद सब एक ही परिवार में स्नेहपूर्वक रहते हैं । यह उदाहरण हम लोगों को प्रेरणा देता है कि चाहे कोई कितना भी वैरी हो, हम उसके साथ चाहें तो सप्रेम रह सकते हैं ।
■ पुनः उन महायोगी, जटाधार, त्रिनेत्रधारी, त्रिशूलधारी महादेवजी को प्रणाम करते हुए सभी को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 08.03.2021

■ आज महिला दिवस के अवसर पर मैं बिहार प्रदेश सहित देश और दुनिया की सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ सबसे पहला महिला दिवस 28 फरवरी,1909 को मनाया गया । 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया । इसका उद्देश्य उस समय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था । बाद में कई सम्मेलनों के बाद आधिकारिक तौर पर वर्ष 1921 से 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाने लगा । इस तरह 8 मार्च को मनाया जानेवाला महिला दिवस अपने 100 वर्ष पूरे कर चुका है ।
■ 8 मार्च, 1975 को संयुक्त राष्ट्र में महिला दिवस को आधिकारिक तौर पर मनाया गया। इस महिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण है । आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ सशक्त हुई हैं बल्कि कई क्षेत्रों में पुरूषों को पीछे छोड़ चुकी हैं ।
■ सनातन धर्म में महिलाओं को शुरू से ही सम्मानित किया गया और शक्ति, बुद्धि, धन सभी की देवी महिला ही रहीं । हमारे वैदिक काल में कहा भी गया कि
■ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः
■ यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफलाः क्रियाः ।
■ अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता का वास होता है और जहां उनकी पूजा नहीं होती वहां की सभी क्रिया निष्फल हो जाती है । वैदिक काल से यह प्रेरणा हमें मिलती रही ।
■ महिला दिवस पर सभी महिलाओं को एक बार फिर मैं शुभकामना देता हूं ।

दिनांक 17.02.2021

■जननायक स्व॰ कर्पूरी ठाकुरजी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ ।
■स्व॰ कर्पूरी ठाकुरजी ने राजनीति में सादगी का एक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसके लिये वे सदैव याद किये जायेंगे । उनकी सादगी अनुकरणीय है ।

दिनांक 16.02.2021

■वसंत पंचमी या श्रीपंचमी हिंदुओं का एक त्यौहार है । इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है । यह पूजनोत्सव माघ शुक्ल पंचमी को भारत के साथ साथ नेपाल और जहां भी हिंदू हैं उन राष्ट्रों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है । शास्त्रों में वसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है ।
■देवी सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी सहित अनेक नामों से जाना जाता है । देवी सरस्वती ज्ञान की प्रदातृ हैं और यही कारण है कि सरस्वती पूजा के दिन से हिंदुओं में बच्चों को पढ़ना सिखाये जाने की परम्परा है । संगीत की उत्पत्ति का उद्गम होने के कारण ये संगीत की देवी हैं । वसंत पंचमी के दिन को इनके प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाते हैं । ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है : -
■ये परम चेतना हैं । सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं । हममें जो आचार और मेधा है, उसका आधार सरस्वती हैं । इनकी स्मृति और स्वरूप का वैभव अद्भुत है । शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत में व्याप्त, सभी भयों से अभयदान देनेवाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटानेवाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करनेवाली तथा पद्मासन पर विराजमान माॅं सरस्वती की मैं वंदना करता हूं ।

दिनांक 31.01.2021

■ आज बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी की पुण्यतिथि है । मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी, जो श्रीबाबू के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे, न सिर्फ बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री हुए बल्कि वे युगद्रष्टा थे । आधुनिक बिहार उन्हीं की देन है । जो भी कल-कारखाने लगे उनमें से अधिकांश उन्हीं के कार्यकाल के हैं ।
■ श्रीबाबू स्वतंत्रता सेनानी तो थे ही संविधान निर्मातृ संविधान सभा के प्रमुख सदस्य भी थे । श्रीबाबू को भारत रत्न दिये जाने की मांग बिहार राज्य में तो की ही जाती रही बिहार विधान सभा में भी दिनांक 26.07.2019 को गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उन्हें भारत रत्न दिये जाने की सिफारिश केन्द्र सरकार से करने हेतु अनुरोध किया गया । श्रीबाबू की प्रसिद्धि यहां तक थी कि भले ही उनका जन्म माउर गांव में हुआ था लेकिन लोग माउर से ज्यादा श्रीबाबू के गांव के नाम से माउर को जानते थे । श्री बाबू जैसा व्यक्तित्व बार-बार पैदा नहीं होता बल्कि कई सदियों में कोई होता है ।
■ मैं उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें बिहार की जनता और बिहार विधान सभा की तरफ से भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।

दिनांक 30.01.2021

■ महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ । यह दिन गांधीजी के अनुकरणीय जीवन को याद करने और अपनाने का संकल्प लेने का दिन है ।
महात्मा गांधी ने सात सामाजिक पाप कर्म बताएं हैं :
1. सिद्धांत के बिना राजनीति।
2. नैतिकता के बिना व्यापार ।
3. मानवता के बिना विज्ञान ।
4. विवेक के बिना सुख ।
5. चरित्र के बिना ज्ञान ।
6. त्याग के बिना पूजा ।
7. काम के बिना धन ।
इन वचनों को हमें आत्मसात करना होगा।
■ श्रीमद् भगवद गीता में कर्म से ही व्यक्ति का परिचय बताया गया है । स्व0 मोहन दास करमचंद गाँधीजी ने गीता के इस मूल वाक्य को याद रखा और अपने आचरण को उस उंचाई तक पहुंचाया जहां जाकर वे एक साधारण आदमी न रहकर महात्मा हो गये, एक व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा बन गये । आज वैश्विक सद्भावना का मामला जहाँ भी आता है वहां महात्मा गाँधी प्रासंगिक हो उठते हैं । महात्मा गाँधी ने ऐसा कोई उपदेश नहीं दिया जिसे उन्होंने स्वयं अपने पर लागू नहीं किया और यही कारण रहा कि लोग उनकी बातों को न सिर्फ सुनते रहे बल्कि उसे अपने आचरण में समाविष्ट करते रहे । उनकी बातों को सुनकर पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ और परिणाम है कि आज हमलोग स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं ।
■ गांधीजी की पूरी जीवन यात्रा प्रयोगों की अविरल धारा के समान है । गांधीजी ने सत्य और अहिंसा का जो अद्भुत प्रयोग अपने साथ किया उसके बारे में उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये दोनों उनके आविष्कार नहीं वरन् ये शाश्वत मूल्य तभी से विद्यमान हैं जब से प्रकृति अस्तित्व में आयी है । इन दो मूल्यों को अपना कर ही गांधीजी भौतिक संसार में रहकर भी संन्यासी बने रहे ।
■ गाँधीजी के प्रति श्रद्धा का यह चरम ही है कि पूरे देश ने उन्हें बापू कह कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की । कोई औपचारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद गांधीजी को राष्ट्रपिता का पद इस देश ने प्रदान किया ।
■ महात्मा गांधी का बिहार से गहरा लगाव था क्योंकि चंपारण सत्याग्रह से ही वे महात्मा बनने की ओर अग्रसर हुए ।
■ महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और उनके बताये रास्तों पर चलने का प्रयास करने हेतु बिहार समेत पूरे देश की जनता का आह्वान करता हूँ ।

दिनांक 26.01.2021

■ 26 जनवरी का दिन केवल एक तिथि नहीं है बल्कि हमारा अपना शासन लागू किये जाने का दिन है । इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू कर तीन स्तंभ प्रणाली विकसित की गई जिसमें कानून बनाने का काम संसद को दिया गया, कानून संविधान सम्मत हो इसकी देखरेख के लिये न्यायपालिका बनायी गयी तथा बनाये गये कानूनों के कार्यान्वयन के लिये कार्यपालिका बनायी गयी ।
■ लोकतंत्र नागरिकों को प्रगति हेतु विस्तृत उड़ान भरने का मार्ग प्रशस्त करता है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और यह संविधान जनता को यह ताकत देता है कि वह कानून सम्मत व्यवस्था के लिये जिसे चाहे अपना सेवक चुने ।
■ यह सुदृढ़ व्यवस्था भारत की खूबसूरती है और हम सब लोगों का सौभाग्य है कि हम एक ऐसी व्यवस्था में रह रहे हैं जहां जीने का अधिकार सुरक्षित है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है । इस देश में किसी व्यक्ति से किसी खास धर्म या संप्रदाय का होने के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता । संविधान उसे संरक्षित करता है। संविधान सबको समान रूप से आजीविका पाने और अपने आप को मताधिकार के माध्यम से सत्ता में भागीदार बनने का अधिकार देता है। आज ही के दिन देश में संविधान लागू किया गया था इसलिए यह दिन अविस्मरणीय होने के साथ-साथ आदरणीय भी है ।
■ मैं बिहार विधान सभा भवन में बिहार उड़ीसा विधायी परिषद की पहली बैठक के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लोकतंत्र की सबसे प्राचीन धरती बिहार को नमन कर बिहार सहित देश के सभी लोगों को 72वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

दिनांक 24.01.2021

■ सहज जीवन शैली के धनी, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और बिहार के एक बार उपमुख्यमंत्री तथा दो बार मुख्यमंत्री रहने वाले कर्पूरी ठाकुरजी का आज जन्म दिवस है। मैं उनके जन्मदिवस पर उनकी सादगी और उनके द्वारा उपस्थित किए गए आदर्शों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता हूं।
■ कर्पूरी ठाकुर जी की पहचान उनका मुड़ा तुड़ा कुर्ता, घिसी चप्पल और बिखरे बाल थे । उनकी सादगी प्रेरित करने वाली थी ।
■ कर्पूरी जी जीवन भर कांग्रेस के वंशवाद का विरोध करते रहे और यही कारण था कि उन्होंने अपने जीवन काल में अपने वंश के किसी व्यक्ति को राजनीतिक विरासत थामने के लिए आगे नहीं बढ़ाया। आज भी कर्पूरी जी को सब लोग उनकी सादगी के लिए याद करते हैं । कर्पूरी जी प्रथम विधान सभा यानी 1952 से ही विधायक,उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अपने लिए एक अच्छा सा घर भी न बना सके । वे अपनी विरासत के तौर पर घरवालों के लिए वही टूटी झोंपड़ी छोड़कर गए ।
■ कर्पूरी जी जितना सादगी भरा जीवन जीते रहे उतने ही प्रखर वक्ता रहे ।
■ जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुरजी के जन्मदिवस पर उन्हें स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

दिनांक 23.01.2021

■ महान स्वतंत्रता सेनानी और देश को गुलामी से आजाद कराने को बेताब महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन करता हूं।
■ नेताजी में जो जोश था, देश को आजाद कराने की जो तड़प थी उसकी कल्पना हम लोग आज शायद ही कर पाएं ।
■ जिन लोगों ने आजाद भारत में जन्म लिया है वह गुलामी की पीड़ा का एहसास भी नहीं कर सकते । गुलामों की जिंदगी जिंदगी नहीं एक सजा होती है।ऐसे ही महान क्रांतिकारियों की प्राणाहुति ने हमें यह अवसर दिया है कि आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं और हमलोग जो भी हैं ऐसे ही महापुरुषों की वजह से हैं।
■ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें फिर एक बार नमन करता हूं।

दिनांक 20.01.2021

■ आज सिखों के दसवें गुरु, खालसा सेना के संस्थापक एवं प्रथम सेनापति तथा सिख धर्म के लिये अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुरु गोविंद सिंहजी की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं ।
■ यह बिहार की पावन धरती है जहां श्री गोविंद राय जन्म लेते हैं और अपने कामों से गुरु गोविंद सिंहजी बन जाते हैं । गुरु गोविंद सिंहजी केवल एक धर्मगुरु ही नहीं थे बल्कि वे वीर योद्धा और विद्वान भी थे ।
■ गुरु गोविंद सिंहजी ने सिखों के पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा कर उन्हें गुरु के रूप में स्थापित किया । आज गुरु ग्रंथ साहिब ही सबके गुरु हैं ।
■ गुरू गोविंद सिंह पूरी मानवजाति को एक ही पिता की संतान मानते थे और इसीलिये उन्होंने कविता भी लिखी कि -
न कोई बैरी नाहि बेगाना
एक पिता एकस के हम बारिक ।
मानस की जात सबै एकै पहचानबो
एक ही सरूप सबै एकै जोत जानबो ।
■ गुरु गोविंद सिंह जी स्वयं तो अनेक भाषाओं के विद्वान थे ही अन्य विद्वानों का वे भरपूर सम्मान भी करते थे । यही कारण है कि उनके दरबार में अनेक कवियों और लेखकों की उपस्थिति रहती थी ।
■ मैं गुरू गोविंद सिंहजी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए अपने सभी सिख भाईयों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 14.01.2021

■ हिंदुओं के सभी त्यौहार धर्म से जुडे़ हैं । ऐसा ही एक त्यौहार मकर संक्रांति भी है । मकर संक्रांति पर्व सूर्यदेव से जुड़ा हुआ है । इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसी के साथ हिंदुओं में सभी शुभकर्मों की शुरुआत होती है । धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन देवलोक में दिन का आरंभ होता है] इसलिए इसको देवायन भी कहा जाता है । इस दिन देवलोक के दरवाजे खुल जाते हैं । मकर संक्रांति का त्यौहार देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है, कहीं खिचड़ी, कहीं पोंगल, कहीं संक्रांति और कहीं उत्तरायणी आदि ।
■ उत्तरायण सूर्य का महत्व प्राचीन काल से है और यदि हम महाभारत के काल में जायं तो देखते हैं कि इच्छामृत्यु के वरदान के बावजूद पितामह भीष्म तब तक बाणों की कष्टदायी शय्या पर लेटे रहे जब तक भगवान सूर्य उत्तरायण नहीं हुए । उन्होंने अपने प्राण सूर्यदेव के उत्तरायण होने के बाद ही त्यागे ।
■ मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से उत्तरायण सूर्य को नमन करते हुए बिहार सहित संपूर्ण देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 12.01.2021

■ स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मैं आज उन्हें सादर नमन करता हूँ। स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व जितना ही पारदर्शी रहा है उतना ही विराट रहा है । उनके व्यक्तित्व के बारे में कुछ लिखना सूरज को दीपक दिखाने के समान है लेकिन उनकी जयंती के शुभ अवसर पर मेरे मन की श्रद्धा दो-चार पंक्तियाँ लिखने के लिये मुझे विवश कर रही है।
■ कितना अच्छा और सार्थक नाम दिया नरेंद्र को गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस ने । उन्हें नर के इंद्र अर्थात राजा से सीधे विवेक के आनंद में डूबे रहने का आशीर्वाद दिया क्योंकि गुरुदेव जानते थे इंद्र या राजा के पद में मद है जबकि विवेक यानी ज्ञान का पद परम पद है । इसी परम पद को स्वामी विवेकानंद ने न सिर्फ प्राप्त किया बल्कि पूरी दुनिया को अपने जीवन काल तक उस ज्ञान का दान अनवरत रूप से करते रहे ।
■ सनातन धर्म के लोच को स्वामीजी ने अपने आचरण में अपनाया । यही कारण है कि शिकागो की धर्मसभा में विश्वबंधुत्व का संदेश देते हुए उन्होंने उस सभा को मेरे अमेरिकी भाई-बहनो कहकर संबोधित किया। विश्वबंधुत्व की यह अद्भुत अवधारणा सनातन धर्म में है ।
■ स्वामीजी ने सनातन धर्म की इस विशेषता को आत्मसात किया कि यह किसी पर थोपा नहीं जाता बल्कि इसकी मूल अवधारणा है अपने आपको जानो ।
■ स्वामीजी का जीवनकाल मात्र 39 वर्ष का रहा लेकिन उन्होंने इसी अल्पावधि में ऐसा काम किया जो सौ वर्ष जीने वाले भी लोग नहीं कर पाते हैं । उन्होंने समाज को यह दिखाया कि महत्व आयु नहीं रखती बल्कि व्यक्ति के द्वारा किये गये काम महत्व रखते हैं ।
■ स्वामी विवेकानंद की विशेषताओं में एक यह भी रही कि उनमें नकारात्मकता बिल्कुल नहीं रही । वे सदैव सकारात्मक सोचते रहे और अपनी सोच को आम जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने परिव्राजक के रूप में भारत सहित पूरी दुनिया में भ्रमण किया । सनातन धर्म की आध्यात्मिक शक्ति से दुनिया को परिचित कराने के लिये ही वे संन्यासी होकर भ्रमण करते रहे । स्वामीजी का नियंत्रण अपनी हर साँस पर था तभी उन्होंने अपनी मृत्यु को स्वयं अंगीकार किया और ध्यानावस्था में ही उन्होंने महासमाधि ली । यह भारत की विशेषता है कि जहाँ बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं को लोग झुठला देते हैं वहाँ एक संन्यासी को आज भी अपने मन में बसाये हुये हैं । यही स्वामीजी के प्रति देश की सच्ची श्रद्धा है ।
■ स्वामीजी ने 19वीं शताब्दी में 21वीं शताब्दी के भविष्य की जो भविष्यवाणी की थी अब वह सफलीभूत हो रही है ।
■ स्वामीजी के सम्मान में 12 जनवरी को युवा दिवस मनाया जाता है । युवा दो अक्षरों से बना है - यु और वा । हम दोनों को देखें तो यु से युग और वा से वाहक बनता है । युवा ही युग के वाहक हैं और 21वीं सदी की नींव, रीढ़ और मस्तिष्क हैं । युवा अपने कौशल और हुनर से आगे बढ़ेगा । यही युवा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेगा और भारत विश्वगुरु बनेगा ।
■ स्वामी विवेकानंद हम लोगों के आदर्श हैं, मार्गदर्शक हैं और सदैव हमारे प्रेरणास्रोत बने रहेंगे । उनकी जयंती के अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से सादर नमन करते हुए उनके प्रति विनम्र श्रद्धा व्यक्त करता हूँ ।

दिनांक 01.01.2021

■ नव वर्ष 2021 का आगमन हो चुका है । हर नया वर्ष एक नयी आशा-विश्वास लिये आता है कि हमारे जीवन में कुछ सकारात्मक होगा और यही भाव हमें नये वर्ष का स्वागत करने के लिये प्रोत्साहित करता है । बीता वर्ष 2020 पूरे विश्व के लिये एक संकट लेकर आया और लगा कि मानवजाति का ही नाश हो जायेगा परंतु मानव संघर्षशील है । मानव जीवन एक धारा है जो हजारों लाखों वर्षों से निरंतर चली आ रही है । इसी संघर्ष की क्षमता के आधार पर चिकित्सा विज्ञानियों ने इस संकट से निपटने के लिये कमर कसी और वे कोरोना की वैक्सीन बनाकर उसका परीक्षण कर रहे हैं ।
■ मैं इस नव वर्ष पर माननीय प्रधानमंत्रीजी द्वारा कोविड-19 से निपटने के सटीक समय और रणनीति के लिये उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि यदि माननीय प्रधानमंत्रीजी तथा माननीय मुख्यमंत्रीजी ने आवश्यक तैयारियों के लिये सम्पूर्ण लाॅक डाउन न किया होता तो आज बिहार सहित भारतवर्ष में शायद ही कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण से बच पाता ।
■ मैं न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञानियों को इस नव वर्ष के अवसर पर विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूं कि मानव जीवन के संरक्षण के लिये जिस उत्साह और तत्परता से उन्होंने काम किया वह मानव जाति पर उपकार है ।
■ मैं राज्य एवं देश के सभी कोरोना योद्धाओं को भी धन्यवाद देता हूं तथा उनके समर्पण को नमन करता हूं ।
■ मैं बिहार विधान सभा की तरफ से बिहार सहित पूरे देश की जनता को नव वर्ष 2021 की शुभकामनाएं देता हूं ।