माननीय अध्यक्ष महोदय का संदेश......


Shri Vijay Kumar Sinha,
Hon'ble Speaker,
Bihar Vidhan Sabha

दिनांक 21.11.2021

■ विश्व बाल दिवस पर मैं सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। विश्व बाल दिवस प्रत्येक वर्ष 20 नवम्बर को मनाया जाता है । किसी भी देश के भविष्य का निर्माण बालकों से ही संभव है इसलिए बालकों के सर्वांगीण विकास हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व बाल दिवस का आयोजन किया जाता है । बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना एवं उनका आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास ही इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है ।
■ विश्व बाल दिवस, 2021 की थीम है ‘‘प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर भविष्य।’’ वर्तमान वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान बच्चों के ऊपर मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो गयी हैं । ऐसा लगता है जैसे बच्चों से उनका बचपन छिन गया है लेकिन हालात में सुधार के पश्चात् बच्चों की किलकारियाँ फिर से जागृत हो गयी हैं ।
■ बाल दिवस पूरे विश्व में अलग-अलग दिन मनाया जाता है लेकिन इसे मनाने का उद्देश्य एक ही है बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना एवं उन्हें मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना । जिस देश में बच्चे स्वस्थ, शिक्षित और चरित्रवान होंगे, जिस देश में बच्चों का शोषण नहीं किया जाता है वह देश प्रगति की राह पर उतना ही अग्रसर होगा । आइये बच्चों को विकास का अवसर देकर हम देश की प्रगति में अपनी भागीदारी करें ।

******

■ विश्व टेलीविजन दिवस प्रत्येक वर्ष 21 नवंबर को मनाया जाता है । सर्वप्रथम 21 नवंबर, 1996 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के तत्वाधान में विश्व टेलीविजन दिवस मनाया गया । वर्तमान युग विज्ञान के चमत्कारों का युग है जिसमें टेलीविजन भी विज्ञान का एक चमत्कार है । विज्ञान प्रकृति के रहस्यों को उजागर करते हुए मनुष्य के जीवन को सहज बनाता है । टेलीविजन जन संचार का ऐसा माध्यम है जिससे मनोरंजन, शिक्षा, राजनीति, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों के बारे में सूचनाएं प्राप्त होती हैं ।
■ शिक्षा के क्षेत्र में भी टेलीविजन की महत्वपूर्ण भूमिका है । विश्व टेलीविजन दिवस पर संचार और वैश्वीकरण में टेलीविजन की भूमिका के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय और वैश्विक स्तर पर गोष्ठी आयोजित की जाती है ।
■ टेलीविजन प्रसारण का उद्देश्य राष्ट्रीय समन्वय को प्रोत्साहित करना है । भारतवर्ष एक विशाल देश है । यहां विभिन्न प्रकार के धर्म, संस्कृति एवं भाषाएं हैं। टेलीविजन देश में सांस्कृतिक एकता स्थापित करने एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है ।

दिनांक 19.11.2021

■ गुरू नानक देव जी की जयंती कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनायी जाती है । गुरू नानक देव जी ने अपने जीवन में कई परोपकारी कार्य किये जिससे पूरी दुनिया में सद्भावना, शांति, सच्चाई एवं आपसी भाईचारे तथा लोगों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हुई । गुरू नानक देव जी ने सिख समुदाय की नींव रखी ।
■ गुरू नानक देव जी ने अपने सिद्धान्तों एवं उद्देश्यों के द्वारा कमजोर लोगों की सर्वथा मदद की । गुरू नानक देव जी ने अपने विचारों से लोगों को अंधविश्वास एवं रूढ़िवादिता के प्रति जागरूक किया ।
■ गुरू नानक देव जी ने अपने सिद्धान्तों में कहा कि ईश्वर एक है, ईश्वर के दर्शन सभी जगह कर सकते हैं ।
■ गुरू नानक देव जी ने समाज सुधार हेतु अपना पूरा जीवन लगा दिया एवं समाज में व्याप्त बुराइयों, गरीबी तथा भुखमरी मिटाने हेतु कार्य किए । गुरू नानक देव जी ने देश में ही नहीं बल्कि विदेश में जाकर भी लोगों को प्रेम का संदेश दिया ।

******

■ विश्व शौचालय दिवस प्रत्येक वर्ष 19 नवम्बर को मनाया जाता है । यह दिवस विश्व शौचालय संगठन द्वारा सर्वप्रथम 19 नवम्बर, 2001 को मनाया गया था । खुले में शौच की प्रवृत्ति को रोकने तथा इसमें परिर्वतन लाने और साफ-सफाई के प्रति जागरुकता फैलाने हेतु विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र के सर्वे के मुताबिक विश्व की एक अरब आबादी खुले में शौच हेतु विवश है जिनमें से आधे से अधिक व्यक्ति भारत में हैं जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न होती हैं तथा पर्यावरण प्रदूषित होने की संभावना बनी रहती है ।
■ खुले में शौच से मुक्ति एवं साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया जिसके सकारात्मक परिणाम उभरकर सामने आए हैं । इस अभियान के द्वारा अनेक गांवों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है । विश्व शौचालय दिवस पर मैं आह्वान करता हूं कि आइये हम विश्व को स्वच्छ बनाने में भागीदार बनें ।

दिनांक 16.11.2021

■ अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस प्रत्येक वर्ष 16 नवम्बर को मनाया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस संस्कृतियों एवं लोगों के बीच सहिष्णुता का निर्माण करने हेतु मनाया जाता है । वर्ष 1995 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस को मान्यता प्रदान की गई थी । यूनेस्को का कथन है कि असहिष्णुता को दूर करने के लिए पांच प्रमुख तत्व की आवश्यकता है । कानून, शिक्षा, सूचना तक पहुंच, व्यक्तिगत जागरूकता और स्थानीय समाधान । सहिष्णुता मानव अधिकारों की रक्षा और संरक्षण हेतु एक राजनीतिक, कानूनी एवं नैतिक कर्तव्य है ।
■ अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाने का मुख्य ध्येय शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संस्थानों एवं बड़े पैमाने पर व्यक्तियों को विश्वास दिलाना है कि सहिष्णुता समाज का एक अभिन्न अंग है । अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस की थीम है- ‘‘सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधता, अभिव्यक्ति के हमारे रूपों और मानव होने के तरीकों का सम्मान, स्वीकृति और प्रशंसा’’।
■ वर्तमान समय में समाज में बढ़ती हिंसा ने सहिष्णुता के महत्व को बढ़ा दिया है । सहिष्णुता दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए सम्मान है । सहनशीलता नैतिक कर्तव्य ही नहीं वर्तमान युग की आवश्यकता है ।
■ अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस पर मैं आह्वान करता हूं कि आइये हम सब एक सहिष्णु और दूसरों के दुख दर्द के प्रति संवेदनशील समाज का निर्माण करें ।

दिनांक 15.11.2021

■ आज स्व० बिरसा मुंडा की जयंती है । बिरसा मुंडा आदिवासियों में पहले स्वतंत्रता सेनानी थे । वे धार्मिक नेता भी थे जिसके कारण बिरसा मुंडा आदिवासी समाज में भगवान कहे जाते हैं । मुंडा समाज उन्हें मानव से परे भगवान का दर्जा देता है । उन्हें सम्मान देने के लिए संसद के म्यूजियम में उनका तैल चित्र लगा हुआ है । आदिवासी समाज के वे पहले व्यक्ति हैं जिन्हें यह सम्मान दिया गया है । बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताओं को पुनर्जीवित किया । चर्च द्वारा जो धर्म परिवर्तन का प्रयास किया जाता है उसके वे कट्टर आलोचक रहे और उन्होंने उसका मुखर विरोध किया । बिरसा मुंडा जी ने आदिवासी समाज के लोगों को प्रेरित किया कि वे अपने मूल पारम्परिक मान्यताओं से जुड़े रहें । बिरसा मुंडा जी की जयंती पर मैं उन्हें नमन करता हूँ ।

दिनांक 10.11.2021

■ छठ बिहार की लोक आस्था का महापर्व है । छठ महापर्व हिन्दू धर्म के पवित्र कार्तिक माह के षष्ठी को मनाया जाता है । सूर्य उपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं नेपाल की तराई क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न भागों में बिहारियों द्वारा छठ पर्व बड़े उत्साहपूर्वक मनाया जाता है । यह पर्व प्रकृति पूजा का भी पर्व है । छठ पर्व बिहार की वैदिक आर्य संस्कृति की एक छोटी सी झलक दिखाता है।
■ मान्यता के अनुसार प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता पराजित हो गये थे तब देवमाता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए सूर्य मंदिर में छठी मैया की आराधना की । तत्पश्चात छठी मैया ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि तुम्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी । इसके बाद अदिति के पुत्र त्रिदेव रूप आदित्य भगवान ने असुरों पर देवताओं की विजय दिलायी ।
■ एक अन्य कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये तब भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिये गये निर्देश पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा जिसके बाद उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं तथा पांडवों को उनका राजपाट वापस मिला ।
■ भारत में सूर्य उपासना वैदिक काल से चली आ रही है । सूर्य की उपासना की चर्चा विष्णु पुराण, भागवत पुराण आदि में विस्तारपूर्वक की गयी है ।
■ छठ महापर्व का व्रत किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है । छठ पर्व पति एवं संतान की दीर्घायु के लिए किया जाता है । मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से छठ व्रत करने से मनुष्य की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं एवं छठ व्रत रखने वाली महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है। महिलाओं के साथ-साथ वर्तमान समय में पुरुष भी अपनी सफलता एवं मनचाहे फल की प्राप्ति हेतु छठ व्रत को पूरी निष्ठा एवं श्रद्धा से करते हैं । छठ पर्व का प्रसार विदेशों में भी हुआ है । प्रवासी भारतीय भी अनेक देशों जैसे अमेरिका, माॅरिशस इत्यादि में छठ महापर्व बड़े उत्साहपूर्वक मनाते हैं । छठ महापर्व यह भी संदेश देता है कि हमें प्रकृति की धरोहर को सहेजकर रखने की जरूरत है ।
■ मैं सूर्योपासना के महापावन पर्व पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 06.11.2021

■ भ्रातृ द्वितीया (भाई दूज)
■ भ्रातृ द्वितीया (भाई दूज) कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है । यम द्वितीया भाई के प्रति बहन के स्नेह को दर्शाता है एवं बहनें अपने भाई की कुशलता एवं खुशहाली की कामना करती हैं ।
■ पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्व काल में यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कारपूर्वक भोजन कराया था । उस दिन नरक में रह रहे जीवों को यातना से छुटकारा मिला था । वे पाप मुक्त होकर सब बंधनों से मुक्त हो गये थे । उन सब ने मिलकर एक महान उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुँचाने वाला था, इसलिए यह तिथि यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई ।
■ मान्यता है कि भ्रातृ द्वितीया के दिन जो मनुष्य अपनी बहन के हाथ का भोजन करता है उसे सदैव उत्तम भोजन समेत धन की प्राप्ति होती है ।

दिनांक 04.11.2021

■ दीपावली के शुभ अवसर पर मैं देशवासियों को शुभकामनायें देता हूँ और माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करता हूँ कि वे सभी देशवासियों को स्वस्थ एवं धन-धान्य से पूर्ण रखें ।
■ दीपावली देश के प्रमुख त्योहारों में से एक है । मूलतः यह हिन्दुओं का त्योहार है लेकिन जैन और सिख भी मनाते हैं । बौद्ध धर्म के कुछ लोग भी इस प्रकाशोत्सव को मनाते हैं । दीपावली का अर्थ अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय और अज्ञानता पर ज्ञान की विजय है । ये तीन विजय जब किसी व्यक्ति से जुड़ते हैं तो उस व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यक्तित्व न सिर्फ समाज के लिए सर्वाधिक उपयोगी हो जाता है बल्कि राष्ट्र के लिए भी वह व्यक्ति एक धरोहर हो जाता है ।
■ दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और गणेश जी की भी पूजा की जाती है । माँ लक्ष्मी जहाँ धन की देवी हैं वहीं गणेश जी विध्नहर्ता हैं । मनुष्य के जीवन में यदि विध्न न हो और उसके पास धन हो तो उसका जीवन सुखमय हो जाता है । विध्न होने से मानव तनाव में रहता है और तनाव ही सारी बुराइयों की जड़ है ।
■ दीपावली की तैयारी लोग 15-20 दिन पहले से ही शुरू कर देते हैं जिसमें घर की साफ-सफाई सम्मिलित है । मान्यता है कि साफ-सुथरे घरों में ही माँ लक्ष्मी का पदार्पण होता है । स्वच्छता देवत्व के निकट ले जाती है । इसलिए हम सब लोग स्वच्छ वातावरण में देवी की पूजा कर उनका आवाहन करते हैं ।
■ दीपावली के शुभ अवसर पर मैं सभी देशवासियों के लिए कामना करता हूँ कि उनके अंतर्मन में जो अंधकार है वह दूर हो, उनका जीवन प्रकाशमय हो ।

दिनांक 02.11.2021

■ धनतेरस का त्यौहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है । मान्यता के अनुसार धनतेरस के दिन समुद्र-मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे । इसलिए इस तिथि को धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है ।
■ जैन आगम में धनतेरस को ‘‘धन्य तेरस या ध्यान तेरस’’ भी कहा जाता है । मान्यता है कि भगवान महावीर इस दिन ध्यान द्वारा योग निरोध के लिए चले गये थे । उन्हें तीन दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुए दीपावली के दिन निर्वाण यानी ज्ञान की प्राप्ति हुई तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।
■ स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना हेतु धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है । मान्यता है कि इस दिन धन्वंतरि का जन्म हुआ था । धन्वंतरि जयंती को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाता है । उन्हें ही आयुर्वेद का जनक माना जाता है ।
■ धन्वंतरि के अलावा इस दिन शाम में माँ लक्ष्मी भगवान गणेश और देवता कुबेर की पूजा की जाती है । कहा जाता है धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त जहाँ दीपदान किया जाता है वहाँ अकाल मृत्यु का दोष समाप्त हो जाता है । मान्यता है कि माता लक्ष्मी जी भय एवं शोक से मुक्ति दिलाती हैं तथा धन-धान्य और अन्य सुख-सुविधाओं से युक्त करके मनुष्य को लंबी उम्र देती हैं ।

दिनांक 31.10.2021

■ सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर मैं उन्हें नमन करता हूं ।
■ सरदार वल्लभ भाई पटेल महान् स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा आजाद भारत के प्रथम गृहमंत्री थे । स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार वल्लभ भाई पटेल का पहला योगदान खेड़ा सत्याग्रह था । तत्कालीन समय में गुजरात का यह खेड़ा डिवीजन भयंकर सूखे की चपेट में था । किसानों ने अंग्रेजी हुकूमत से कर में छूट की मांग की परंतु कर में छूट देने को ब्रिटिश हुकूमत राजी नहीं हुई । तत्पश्चात् सरदार वल्लभ भाई पटेल एवं गांधी जी के नेतृत्व में किसानों द्वारा कर न देने का प्रस्ताव पारित किया गया जिसके फलस्वरूप सरकार को झुकना पड़ा ।
■ वर्ष 1928 में गुजरात में प्रमुख किसान आंदोलन का नेतृत्व भी सरदार पटेल जी ने किया । ब्रिटिश हुकूमत ने किसानों के लगान में 30 प्रतिशत की वृद्धि कर दी जिसका विरोध सरदार पटेल जी ने किया जिसे बारदोली सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है । सरकार ने इस सत्याग्रह को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाए पर अंततः विवश होकर किसानों की मांगों को मानना पड़ा एवं लगान की दर को घटाना पड़ा । इस सत्याग्रह की सफलता ने इन्हें लोगों द्वारा सरदार की उपाधि दिलवा दी ।
■ आज के भारत के एकीकृत स्वरूप को मूर्त रूप देने में सरदार पटेल का योगदान अतुलनीय है जिसने इन्हें भारत के लौह पुरूष का खिताब दिलवा दिया । स्वतंत्रता के बाद 562 छोटी बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलय करा पाना सरदार साहब के वश की ही बात थी । यही कारण है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय भारत सरकार ने सन् 2014 में लिया । यह सरदार साहब को भारत सरकार की श्रद्धांजलि है ।

दिनांक 23.10.2021

■ प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस मनाया जाता है । द्वितीय विश्व युद्ध के कुपरिणामों को देखते हुए यह तय था कि यदि तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो मानव सभ्यता को विनाश के कगार पर जाने से कोई नहीं रोक सकता है । इन परिस्थितियों से बचने के लिए एक विश्वसनीय अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता महसूस की गयी । इस तरह अन्तर्राष्ट्रीय कानून, अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास में सहयोग को सरल करने के उद्देश्य से 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गयी ।
■ संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना का उद्देश्य है अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाए रखना एवं राष्ट्रों के बीच उनके समान अधिकार एवं आत्मनिर्णय के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास करना।
■ विश्व में अमन एवं शांति कायम करने हेतु संयुक्त राष्ट्र ने शांति सेना का गठन किया है जिसमें भारत ने भी समय-समय पर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है एवं अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं जैसे गरीबी, भुखमरी एवं निरक्षरता से जूझते देशों की मदद करने का भरपूर प्रयास करता है जो सराहनीय कदम है ।
■ संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर मैं कामना करता हूं और आह्वान करता हूं कि आइये, हम सब प्रयास करें कि विश्व में शांतिमय एवं सकारात्मक माहौल स्थापित हो ।

दिनांक 21.10.2021

■ आज बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी की जयंती है । मैं उन्हें सादर प्रणाम करता हूं ।
■ डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी, जो श्रीबाबू के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे, न सिर्फ बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री हुए बल्कि वे युगद्रष्टा थे । आधुनिक बिहार उन्हीं की देन है । जो भी कल-कारखाने लगे उनमें से अधिकांश उन्हीं के कार्यकाल के हैं ।
■ श्रीबाबू स्वतंत्रता सेनानी तो थे ही संविधान निर्मातृ संविधान सभा के प्रमुख सदस्य भी थे । श्रीबाबू को भारत रत्न दिये जाने की मांग बिहार राज्य में तो की ही जाती रही बिहार विधान सभा में भी दिनांक 26.07.2019 को गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उन्हें भारत रत्न दिये जाने की सिफारिश केन्द्र सरकार से करने हेतु अनुरोध किया गया । श्रीबाबू की प्रसिद्धि यहां तक थी कि भले ही उनका जन्म माउर गांव में हुआ था लेकिन लोग माउर से ज्यादा श्रीबाबू के गांव के नाम से माउर को जानते थे । श्री बाबू जैसा व्यक्तित्व बार-बार पैदा नहीं होता बल्कि कई सदियों में कोई होता है ।
■ मैं उनकी जयंती पर उन्हें बिहार की जनता और बिहार विधान सभा की तरफ से नमन करता हूं ।

दिनांक 15.10.2021

■ विजया दशमी अर्थात बुराई पर अच्छाई की जीत का विजय पर्व है। आसुरी शक्ति और असभ्यता पर विजय का दिन है। हमारे इतिहास में इसे रावणरूपी बुराई पर राम रूपी सत्य की विजय के पर्व के रूप में मान्यता है। भारत का जन-जन आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को विजय पर्व मनाता है । यह शायद इसलिए कि हर युद्ध सत्ता के लिए युद्ध है परंतु राम रावण का युद्ध बुराई और अच्छाई के बीच का युद्ध है । यह युद्ध कोई प्रतिशोध नहीं है बल्कि बुराई को दंडित करने का भाव है। इस युद्ध में रावण को हरा कर राज्य शासन हासिल करने की कामना नहीं है। भगवान राम की विजय सत्य और नैतिकता के लिए एक अनुकरणीय है । त्रिलोक विजयी और अत्याचारी शासक को साधारण जीवों द्वारा हरा दिए जाने का उदाहरण है । विजयादशमी को मां भगवती दुर्गा की पूजा के रूप में भी देखा जाता है । विजयादशमी हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है । रावण दहन कर हम सत्य के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। विजयादशमी का एक अर्थ यह भी है कि हम अपने अंदर जो 10 काम क्रोध आदि तत्व हैं उन पर भी विजय पाएं ।

दिनांक 11.10.2021

■ लोकनायक जयप्रकाश नारायण एक महान चिंतक एवं दूरदर्शी राजनीतिज्ञ थे । आधुनिक भारत के उन प्रमुख व्यक्तियों में वे एक थे जिन्होंने भारत की राजनीति को गहन रूप से प्रभावित किया है । जयप्रकाश नारायण ने भारत में न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था की स्थापना के लिए संघर्ष किया । उनके मौलिक विचार आज भी अपने देश की ज्वलंत सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रासंगिक हैं ।
■ स्व॰ जयप्रकाश नारायणजी का चिंतन गांव के विकास से जुड़ा हुआ था । अपने देश के सर्वांगीण विकास एवं नवनिर्माण के लक्ष्य के महत्व को ध्यान में रखकर उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवाद, सर्वोदय तथा गांधी दर्शन के विभिन्न आयामों का न केवल गहरा चिंतन किया बल्कि उनके प्रयोग के दौरान युक्तिसंगत संशोधन में भी जीवनपर्यन्त संलग्न रहें ।
■ स्व॰ जयप्रकाश नारायण सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक थे । उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवाद के पथ का अनुगमन किया । उनकी पुस्तक भारतीय राजव्यवस्था की पुनर्रचना में उन्होंने पंचायती राज योजना के माध्यम से विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया पर बल दिया है एवं ग्रामसभा का सशक्तिकरण होना उन्होंने आवश्यक बताया है ।
■ स्व॰ जयप्रकाश नारायणजी ने अपने विद्यार्थी जीवन में ही स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया एवं सविनय अवज्ञा तथा भारत छोड़ो आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है । सामाजिक कार्य में मिली लोकप्रियता के कारण उन्हें लोकनायक के नाम से भी जाना जाता है । जयप्रकाश नारायणजी के जीवन और चिंतन का एक ही लक्ष्य था आर्थिक-सामाजिक न्याय और नैतिकता पर आधारित व्यवस्था स्थापित करना तथा शोषण रहित समाज की स्थापना करना ।
■ लोकतंत्र पर राजतंत्र जब हावी होने लगा तो जयप्रकाश नारायण जी सम्पूर्ण क्रांति का नारा देकर उठ खड़े हुए और भारत की राजनीति की धारा को उन्होंने बदल दिया ।
■ स्व॰ जयप्रकाश नारायणजी की जयंती पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूँ ।

******

■ अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस
■ अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रत्येक वर्ष 11 अक्टूबर को मनाया जाता है । इस सृष्टि के दो कारकों में से एक कारक बालिका है । बालिका ही आगे चलकर सृष्टि की जननी होती है । बालिकाओं के साथ भेदभाव समाप्त करने हेतु जागरुकता बढ़ाने के लिए बालिका दिवस मनाया जाता है । बालिकाओं को जितना अवसर उन्नति के लिए मिलना चाहिए वह अवसर अपेक्षाकृत उन्हें कम हासिल होता है ।
■ भारतवर्ष में पहले बालिकायें सशक्त थीं, महिलायें सशक्त थीं लेकिन बाद के कालखंड में जैसे-जैसे गुलामी का दौर आता गया बालिकाओं पर बंदिशें बढ़ती गईं । वह सामाजिक परिस्थितिवश थी और यही बंदिशें धीरे-धीरे स्थायी रूप लेती गईं, हालांकि सरकारें पहल कर रही हैं । नौकरियों और नामांकन आदि में आरक्षण देकर तमाम जगहों पर बालिकाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है । समाज भी सतर्क हुआ है और बालिकाओं को हक से वंचित करने से बच रहा है ।
■ मैं आह्वान करता हूं कि आइये, हम सब बालिकाओं के साथ भेदभाव न हो, इसे सुनिश्चित करें ।

दिनांक 10.10.2021

■ प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है । सर्वप्रथम 1992 में यूनाइटेड नेशन्स के उप महासचिव रिचर्ड हंटर और वर्ल्ड फेडरेशन फाॅर मेंटल हेल्थ की पहल पर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया । हमारी जीवन शैली में बदलाव, अपने आप में उलझे रहना और सामाजिक जीवन से दूरी चिंता और तनाव का कारण बन जाते हैं । जो आगे चलकर यही डिप्रेशन के साथ ही इस तरह की अन्य मानसिक बीमारियों की वजह बन जाती है । पूरे विश्व में अधिकतर व्यक्ति सोशल स्टिग्मा डिमेंशिया, हिस्टिरिया, एग्जाइटी, आत्महीनता जैसी कई समस्याओं और बीमारियों से जूझ रहे हैं । इसी मानसिक दिक्कतों को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के मकसद से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है ।
■ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का मकसद मानसिक परेशानियों के प्रति जागरूक और समय रहते डाॅक्टरी सहायता ले सके यही है । साथ ही, मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों की कठिनाइयों को उनके दोस्त, रिश्तेदार व समाज भी समझ सके ।
■ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2021 की थीम ‘‘एक असमान दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य’’ है । वर्तमान समय में कोरोना के इस दौर में सोशल डिस्टेंसिंग आइसोलेशन के कारण ये समस्याएं और भी बढ़ गयी हैं । ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और भी प्रासंगिक हो गया है ।
■ मैं विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आह्वान करता हूं कि समाज में मानसिक बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति रखकर ऐसे वातावरण का निर्माण करें जहां उन्हें स्वस्थ होने में मदद मिले ।

दिनांक 09.10.2021

■ विश्व डाक दिवस प्रत्येक वर्ष 9 अक्टूबर को मनाया जाता है । स्विट्जरलैंड के बर्न शहर में 9 अक्टूबर, 1874 को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना हुई थी जिसकी याद में 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है । 1 जुलाई, 1876 में भारत यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बना था । भारत इसकी सदस्यता लेने वाला एशिया का प्रथम देश है । भारत में पहली बार 1766 में डाक व्यवस्था की शुरूआत की गयी थी । भारत में एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना 1 अक्टूबर, 1854 को हुई थी । भारतीय डाक विभाग में 9-14 अक्टूबर के बीच में विश्व डाक सप्ताह मनाया जाता है ।
■ विश्व डाक दिवस का मूल उद्देश्य लोगों के बीच पोस्टल सेवा के बारे में प्रचार-प्रसार करना और उसके महत्व को उजागर करना है । साथ ही लोगों के जीवन और राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में डाक सेवा के बारे में बताना है ।
■ यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना वैश्विक संचार क्रांति की शुरूआत थी । डाकघर ने दुनिया के एक जगह के लोगों को दूसरी जगह रहने वाले लोगों से संप्रेषण का माध्यम उपलब्ध कराया । वर्ष 1969 में जापान के टोक्यो में 9 अक्टूबर को विश्व डाकघर दिवस घोषित किया गया तब से दुनियाभर में डाक सेवाओं के योगदान को रेखांकित करने के लिए हर वर्ष विश्व डाक दिवस मनाया जाता है । विश्व डाक दिवस अन्तर्राष्ट्रीय पत्रों के पूरे विश्व में मुक्त प्रवाह हेतु मार्ग प्रशस्त करने का एक प्रयास है ।
■ भारत में भी डाक सेवाओं का इतिहास बहुत पुराना है । डाकघरों में बुनियादी डाक सेवाओं के अतिरिक्त बैंकिंग, वित्तीय व बीमा सेवाएं भी उपलब्ध हैं । जहां एक ओर डाक विभाग सार्वभौम सेवा दायित्व के तहत सब्सिडी आधारित विभिन्न डाक सेवाएं प्रदान करता है वहीं दूसरी ओर पहाड़ी एवं जनजातीय व दूरस्थ अंडमान व निकोबार द्वीप समूह जैसे क्षेत्रों में भी डाक सेवाएं उपलब्ध करवा रहा है । डाक सेवा देश को एक कड़ी में जोड़ने के प्रमुख साधनों में से एक है ।
■ विश्व डाक दिवस पर मैं सभी डाक सेवा से जुड़े कर्मियों/अधिकारियों को शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 08.10.2021

■ प्रत्येक वर्ष 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस मनाया जाता है । आज भारतीय वायुसेना का 89वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है । 8 अक्टूबर, 1932 को भारतीय वायुसेना की स्थापना की गई थी । भारतीय वायुसेना तीनों भारतीय सशस्त्र बलों में से एक हवाई शाखा है । वायुसेना का प्राथमिक मिशन संघर्ष के समय में भारतीय हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखना है और थल एवं जल सेना को बैकअप देना है ।
■ भारतीय वायुसेना को ब्रिटिश शासन के समय राॅयल इंडियन एयर फोर्स कहा जाता था हालांकि आजादी के पश्चात् (1950) इसका नामकरण भारतीय वायुसेना रखा गया । द्वितीय विश्वयुद्ध में भी भारतीय वायुसेना ने अपना कार्य सफलतापूर्वक किया एवं आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर के भारतीय संघ में विलय के समय भी अपनी जिम्मेवारियों को बखूबी निभाया है ।
■ भारतीय वायुसेना भारतीय सशस्त्र बलों की अन्य शाखाओं के साथ-साथ आपदा राहत कार्यक्रमों में प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण करने एवं बचाव अभियानों, आपदा क्षेत्रों में निकासी उपक्रम में सहायता प्रदान करती है । भारतीय वायुसेना ने वर्ष 1998 में गुजरात में आए चक्रवात और वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए राहत ऑपरेशन के रूप में व्यापक सहायता प्रदान की थी ।
■ सन् 1947 में देश आजाद होने के पश्चात् भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध और 1962 में चीन के खिलाफ युद्ध किया है । इसके अलावा भारतीय वायुसेना संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कार्यों में भी सहयोग कर चुकी है । इतना ही नहीं भारतीय वायुसेना बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में अहम भूमिका निभा चुकी है ।
■ भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है ‘‘नभः स्पृशं दीप्तम्’’ । यह गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है । यह महाभारत के युद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है ।
■ भारतीय वायुसेना दिवस राष्ट्रीय सुरक्षा के किसी भी संगठन में आधिकारिक रूप से भारतीय वायुसेना के प्रति लोगों को जागरुक करने और हवाई सीमा की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर करने के लिए मनाया जाता है ।
■ आईये हम सब वायुसेना दिवस पर वायुसेना के जवानों का सम्मान करें और उनके मनोबल को बढ़ायें ।

दिनांक 07.10.2021

■ बिहार विधान सभा भवन के सौ साल 2021 में पूरे हो गये हैं । इस दौरान 1921 से 2021 के बीच सदन ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिये हैं, जिसका साक्षी बिहार विधान सभा का यह भवन है । जन आकांक्षाओं के मूर्तिमान स्वरूप इस बिहार विधान सभा भवन का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है । इस भवन का डिजाईन प्रख्यात वास्तुविद् ए0एन0 मिलवुड ने तैयार किया था । इतालवी पुनर्जागरण शैली रेनेंसा आर्किटेक्चर में बनी यह इमारत कई मायनों में खूबसूरती को समेटे हुए है जो इसे विशिष्ट बनाता है । इसमें समानुपातिक गणितीय संतुलन के साथ ही सादगी और भव्यता का समन्वय है । लंबे-लंबे गोलाकार स्तम्भ और अर्धवृत्ताकार मेहराब इसकी विशेषता हैं जो प्राचीन रोमन शैली से प्रभावित है । इस आयताकार भवन में समरूपता का विशेष ख्याल रखा गया है । भवन के अगले हिस्से में जो प्लास्टर है, उसमें एक निश्चित अंतराल पर कट-मार्क हैं जो इसे बेहद खूबसूरत बनाते हैं और दूसरी संरचनाओं से इसे अलग भी करते हैं । विधान सभा का सभा कक्ष अर्धगोलाकार शक्ल में बना है । इसकी आंतरिक संरचना 60 फीट लंबी और 50 फीट चैड़ी है । इसका विस्तार इमारत की दोनों मंजिलों में है । 7 फरवरी, 1921 वह ऐतिहासिक दिन है जिस दिन इस भवन में काम प्रारम्भ हुआ। शताब्दी वर्ष की शुरूआत करने के लिए महामहिम राष्ट्रपति महोदय दिनांक-21 अक्टूबर, 2021 को पटना पधारेंगे और माननीय विधायकों, पूर्व विधायकों, माननीय सांसदों, पूर्व सांसदों सहित हम सब लोगों को संबोधित करेंगे । बिहार विधान सभा न सिर्फ लोकतंत्र का मंदिर है, बल्कि यह हमारी विरासत और धरोहर है । दिनांक-7 अक्टूबर से माता दुर्गा की आराधना के लिए कलश स्थापना हो रही है । इस दिन से शताब्दी वर्ष के बारे में समाचारों का प्रकाशन हो इससे अच्छी बात कुछ नहीं हो सकती है । शताब्दी वर्ष में मां दुर्गा हमें शक्ति प्रदान करें कि हम जिस आकांक्षा को लेकर सामाजिक सुधार से संबंधित मुक्त-युक्त सम्मान कार्यक्रम को चलाना चाहते हैं उसकी पूर्ति हो सके । ये बातें बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार विधान सभा की प्रेस सलाहकार समिति के साथ इस समारोह की तैयारियों के लिए आयोजित बैठक के दौरान कही । श्री सिन्हा ने कहा कि इस समारोह की सफलता हेतु उनकी अध्यक्षता में एक संचालन/प्रबंधन समिति का गठन किया गया है जिसके संयोजक विधान सभा के उपाध्यक्ष श्री महेश्वर हजारी होंगे । बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, श्रीमती रेणु देवी, संसदीय कार्य मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चैधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री श्री आलोक रंजन, नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधान सभा के सदस्य श्री जीतन राम मांझी, श्री अजीत शर्मा और श्री महबूब आलम इस समिति के सदस्य होंगे । इस कार्यक्रम के दौरान बिहार विधान सभा परिसर में महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद स्मृति स्वरूप शताब्दी स्तंभ का शिलान्यास करेंगे तथा बोधि वृक्ष का पौधा लगाया जायेगा । महामहिम के सम्मान में उनके सरकारी आवास पर रात्रि भोज तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा ।
■ इस बैठक के पूर्व इस कार्यक्रम की तैयारियों के लिए बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई जिसमें बिहार विधान परिषद् के कार्यकारी सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह, बिहार विधान सभा के उपाध्यक्ष श्री महेश्वर हजारी, बिहार के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, बिहार के मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारि शरण, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की सचिव श्रीमती वंदना प्रेयसी उपस्थित थीं ।

दिनांक 02.10.2021

■ आज महात्मा गांधी जी की जयंती पर मैं उन्हें नमन करता हूं । गांधी जयंती प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी के जन्मदिवस के उपलक्ष में मनाई जाती है । महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 में हुआ । उन्हें ‘‘राष्ट्रपिता’’ और ‘‘बापू’’ के नाम से भी पुकारा जाता है । गांधी जी सत्य, अहिंसा के अनुयायी थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया था ।
■ आज गांधी जी की 152वीं जयंती है । गांधी जयंती की महत्वपूर्ण खासियत है कि इस दिन को पूरी दुनिया में विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है । 15 जून, 2007 को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली ने अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में इसे मनाने का निर्णय लिया । गांधी जी ने पूरी दुनिया को सिखाया है कि शांति का मार्ग अपनाकर ही आजादी प्राप्त की जा सकती है । उनका मानना था कि हिंसा का रास्ता चुनकर हम कभी अपने अधिकार नहीं पा सकते हैं । अहिंसा की राह पर चलकर ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में करीब 75 हजार भारतीयों को उनके अधिकार दिलाये थे । गांधी जी की विचारधारा एवं लोगों के हक के लिए लड़ाई लड़ने के उनके तरीके ने उन्हें राष्ट्रपिता और महात्मा की उपाधि दिलायी ।
■ महात्मा गांधी ने लंदन में कानून की पढ़ाई की थी । लंदन से बैरिस्टर की डिग्री हासिल कर उन्होंने बड़ा अफसर या वकील बनना उचित नहीं समझा, बल्कि अपना पूरा जीवन देश के नाम समर्पित किया । अपने जीवन में उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ कई आंदोलन किए । वे हमेशा लोगों को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ते रहे । असहयोग आंदोलन, चंपारण सत्याग्रह, दांडी सत्याग्रह, भारत छोड़ो आंदोलन आदि उनके कुछ प्रमुख आंदोलन थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव कमजोर करने में बड़ी भूमिका निभायी थी ।
■ गांधी जी ने भारतीय समाज में व्याप्त छूआछूत जैसी बुराइयों के प्रति लगातार आवाज उठाई । वे चाहते थे कि ऐसे समाज का निर्माण हो जिसमें सभी लोगों को बराबरी का दर्जा मिले क्योंकि सभी को एक ईश्वर ने बनाया है । नारी सशक्तिकरण के लिए भी वे हमेशा प्रयासरत रहे ।
■ गांधी जी ने अपना जीवन सत्य या सच्चाई की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया । उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वयं की गलतियों और खुद पर प्रयोग करते हुए सीखने की कोशिश की । उन्होंने अपनी आत्मकथा को ‘‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’’ नाम दिया । गांधी जी ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ने के लिए हमें अपने अंदर बैठी दुष्टात्माओं, भय और असुरक्षा जैसे तत्वों पर विजय पाना है । गांधी जी ने अपने विचारों को सबसे पहले संक्षेप में व्यक्त किया कि ‘‘भगवान ही सत्य है’’ बाद में उन्होंने इस कथन को संशोधित कर अनुभव के आधार पर कहा कि ‘‘सत्य ही भगवान है।’’ इस प्रकार सत्य गांधी जी का ‘‘परमेश्वर’’ है । गांधी जी का पसंदीदा गीत निम्न है:
■ ‘‘रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम ।
■ सीता राम सीता राम, भज प्यारे तू सीताराम ।’’
■ गांधी जी ने न केवल अहिंसा की अद्वितीय विधि का बीड़ा उठाया बल्कि ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत को स्वतंत्रता दिलवाकर दुनिया को यह साबित कर दिया कि आजादी अहिंसा के पथ पर चलकर शांतिपूर्ण ढंग से प्राप्त की जा सकती है ।
■ गांधी जी के सपने तभी पूरे होंगे जब हम उनके बताये गये शांति, अहिंसा, सत्य, समानता एवं महिलाओं के प्रति सम्मान जैसे आदर्शों पर चलेंगे । गांधी जी की जयंती के अवसर पर आइये हम उनके विचारों एवं आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लें ।

******

■ देश के द्वितीय प्रधानमंत्री स्व0 लाल बहादुर शास्त्री जी अपनी अप्रतिम सादगी, नैतिकता और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं । शास्त्री जी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सार्वजनिक मूल्यों को राजनीति की दूसरी पीढ़ी तक अंतरित किया । स्वतंत्रता आंदोलन की आंच से तपकर निकले शास्त्री जी विपरीत स्थितियों में भी मूल्यों व नैतिकता से विचलित नहीं होते थे । प्रधानमंत्री के रूप में इन्होंने छोटी अवधि में ही अपने दूरदर्शी फैसले से साबित कर दिया कि वे एक कुशल नेतृत्वकर्ता थे ।
■ लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 02 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय में हुआ था । शास्त्री जी ने अपना राजनीतिक जीवन भारत सेवक संघ से शुरू किया और स्वतंत्रता संघर्ष के प्रायः सारे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों व आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी दी । उन्होंने 1921 के असहयोग आंदोलन, 1930 के दांडी मार्च तथा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में विशेष रूप से उल्लेखनीय भूमिका निभायी ।
■ स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् उन्हें उत्तर प्रदेश में संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था । बाद में गोविंद वल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में पुलिस एवं परिवहन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला । 9 जून, 1964 को शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने कहा कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता मंहगाई रोकना और सरकारी क्रियाकलापों को व्यावहारिक व जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है । बाद में उन्होंने जय जवान, जय किसान जैसा लोकप्रिय नारा दिया और अन्न उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभायी ।
■ शास्त्री जी की सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिए आज भी पूरा भारत उनको श्रद्धापूर्वक याद करता है । शास्त्री जी की जयंती पर मैं उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।

दिनांक 01.10.2021

■ अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः ।
■ चत्वारि तस्य वरध्यन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ।।
■ अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस प्रत्येक वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है । इस दिवस का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के साथ हो रहे भेदभाव और अपमानजनक व्यवहार को खत्म करना है । यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली ने 14 दिसंबर, 1990 में अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाने की घोषणा की ।
■ वर्तमान समय में सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश में वृद्धजनों को एकांतवास एवं उपेक्षा जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है । यह दिवस इन विषम परिस्थितियों से वृद्धजनों की रक्षा तथा उन्हें सम्मान एवं सुरक्षा प्रदान करने की याद दिलाता है, जो हमारी भारतीय संस्कृति का परिचायक है । सदियों से हमें सिखाया जाता रहा है कि अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहिए ।
■ वृद्धजन समाज की धरोहर हैं । नयी पीढ़ी उनके अनुभवों से शिक्षा प्राप्त कर एवं उनके पद्चिन्हों का अनुसरण कर सफलता के मुकाम तक पहुंचती है । मैं आह्वान करता हूं कि युवा पीढ़ी वृद्धजन को सम्मान देकर सम्मान पाने का अपना मार्ग प्रशस्त करे।

******

■ भारत के 14वें राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द जी का जन्म 1 अक्टूबर, 1945 को हुआ । इनकी प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर गांव के खानपुर परिषदीय प्रारंभिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय से हुई । इन्होंने दिल्ली में रहकर सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की। जून, 1975 में उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत से कैरियर की शुरुआत की । 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व0 मोरारजी देसाई जी के निजी सचिव बने ।
■ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत और केन्द्र सरकार के वकील रहते हुए काम किया । वर्ष 1980 से 1993 के दौरान केन्द्र सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल की तरफ से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में केसेज की पैरवी की ।
■ वे वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सांसद के रूप में चुने गये । अपनी कुशल कार्यक्षमता के कारण लगातार 2 बार राज्य सभा के सदस्य चुने गये। इन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व किया । उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दलित प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान बनाई । वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्यूरो के महामंत्री भी रहे हैं । वे आदिवासी, होम अफेयर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सामाजिक न्याय, कानून व्यवस्था और राज्य सभा हाउस कमेटी के चेयरमैन रहे ।
■ बिहार के राज्यपाल के रूप में आदरणीय रामनाथ कोविन्द जी का कार्यकाल सफल रहा । वे राज्य सरकार के शराबबंदी के अभूतपूर्व फैसले के साथ खड़े रहे । शराबबंदी को लेकर ऐतिहासिक मानव श्रृंखला की तारीफ की तथा शराबबंदी को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सरकार की इस पहल को कारगर करार दिया ।
■ मैं महामहिम राष्ट्रपति आदरणीय श्री रामनाथ कोविन्द जी के जन्मदिन पर उनके स्वस्थ दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं देता हूं ।

******

■ विश्व शाकाहार दिवस प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है । यह 1977 में उत्तरी अमेरिकी शाकाहारी समाज का स्थापना दिवस है और 1978 में अन्तर्राष्ट्रीय शाकाहारी संघ द्वारा शाकाहार से खुशी, करुणा और जीवन वृद्धि की संभावनाओं को देखते हुए इसे बढ़ावा देने के लिए इसका समर्थन किया गया था । यह दिवस शाकाहारी जीवनशैली से नैतिक, पर्यावरणीय, स्वास्थ्य और मानवीय लाभों के बारे में जागरूकता लाता है ।
■ विश्व शाकाहार दिवस 1 अक्टूबर, 1977 में पहली बार यू0के0 वेगन सोसाइटी ने मनाया था जिसकी 50वीं वर्षगांठ पर वेगन सोसाइटी के अध्यक्ष ने अक्टूबर की पहली तारीख को यादगार बनाने तथा लोगों में शाकाहारी आहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वेगन दिवस को हर वर्ष मनाने की घोषणा की ।
■ शाकाहारी भोजन हृदय रोग और कैंसर के खतरे को कम करता है । शाकाहारी खाना हल्का होता है । यह अन्य भोजनों की तुलना में जल्दी पचता है । शाकाहारी भोजन मस्तिष्क को सचेत रखते हुए उसे बुद्धिमान बनाता है । शाकाहारी भोजन से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा काफी कम होता है । शाकाहारी भोजन के सेवन से वजन कम करने में मदद मिलती है ।
■ हिन्दुओं में शाकाहार को पवित्रतम माना गया है जो इस धर्म की मूल अवधारणा ‘‘अहिंसा परमोधर्म:’’ से भी स्थापित होता है। शाकाहार दिवस पर मैं सभी का आह्वान करता हूं कि आइये, हम शाकाहार को बढ़ावा देकर समाज से हिंसक भाव को मुक्त करें ।

दिनांक 30.09.2021

■ प्रत्येक वर्ष 30 सितंबर को अन्तर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस मनाया जाता है । इसकी शुरूआत 1953 में की गयी थी । यह अनुवाद दिवस संत सेंट जेरोम के नाम पर है, जिन्हें अनुवादकों के संरक्षक संत के रूप में जाना जाता है । सेंट जेरोम को लैटिन भाषा में बाइबिल के अनुवाद के लिए जाना जाता है । आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मई, 2017 में प्रस्ताव पारित करके स्थापित किया था और 30 सितंबर को अन्तर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की । यह दिवस सेंट जेरोम की पुण्यतिथि के अवसर पर मनाया जाता है ।
■ अन्तर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस का उद्देश्य है भाषांतरकारों एवं अनुवाद के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को पहचान प्रदान करना एवं इन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिया जाना । विभिन्न देशों को निकट लाने, वार्तालाप में सहायता करने में अनुवाद की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है । इसका सीधा प्रभाव विश्व शांति तथा विकास पर पड़ता है । यह दिवस उन लोगों को सम्मान प्रदान करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीतिक संवाद में भाषा विशेषज्ञ के रूप में कार्य करके विकास तथा वैश्विक शांति को बढ़ावा दिया है तथा बड़े-बड़े ग्रंथों, विज्ञान पत्रिकाओं को एक भाषा से दूसरी भाषा में शुद्ध व सटीक अनुवादित किया है ।
■ अनुवाद दिवस के अवसर पर सभी अनुवादकों को मैं शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 29.09.2021

■ विश्व हृदय दिवस प्रत्येक वर्ष 29 सितंबर को मनाया जाता है । इसका उद्देश्य जनसाधारण में हृदय से संबंधित होने वाले रोगों, उनके परिणामों व उनकी रोकथाम के लिए जागरूक करना है । विश्व में हृदय रोग से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक है ।
■ विश्व हृदय दिवस का आयोजन विश्व हृदय संघ के निदेशक एंटोनियो बेयस डी लूना ने 1999 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर की थी । इसकी स्थापना लोगों को इसकी जानकारी देने के लिए की गयी थी कि किस प्रकार वह एक स्वस्थ हृदय का वातावरण बना सकते हैं और किस प्रकार एक स्वस्थ जीवनशैली अपना कर हृदय से संबंधित रोगों पर रोक लगा सकते हैं ।
■ विश्व के लोगों को हृदय रोग के प्रति जागरूक करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2000 में विश्व हृदय दिवस मनाया । गलत खान-पान, व्यायाम की कमी, धुम्रपान या मादक द्रव्यों के सेवन, अत्यधिक वजन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, प्रकृति से दूरी इत्यादि हृदय रोग के मूल कारणों में से है ।
■ विश्व हृदय दिवस लोगों में जागरूकता बढ़ाने और व्यक्तियों, परिवारों, समुदायों तथा सरकारों को इसे रोकने के लिए मुहिम चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच प्रदान करता है । हमें एक साथ मिलकर हृदय से संबंधित रोगों एवं असामयिक मौतों को कम करना है और लोगों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है ।

******

■ इस संसार में मातृत्व की भावना सबसे ऊपर है । जितिया या जीवितपुत्रिका व्रत जो मातायें रखती हैं उसका केन्द्र बिन्दु पुत्र का सुखी, स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन है । अधिकांश माँयें निर्जला व्रत रखती हैं । यह निर्जला व्रत लगभग अन्य सभी व्रतों से कठिन है इससे यह स्थापित होता है कि माँयें अपनी जीवनी से ही पुत्र में संजीवनी प्रदान करती है ।
■ मान्यता है कि गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन ने नाग वंश की रक्षा के लिए पक्षी का रूप धारण कर गरूड़ को भोजन बनाकर अपने को प्रस्तुत किया और अपने इस साहस से शंखचूड़ नामक नाग का जीवन भी बचाया था । इसी के बाद से पक्षी राज गरूड़ प्रसन्न हुए और नाग को अपना भोजन बनाना बंद किया । साथ ही, जीमूतवाहन को भी जीवन दान दे दिया । जीतिया व्रत उसी समय से चला आ रहा है ।
■ मैं सभी माताओं को जीतिया व्रत के अवसर पर नमन करता हूँ ।

दिनांक 28.09.2021

■ रेबीज के बारे में जागरूकता फैलाने और इसके खात्मे के लिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है । रेबीज एक बेहद घातक वायरस है जो इंसानों और जानवरों को संक्रमित करता है । यह संक्रमण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क पर हमला करता है और अगर इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाये तो यह घातक हो सकता है इसलिए सही समय पर रेबीज के बारे में जागरूक होकर कदम उठाया जाये तो इस बीमारी को रोका जा सकता है ।
■ रेबीज की वजह से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए डब्ल्यू.एच.ओ. ने सराहनीय कार्य किया है । भारत में कुत्ते रेबीज के प्रमुख वाहक हैं । भारत में कुत्तों की आबादी पर रोकथाम और रेबीज का टीकाकरण ही कुत्तों में रेबीज की रोकथाम का सर्वोत्तम तरीका है ।

दिनांक 27.09.2021

■ विश्व पर्यटन दिवस प्रत्येक वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा वर्ष 1980 में प्रथम बार विश्व पर्यटन दिवस का आयोजन किया गया था । विश्व पर्यटन दिवस मनाने का उद्देश्य पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में लोगों को जागरूक करना है ।
■ विश्व पर्यटन दिवस 2021 की थीम है ‘‘समावेशी विकास के लिए पर्यटन’’ इसका उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों की हर संभव मदद करना है । संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने व्यवसायों, पर्यटकों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, सदस्य राज्यों और गैर सदस्यों से पर्यटन की यूनिक क्षमता का जश्न मनाने के लिए ये सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि कोई भी पीछे न छूटे क्योंकि दुनिया फिर से खुलने लगी है और भविष्य की ओर देख रही है ।
■ कोरोना के कारण तकरीबन दो वर्षों से लोग अपने-अपने घरों तक ही सीमित होकर रह गये हैं । लोगों का बाहर जाकर घूमना न के बराबर हो गया है । कोरोना महामारी ने लोगों से उनकी आजादी तक छीन ली है लेकिन अब लोग फिर से दूसरी जगहों पर जा रहे हैं और पर्यटन संस्कृति में अपना थोड़ा-बहुत योगदान भी दे रहे हैं । यात्रा खुशी और आनंद लाती है तो ये सबसे अच्छी मानसिक चिकित्सा है । यात्रियों के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र को भी कोरोना वायरस का खामियाजा भुगतना पड़ा । इसने लोगों को दूसरे क्षेत्रों में नौकरी की तलाश में पर्यटन क्षेत्र को छोड़ने के लिए मजबूर किया । साथ ही, इसने देश की अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को नुकसान पहुँचाया । इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस न केवल इन मुद्दों पर रौशनी डाल रहा है बल्कि समावेशी विकास का आग्रह करता है ।

दिनांक 26.09.2021

■ विश्व गर्भ निरोधक दिवस-26 सितम्बर
■ प्रत्येक वर्ष 26 सितम्बर को विश्व गर्भ निरोधक दिवस मनाया जाता है । इसकी शुरुआत पहली बार वर्ष 2007 में हुई थी । विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई अंतर्राष्ट्रीय सरकारी और गैर सरकारी संगठन गर्भ निरोधक, परिवार नियोजन और महिलाओं की सेहत के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व गर्भ निरोधक दिवस मनाते हैं । इस वार्षिक जागरूकता अभियान का उद्देश्य महिलाओं को बेहतर प्रजनन, स्वास्थ्य से जुड़े विकल्प चुनने के लिए सक्षम और सशक्त बनाना है ।
■ यौन स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य और गर्भ निरोधक के उपयोग को लेकर लोगों के बीच जानकारी की कमी है । आज आवश्यकता है कि लोगों के बीच गर्भ निरोधक के तरीके के प्रति लोगों को जागरुक बनाया जाय ताकि महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके ।

******

■ विश्व नदी दिवस-26 सितम्बर
■ प्रत्येक वर्ष 26 सितम्बर को विश्व नदी दिवस मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इस दिवस का उद्देश्य लोगों में नदियों के प्रति जागरूकता फैलाना है । जिससे दुनिया भर के लोगों में नदी के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता पैदा हो सके । दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां नदियाँ उनकी जीवन रेखा है और लोगों का जीवन और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से इन नदियों पर निर्भर है ।
■ नदियों का मानव जीवन में उतना ही महत्व है जितना पानी का है । दुनिया की बहुत सारी आबादी नदियों के आस-पास है । पीने के पानी का प्रमुख स्रोत होने के साथ ही यह बहुत से उद्योगों का आधार है जिनका पानी के बिना चलना नामुमकिन है । खेतों में सिंचाई और उनमें उर्वर मिट्टी प्रदान करने का कारण है नदियों के आस पास के खेत बहुत उपजाऊ होते हैं जो इलाके की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं ।
■ नदियों का महत्व केवल इंसान के लिये ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिये भी बहुत अधिक है । नदियाँ इकोसिस्टम के चलने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं । यूं तो नदियों की उम्र बहुत ही लंबी होती है, लेकिन इंसानी गतिविधियाँ नदियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही हैं ।
■ नदियों का महत्व यातायात के लिहाज से भी अहम रहा है । पूर्व में नदियाँ जमीन के मुकाबले यात्रा का आसान जरिया रही हैं और कुछ हद तक वह आज भी कायम है । इस तरह से नदियाँ विभिन्न संस्कृतियों के संगम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।

दिनांक 25.09.2021

■ अंत्योदय दिवस-25 सितम्बर
■ भारत में प्रतिवर्ष 25 सितंबर को अंत्योदय दिवस मनाया जाता है इस दिन को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के रूप में मनाया जाता है । यह दिवस भारत सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2014 को घोषित किया गया है । अंत्योदय का अर्थ गरीब से गरीब व्यक्ति का उत्थान करना है ।
■ पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, इतिहासकार तथा राजनीतिक वक्ता थे । इस अवसर पर देश में रक्तदान शिविर संगोष्ठी तथा सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है । पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक प्रसिद्ध राजनीतिक व्यक्ति तथा विचारक थे । वे जनसंघ के समन्वयक तथा नेता थे । उन्होंने एकीकृत मानवता का समर्थन किया । उन्होंने स्वेदशी एवं लघु स्तरीय औद्योगिकीकरण का समर्थन किया । वे राष्ट्रवादी विचार के समर्थक थे । उन्होंने राष्ट्र धर्म प्रकाशन और मासिक पत्रिका राष्ट्र धर्म की स्थापना की।
■ उन्होंने अपने जीवन को समाज की सेवा में समर्पित किया एवं दीनदयाल जी द्वारा दिया गया मानवीय एकता का मंत्र हमारे लिए मार्गदर्शक बना हुआ है । अंत्योदय दिवस के अवसर पर मैं दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन और उनकी प्रेरणा को नमन करता हूं ।

******

■ विश्व फार्मासिस्ट दिवस-25 सितम्बर
■ विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर मैं सभी फार्मासिस्टों को शुभकामनाएं देता हूं । प्रत्येक वर्ष 25 सितम्बर को विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया जाता है । विश्व फार्मासिस्ट दिवस दुनिया के सभी फार्मासिस्टों के सम्मान में मनाया जाता है । इस्तांबुल, तुर्की में इंटरनेशनल फार्मास्युटिकल फेडरेशन (एफ0आई0पी0) कांग्रेस ने 25 सितम्बर, 2009 को वार्षिक विश्व फार्मासिस्ट दिवस के रूप में नामित किया है । देश के हर कोेने में स्वास्थ्य में सुधार के लिए फार्मासिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण है ।
■ विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2021 की थीम ‘‘फार्मेसी हमेशा आपके स्वास्थ्य के लिए विश्वसनीय’’ रखी गयी है । यह दिवस अपने समुदायों में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य को बदलने में फार्मासिस्टों की भूमिका के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है जिससे स्वास्थ्य, बीमारी को रोकने के लिए टीकाकरण और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि दवाएं सही तरीके से ली जाती हैं जिससे बीमारियों का अच्छी तरह से प्रबंधन और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है । यह दिवस मनाने से लोगों के जीवन को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित और प्रभावी दवाएं और टीके विकसित करने में फार्मासिस्ट की भूमिका की भी याद आती है ।
■ दुनिया भर के फार्मासिस्ट कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को उनकी जरूरत की दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं । हमें इस कठिन समय में फार्मासिस्टों के प्रयासों के लिए आभारी होना चाहिए ।

दिनांक 23.09.2021

■ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जन्मतिथि पर उन्हें नमन कर श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं ।
■ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकरजी शौर्य एवं सामाजिक पीड़ा के आवेश और पूर्ण स्वाधीनता की अभिलाषा के रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं । उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति की यथार्थ की तस्वीर झलकती है । आरंभिक समय से ही उन्होंने राष्ट्र के जीवन, राष्ट्र की संवेदना तथा समकालीन राजनीतिक चेतना में आ रहे परिवर्तनों को सजगता के साथ दिखाया है । शुरू से अंत तक उनकी सोच शोषित-पीड़ित जनता के साथ रही है । उनकी रचना में वैसे समाज की कल्पना झलकती है जहां उत्पीड़न और असमानता की जगह न हो । शोषणमुक्त समाज का निर्माण उनका वैचारिक पक्ष था । उनके सम्पूर्ण रचना संसार में इन सभी प्रतिबद्धताओं की झलक दिखाई देती है ।
■ हिन्दी काव्य के अप्रतिम आलोक पुरूष रामधारी सिंह दिनकर आग और राग के ही नहीं बल्कि युगधर्म के भी कवि हैं जिन्होंने अपने समय में तत्कालीन संसार की समस्त प्रवृतियों को समझा था और अपनी रचनाओं में प्रस्फुटित भी किया था । अपने 34 काव्य पुस्तकों एवं 27 गद्य ग्रंथों में जिनमें संस्कृति के चार अध्याय नामक रचनाओं में उन्होंने भारतवासियों की सोच संस्कृति और विविधताओं को अलग होते हुए भी एक जैसी बताई हैं जिनका अर्थ है अनेकता में एकता । दिनकर जी ने अपनी रचनाओं में अधिकांश वीर रस से संबंधित रचनाएं लिखी ।
■ सच है, विपत्ति जब आती है,
■ कायर को दहलाती है
■ सूरमा नहीं विचलित होते
■ क्षण एक नहीं धीरज खोते
■ विघ्नों को गले लगाते हैं
■ कांटो में राह बनाते हैं ।
■ दिनकर जी की रचनाएं एक तरफ समाज सुधार तथा समाज में व्याप्त अनीति और अत्याचार के खिलाफ थी तो वहीं दूसरी तरफ अपनी रचनाओं में शृंगार, मानवीय प्रेम की आशा झलकती है । रश्मिरथी, परशुराम की प्रतिज्ञा वीर रस की प्रमुख रचनाएं हैं जिनसे देश के वीर सपूतों में साहस और जोश उत्पन्न करने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है ।
■ दिनकर जी की रचना कुरूक्षेत्र भी अत्यंत प्रसिद्ध रचना है जो महाभारत के पद् चिन्हों पर रचित है । आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में छाया वादोत्तर काल की प्रथम पीढ़ी के इन महानतम् कवि में पूर्णकाल के प्रणम्य कवि भूषण से बढ़कर ओज और पराक्रम दिखलाई देता है । उनकी ओजस्वी रचनाओं में पर्वतों की चोटी से गिरते जलप्रपात की ध्वनि है, तो सरिताओं का कल कल, छल छल मधुर संगीत भी है । उनकी कविताओं के भीतर जिस आग की कल्पना की गयी है वह जलाती नहीं अपितु प्रकाश और उत्साह प्रदान करती है । वह मनुष्यता के सामने आ खड़ी हुई अंधेरी गलियों और सुरंगों को आलोकित करती है ।
■ दिनकरजी हिंदी साहित्य के एक महान प्रगतिवादी रचनाकार हैं । ओज गुण के प्रसिद्ध गायक और राष्ट्रीयता के परम भक्त कवि तथा रचनाकार माने जाने वाले दिनकर जी जिनकी वाणी में देश के लिए पीड़ा तथा देश के लोगों के लिए दया और करूणा समाहित है । ऐसी जागृति की मशाल लेकर चलने वाले सभी अर्थों में दिनकरजी का साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अद्वितीय और उल्लेखनीय स्थान है । उनकी जन्मतिथि पर एक बार फिर मैं उन्हें नमन करता हूं ।

दिनांक 21.09.2021

■ आज विश्व शांति दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ इस सृष्टि में सबसे दुर्लभ चीजों में से एक है शांति । आज के भौतिकवादी युग में शांति किसी नसीब वाले को ही हासिल हो सकती है । जिस तरह से दुनिया में अपनी प्रभुसत्ता कायम करने की होड़ मची हुई है उसमें शांति के लिए कहीं स्थान नहीं है ।
■ हमारे सनातन धर्म में मनीषियों ने शांति को जीवन का केन्द्र बिन्दु माना और उसे हासिल करने के लिए अध्यात्म की तरफ मानव को मोड़ा ।
■ संयुक्त राष्ट्र संघ स्थापित करने का उद्देश्य ही अन्तर्राष्ट्रीय संघर्ष को रोकना एवं शांति की संस्कृति विकसित करना था । वर्ष 2002 से 21 सितम्बर को विश्व शांति दिवस घोषित किया गया ।
■ दुनिया का चाहे कोई भी धर्म हो हर धर्म का एक ही सिद्धांत है इंसानियत और उस इंसानियत को बनाये रखने का मूल मंत्र है शांति। साम्राज्यवादी प्रवृत्ति कभी भी इस दुनिया को शांत रहने नहीं दे सकती । दुनिया की शांति पर सबसे बड़ा प्रहार आयुध निर्माताओं द्वारा किया गया । उन्होंने विश्व को आयुध स्टोर में बदल दिया है । आयुध के जरिये जहां साम्राज्यवादी ताकतें दुनिया को युद्ध में झोंकती हैं वहीं अपने लिए कमाई का साधन भी जुटाती हैं ।
■ विश्व शांति दिवस पर मैं सभी का आह्वाहन करता हूं कि आइये, हम अपने अंदर शांति की खोज करें और अपने आस-पास के वातावरण में शांति कैसे स्थापित हो इसके लिए पहल करें ।

दिनांक 17.09.2021

■ आज विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मैं सभी को शुभकामनायें देता हूँ । विश्वकर्मा का शाब्दिक अर्थ है ‘‘विश्व के निर्माता’’ । प्रत्येक वर्ष विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति को मनाई जाती है । मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का जन्म इसी दिन हुआ था । भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला वास्तुकार माना जाता है । इसलिए इस दिन उद्योगों, फैक्ट्रियों और हर तरह की मशीन की पूजा की जाती है ।
■ कहा जाता है कि प्राचीन काल में जितनी राजधानियाँ थीं प्रायः सभी विश्वकर्माजी द्वारा ही बनाई गई थी । स्वर्ग लोक, त्रेता युग की लंका, द्वापर युग की द्वारिका और हस्तिनापुर आदि विश्वकर्माजी द्वारा ही रचित है । इससे आशय लगाया जाता है कि धन, धान्य और सुख-समृद्वि की अभिलाषा रखने वाले पुरूषों को विश्वकर्माजी की पूजा करना आवश्यक और मंगलदायी है ।
■ भगवान विश्वकर्मा के अनेक रूप बताए जाते हैं - दो बाहु, चार बाहु एवं दस बाहु वाले तथा एक मुख, चार मुख एवं पंच मुख वाले, उनके मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी एवं दैवज्ञ नामक पाँच पुत्र है । यह भी मान्यता है कि ये पाँचों वास्तुशिल्प की अलग-अलग विद्याओं में पारंगत थे । उन्होंने कई वस्तुओं का आविष्कार किया ।
■ विष्णु पुराण के पहले अंश में भगवान विश्वकर्माजी को देव-बढ़ई कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया है । यही मान्यता अनेक पुराणों में आई है जबकि अन्य ग्रंथों में वह सृष्टिकर्ता कहे गये हैं । स्कंद पुराण में उन्हें देवायतनों का सृष्टा कहा गया । कहा जाता है कि वे शिल्प के इतने ज्ञाता थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ तैयार करने में समर्थ थे ।
■ आज विश्वकर्मा की संतानों को मजदूर बनाने वाले लोग हताश और निराश हैं । 21 वीं शताब्दी के भारत में मजदूर श्रमिक हो गए और ये श्रमिक सृजनकर्ता, निर्माता, विश्वकर्मा की संतान हैं। राष्ट्र का उत्थान और सेवा ही धर्म का संकल्प लेने वाले देश के प्रधानमंत्री द्वारा श्रमिकों के हुनर और कौशल को बढ़ाने का संकल्प लिया जा रहा है ।

******

■ परम आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी को जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं देता हूं ।
■ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात राज्य के मेहसाना जिले के वड़नगर में हुआ । प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने वाले स्वतंत्र भारत में जन्में प्रथम व्यक्ति हैं । 26 मई, 2014 से अब तक लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद पर आसीन हैं । इससे पहले वे 7 अक्टूबर, 2001 से 22 मई, 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं । स्व0 अटल बिहारी वाजपेयी जी की तरह श्री मोदी जी एक राजनेता और कवि हैं । वे गुजराती भाषा के अलावा हिंदी में भी द्रेशप्रेम से ओतप्रोत कविताएं लिखने में रूचि रखते हैं । श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एवं बुनियादी सुविधाओं पर खर्च में इजाफा हुआ है । अपने साहसिक कदम के तौर पर उन्होंने अफसरशाही में महत्वपूर्ण सुधार कार्य किए हैं । भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधार हेतु महत्वपूर्ण कदम जैसे-भ्रष्टाचार से संबंधित विशेष जांच दल का गठन किया गया । समस्त भारतीयों को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में लाने हेतु उनके द्वारा प्रधानमंत्री जनधन योजना का आरंभ किया गया ।
■ उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने हेतु अनेक साहसिक कदम उठाए हैं । इजराइल के साथ संबंधों में नये युग का आरम्भ किया । संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थाओं में भारत को एक अलग पहचान दिलायी एवं कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों में भारत की मजबूत दावेदारी को मान्यता प्रदान करायी ।
■ गुजरात के सफल मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें विकास पुरुष कहा गया है । वे वर्तमान समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं । उन्हें टाइम पत्रिका ने पर्सन ऑफ द ईयर से भी नवाजा है ।
■ बड़ा ही पावन दिन है । एक कोटेशन है ‘‘सौगंध हमें इस मिट्टी की हम देश नहीं झुकने देंगे, हम देश नहीं मिटने देंगे ।’’ देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सबसे पहले बीमारी की जननी से लड़ाई का आह्वान किया । उन्होंने कहा स्वच्छता अभियान शुरू करो । स्वच्छता अभियान के अंदर उद्देश्य छिपा था स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत ।
■ हमारे राष्ट्र के नायक, प्रधान सेवक समर्पित भाव से 21वीं सदी को संभाल रहे हैं और विश्व को मार्गदर्शन देने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं ।

******

■ विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर को प्रतिवर्ष मनाया जाता है जिसका उद्देश्य रोगी सुरक्षा के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और सभी देशों द्वारा एकजुट होकर कार्रवाई करने का आह्वान करना है ताकि रोगी के नुकसान को कम किया जा सके । रोगी सुरक्षा स्वास्थ्य देखभाल के प्रावधान के दौरान रोगियों को होने वाले जोखिमों, त्रुटियों और नुकसान को रोकने और कम करने पर केंद्रित है।
■ विश्व रोगी सुरक्षा दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा चिह्नित 11 आधिकारिक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है जिसमें विश्व क्षय रोग दिवस, विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व मलेरिया दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह, विश्व तंबाकू निषेध दिवस आदि शामिल हैं ।
■ आइये, हम सब विश्व रोगी सुरक्षा दिवस पर लोगों को प्रेरित करें कि वे प्रकृति और स्वच्छता से जुड़कर रोगों से बचें । अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोग होने पर भी उसपर विजय पा सकें ।

दिनांक 16.09.2021

■ आज अंतर्राष्ट्रीय ओजोन संरक्षण दिवस के अवसर पर मैं सभी को शुभकामना देता हूँ ।
■ संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रत्येक वर्ष 16 सितम्बर को विश्व ओजोन संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है । यह दिवस ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाने और ओजोन परत की कमी की ओर ध्यान खींचने के लिए मनाया जाता है । विश्व ओजोन संरक्षण दिवस हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को सीमित करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों पर जोर देता है।
■ सन् 1994 से 16 सितम्बर को ओजोन परत के संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में सभी देशों द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया गया था । 19 दिसम्बर, 2000 को ओजोन परत की कमी के कारण मॉन्ट्रियल कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने के लिए यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित किया गया है । मॉन्ट्रियल कन्वेंशन दुनिया भर के हानिकारक पदार्थों और गैसों को समाप्त करके ओजोन परत की रक्षा करने हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है ।
■ पृथ्वी हमारे आने वाले पीढ़ियों के लिए धरोहर है इसे सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है । ओेजोन क्षरण को रोकने हेतु अधिक से अधिक पेड़ लगाना अनिवार्य है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे ।
■ प्रकृति से निकटता से ही ओजोन का संरक्षण होगा । आईये, हम सब मिलकर प्रकृति से निकटता बढ़ायें और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित करें ।

दिनांक 15.09.2021

■ आज अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस पर मैं लोकतंत्र की बुनियाद यानी देश की जनता को नमन करता हूँ । संयुक्त राष्ट्र महासभा 2007 के प्रस्ताव के तहत प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस दुनिया में लोकतंत्र की स्थिति की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करता है । अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की पूर्ण भागीदारी से ही लोकतंत्र के आदर्श को साकार किया जा सकता है ।
■ स्वतंत्रता के मूल्य, मानवाधिकारों का सम्मान और सार्वभौमिक मताधिकार द्वारा आवधिक चुनाव कराने का सिद्धांत लोकतंत्र के आवश्यक तत्व हैं । बदले में लोकतंत्र के प्रतिनिधि मानव अधिकारों के संरक्षण और प्रभावी प्राप्ति के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार करते हैं ।
■ लोकतंत्र से आशय लोगों के द्वारा, लोगों के लिए और लोगों की चुनी सरकार से है । लोकतांत्रिक राष्ट्र में नागरिकों को वोट देने और अपनी सरकार का चुनाव करने का अधिकार प्राप्त होता है । लोकतंत्र को विश्व के सबसे अच्छे शासन प्रणाली के रूप में जाना जाता है । यही कारण है कि आज विश्व के अधिकतम देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू है । वर्तमान समय में भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । भारत में लोकतंत्र केवल अपने नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्रदान करने तक सीमित नहीं बल्कि यह प्रत्येक नागरिक को सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करने की व्यवस्था है ।
■ आज विश्व के कई देशों यानी एक-चौथाई हिस्से में लोकतंत्र नहीं है । इन देशों में लोकतांत्रिक आधार तैयार करना सबसे बड़ी चुनौती है । वर्तमान समय में लोकतंत्र के सुचारू कार्य को सुनिश्चित करने के लिए विभाजनकारी प्रवृत्तियों को रोकने की आवश्यकता है ।
■ हम बिहारवासी गौरवशाली हैं कि विश्व के लोकतंत्र की जननी बिहार है । लोकतंत्र के लिए जब-जब आंदोलन करने और कुर्बानी देने का अवसर आया बिहार ने उसमें अपनी अग्रणी भूमिका निभायी चाहे वह देश की आजादी की लड़ाई, चंपारण सत्याग्रह हो या कमजोर पड़ते लोकतंत्र को संभालने के लिए जे॰पी॰ आंदोलन हो । हम बिहारवासी लोकतंत्र के सच्चे पैरोकार हैं ।

******

■ देश में निर्माण के मूल कारक अभियंताओं को मैं अभियंता दिवस पर शुभकामना देता हूँ ।
■ महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्म दिवस पर प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को अभियंता दिवस मनाया जाता है । अभियंता दिवस को मनाने का लक्ष्य हमारे देश के युवाओं को इंजीनियरिंग के करियर के प्रति प्रेरित करता है और जिन इंजीनियरों ने हमारे देश के उत्थान में अपना योगदान दिया है उनको स्मरण करना ।
■ विश्वेश्वरैयाजी ने आधुनिक भारत की अभियांत्रिकी दृष्टि से रचना की एवं भारत को नया रूप प्रदान किया । एक इंजीनियर के रूप में उन्होंने बहुत से अद्भुत कार्य किये । उन्होंने सिंधु नदी से पानी की सप्लाई सुक्कुर गाँव तक करवाई । साथ ही, एक नई सिंचाई प्रणाली ‘‘ब्लांक सिस्टम’’ को शुरू किया । इन्होंने बाँध में इस्पात के दरवाजे लगवाये ताकि बाँध के पानी के प्रवाह को आसानी से रोका जा सके । उन्होंने मैसूर में कृष्णराजसागर बाँध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
■ सन् 1903 में पुणे के खडकवासला जलाशय में बाँध बनवाया । इसके दरवाजे इतने मजबूत थे कि बाढ़ के दबाव को भी झेल सकते थे । इसकी सफलता के बाद ग्वालियर में तिघरा बाँध एवं मैसूर में कृष्णराजसागर का निर्माण किया। 1906-07 में भारत सरकार ने उन्हें जल आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था की पढ़ाई के लिए अदन भेजा । हैदराबाद सिटी को बनाने का पूरा श्रेय विश्वेश्वरैयाजी को जाता है । समुद्र के कटाव से विशाखापत्तनम बंदरगाह की रक्षा के लिए एक प्रणाली विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

दिनांक 14.09.2021

■ आज हिन्दी दिवस पर मैं हिन्दी के विकास में तत्पर सभी लोगों को नमन करता हूँ और हिन्दी प्रेमियों को शुभकामनाएं देता हूँ ।
■ प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भारत की संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हुई हिन्दी भाषा को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा घोषित किया था । भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को भारत गणराज्य की आधिकारिक भाषा के रूप में हिन्दी को अपनाया । 26 जनवरी, 1950 को देश के संविधान द्वारा आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने के विचार को मंजूरी दी गयी । हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने के दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
■ यह दिवस हर वर्ष हिन्दी के महत्व पर जोर देने और इसको बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है । जो अंग्रेजी से प्रभावित हैं वैसे युवाओं को अपनी जड़ों के बारे में याद दिलाने का तरीका है यह हिन्दी दिवस । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बहुभाषी देश में हम कहां तक पहुंचे हैं और हम क्या करते हैं । अगर हम अपनी जड़ों के साथ जुड़े रहें तो हम अपनी पकड़ मजबूत बना लेंगे ।
■ हिन्दी केवल एक भाषा नहीं बल्कि यह देश को एक सूत्र में बांधने की कड़ी है । हम जहां भी रहें हमारी भाषा, संस्कृति और मूल्य हमारे साथ बरकरार रहने चाहिए ।
■ देशभक्ति की भावना के लिए प्रेरित करने वाली भाषा है हिन्दी । भारत में तो है ही पूरे विश्व में अंग्रेजी के बाद हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है । उत्तर भारत के लोगों की मातृभाषा हिन्दी है । इस दिवस पर भारत के राष्ट्रपति दिल्ली में एक समारोह में लोगों को भाषा के प्रति उनके योगदान के लिए राजभाषा पुरस्कार प्रदान करते हैं । हर भारतीय का कर्त्तव्य है कि राष्ट्रीय भाषा का सम्मान करते हुए इसके विकास में अपना योगदान दे ।

दिनांक 08.09.2021

■ अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस
■ आज अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ ।
■ 17 नवम्बर, 1965 को यूनेस्को द्वारा 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस घोषित किया गया । इसे पहली बार 1966 में मनाया गया । इसका उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक और सामाजिक रूप से साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालना है । अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के माध्यम से दुनिया भर में लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है ताकि वे अपने आने वाले कल को बेहतर बना सकें ।
■ साक्षरता एवं शिक्षा मनुष्य के समावेशी विकास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवयव हैं । साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है बल्कि यह लोगों में उनके अधिकारों और कर्त्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है । गरीबी उन्मूलन में इसका महत्वपूर्ण योदान हो सकता है । महिलाओं और पुरूषों के बीच समानता हेतु महिलाओं का भी साक्षर होना आवश्यक है ।
■ किसी भी देश का सबसे बड़ा अभिशाप वहां के निवासियों की निरक्षरता है । मनुष्य और पशु में यदि कोई अंतर है तो वह है बुद्धि का । संसार के किसी न किसी हिस्से में निरक्षरता रूपी अभिशाप आज भी मनुष्य के सर्वांगीण विकास को खोखला कर रही है । आज जरूरत है कि प्राथमिक शिक्षा को प्राथमिकता दी जाय, क्योंकि जब जड़ को सींचा जायेगा तभी पेड़ फलेगा और फूलेगा । नई युवा पीढ़ी को प्रेरित करने से ही साक्षरता के सही अर्थ को समझा जा सकता है ।
■ वर्तमान समय में व्यक्ति की प्राथमिक आवश्यकताएं रोटी, कपड़ा और मकान से अधिक महत्वपूर्ण शिक्षा को माना गया है ।
■ साक्षरता दर बढ़ाने के लिए किये गये विशेष प्रयासों में हमारे देश व विभिन्न राज्यों ने शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया है। जब तक समाज के हर तबके का व्यक्ति शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं होगा तब तक पूर्ण साक्षरता का स्वरूप पूरा नहीं हो सकता है । शिक्षा के अधिकार के कानून को जन-जन तक पहुँचाकर ही हम शिक्षित समाज की कल्पना कर सकते हैं ।

दिनांक 05.09.2021

■ आज शिक्षक दिवस पर मैं सभी शिक्षकों को नमन कर शुभकामनाएं देता हूं ।
■ विश्वविख्यात शिक्षाविद् महान दार्शनिक एवं देश के द्वितीय राष्ट्रपति डाॅ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है । हमारे देश में शिक्षा के क्षेत्र में जो क्रांति का उदय हुआ है, उसमें शिक्षकों का विशेष योगदान है । गुरु-शिष्य परम्परा तो हमारी संस्कृति की पहचान है । हमारे देश में शिक्षक अर्थात गुरु को तो भगवान से भी बढ़कर बताया गया ।
■ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
■ गुरुः साक्षात् पर ब्रह्मः तस्में श्री गुरुवे नमः ।।
■ डाॅ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को अध्यापन पेशे से बहुत प्यार था, इसलिए पूरे भारत में शिक्षकों को सम्मान देने के लिए उन्होंने अपने जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रुप में मनाने का आग्रह किया था और वर्ष 1962 से प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है ।
■ शिक्षा व्यक्ति को समर्थ बनाती है तथा समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए मार्ग प्रशस्त करती है । छात्रों को समकालीन चुनौतियों से मुकाबला करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ उनमें नैतिक एवं श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों का विकास ही हमारी शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य होना चाहिए । इस उद्देश्य की प्राप्ति में शिक्षकों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है ।
■ हमारी सफलता के पीछे हमारे शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । माता-पिता की तरह ही हमारे शिक्षक के पास ढेर सारी व्यक्तिगत समस्याएं होती हैं लेकिन वह इन सब को दरकिनार कर अपनी जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वाह करते हैं एवं हमें शैक्षणिक दृष्टि से बेहतर बनाने के साथ-साथ हमारे ज्ञान, विश्वास के स्तर को बढ़ाकर नैतिक रुप से सुदृढ़ बनाते हैं । जीवन में अच्छा करने के लिए हर असंभव कार्य को संभव करने की प्रेरणा देते हैं ।
■ शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन के वास्तविक शिल्पकार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जीवन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी स्वयं प्रकाशित होते रहें । शिक्षक उस माली के समान है जो एक बगीचे को अलग-अलग रूप रंग के फूलों से सजाता है । हर विद्यार्थी दूसरे से अलग होता है । उसकी अपनी क्षमता होती है । कुछ विद्यार्थी खेलकूद में अच्छे होते हैं तो कुछ गणित में, वहीं कुछ की अंग्रेजी में दिलचस्पी होती है । एक अच्छा शिक्षक हमेशा अपने विद्यार्थियों की रुचि को ध्यान में रखकर उन्हें उनके विषय में आगे बढ़कर निखरने की शिक्षा देता है । इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखता है कि उनकी दूसरी गतिविधियां या विषय न प्रभावित हों । यही कारण है कि यह दिन शिक्षकों के सम्मान और आभार प्रकट करने के लिये समर्पित किया गया है ।
■ गुरु शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का अहम हिस्सा है । इसके कई स्वर्णिम उदाहरण इतिहास में दर्ज हैं । विद्यार्थियों एवं शिक्षकों दोनों का ही दायित्व है कि वे इस महान् परंपरा को बेहतर ढंग से समझें और एक अच्छे समाज के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें ।

दिनांक 30.08.2021

■ जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मैं सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ ।
■ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। इसीलिए इस शुभ तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है ।
■ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव का महत्व बहुत व्यापक है । श्रीमद् भगवत गीता में एक प्रभावशाली कथन है:
■ “जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होगी, तब-तब मैं जन्म लूंगा ।”
■ बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो एक दिन उसका अंत अवश्य होता है । और कभी स्मरण हो न हो, जन्माष्टमी के अवसर पर गीता के इस कथन का स्मरण तो मानवजाति को होता ही है । जन्माष्टमी के माध्यम से अनंत काल तक सनातन धर्म पर चलने वाली पीढ़ी अपने आराध्य के गुणों को जान सकेगी और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करेगी । श्रीकृष्ण जन्माष्टमी त्योहार नहीं बल्कि हमारी सभ्यता एवं संस्कृति है ।
■ श्रीकृष्ण के बाल्यावस्था की लीलाओं को देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि वे धरती पर विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए अवतरित हुए थे । एक के बाद एक राक्षसों का वध उनकी शक्ति और पराक्रम को दर्शाता है । सर्वशक्तिमान होने के बावजूद वे सामान्यजनों के मध्य सामान्य व्यवहार करते थे । जीवन की हरेक भूमिका को उन्होंने आनंद के साथ जिया । श्रीकृष्ण को प्रेम का प्रतीक माना जाता है ।
■ कंस के वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारकाधीश बने । द्वारकाधीश और सर्वशक्तिमान होते हुए भी मित्र प्रेम का सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए वे महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथि बने । जहाँ युद्धभूमि में उन्होंने गीता का उपदेश देकर अर्जुन और उनके माध्यम से भारतवासियों को जीवन के कर्त्तव्यों का महत्व बताया ।
■ सनातन धर्म में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है । मान्यता है कि इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं । सबकी मनोकमना पूर्ण करने हेतु मैं प्रभु श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता हूँ ।

दिनांक 29.08.2021

■ राष्ट्रीय खेल दिवस
■ प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को हाॅकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती पर राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन किया जाता है । राष्ट्रीय खेल दिवस सन् 1928, 1932 एवं 1936 में भारत के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले हाॅकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन का प्रतीक है । मेजर ध्यानचंद ने खेल की दुनिया में भारत की ओर से बहुमूल्य योगदान दिया है ।
■ भारत सरकार ने विद्यार्थियों एवं बच्चों के लिए खेल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं । भारत सरकार ने बच्चों को न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत करने की कोशिश की है बल्कि उनकी शरीरिक एवं मानसिक स्थिति पर भी जोर दिया है । विद्यालयों में स्पोर्टस् गतिविधियों को अनिवार्य कर दिया है । अब हर बच्चे का किसी न किसी खेल में भाग लेना अनिवार्य हो गया है । यह बढ़ते हुए बच्चों के लिए बहुत आवश्यक है ताकि वह सही रूप से विकसित हो सके एवं उनमें खेल भावना, सच्चापन, हिम्मत और टीमवर्क की भावना जागरूक हो सके ।
■ आज खेल क्षेत्र में भी अलग-अलग अवसर प्राप्त हो रहे हैं । इन अवसरों का फायदा उठाकर हम अपने खेलने के हुनर को और भी बढ़ा सकते हैं ।
■ खेल देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक अच्छा माध्यम है । इतना ही नहीं खेल देश के नागरिकों को एकसूत्र में बांधने का कार्य करता है । इससे देशभक्ति भी बढ़ती है ।

दिनांक 26.08.2021

■ मदर टेरेसा के जन्म दिवस पर उन्हें नमन करता हूँ । मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (मेसीडोनिया) में हुआ था । ऐसा माना जाता है कि जब यह मात्र 12 साल की थीं तभी इन्हें यह अनुभव हो गया था कि वो अपना सारा जीवन मानव सेवा में लगायेंगी । मदर टेरेसा आयरलैंड से 6 जनवरी, 1929 को कोलकाता के लारेटो कॉन्वेंट पहुंची । वे एक अनुशासित शिक्षिका थीं और विद्यार्थी उनसे बहुत स्नेह करते थे । उनका मन शिक्षण में पूरी तरह रम गया था पर उनके पास फैली गरीबी, दरिद्रता और लाचारी उनके मन को अशांत करती थी । 1943 के अकाल से बड़ी संख्या में मौतें हुई और लोग गरीबी से बेहाल हो गए जिस कारण वे बहुत चिंतित थे ।
■ वर्ष 1946 में उन्होंने गरीबों, असहायों, बीमारों और लाचारों की जीवनपर्यन्त मदद करने की ठानी । इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फैमिली हॉस्पिटल में आवश्यक नर्सिंग ट्रेनिंग पूूरी की और 1948 में वापस कोलकाता पहुंची जहां गरीब बुजुर्गों की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रही । धीरे-धीरे उन्होंने अपने कार्य से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा । इन लोगों में देश के उच्च अधिकारी और भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल थे जिन्होंने उनके कार्यों की सराहना की ।
■ 7 अक्टूबर, 1950 को उन्हें वैटिकन से मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की अनुमति मिल गयी । इस संस्था का उद्देश्य भूखों, निर्वस्त्र, बेघर, अंधों, चर्म रोग से ग्रसित और ऐसे लोगों की सहायता करना था जिनके लिए समाज में कोई जगह नहीं थी ।
■ मदर टेरेसा ने निर्मल हृदय का ध्येय असाध्य बीमारी से पीड़ित रोगियों और गरीबों की सेवा करना था जिन्हें समाज से बाहर निकाल दिया गया हो । निर्मला शिशु भवन में अनाथ एवं बेघर बच्चों की सहायता का कार्य होता था ।
■ मदर टेरेसा को मानवता की सेवा के लिए अनेक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हुए । भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और बाद में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा । मानव कल्याण के लिए किए गये कार्यों की वजह से उन्हें वर्ष 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला । उन्होंने नोबेल पुरस्कार की राशि को गरीबों के लिए एक फंड के तौर पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया ।
■ सेवा को धर्म उन्होंने बनाया था । वे जाति धर्म से ऊपर उठकर काम करती थीं जबकि सेवा को लोग अपने धर्म-जाति-जमात बनाने का मिशन बनाकर काम करते हैं, वे उनसे ऊपर उठकर काम करती थीं ।

******

■ आज महिला समानता दिवस के अवसर पर समस्त नारी शक्ति को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं । समानता के अधिकार से वंचित महिलाओं को समानता का अधिकार मिले इसके लिए हमें आगे आना चाहिए । लिंगभेद मिटाना है, नया राष्ट्र बनाना है।

दिनांक 22.08.2021

■ रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है । यह त्यौहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है । इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा का बंधन बांधती है और आजीवन संकट में रक्षा का अघोषित वचन लेती है ।
■ हिंदुओं में सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षा सूत्र बांधते समय संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं जिसमें रक्षाबंधन का संबंध राजा बलि से स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होता है ।
■ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ लक्ष्मी ने भी पाताल लोक जाकर राजा बलि को राखी बांध कर उन्हें भाई बनाया था ।
■ एक अन्य मान्यता के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षा सूत्र को देवगुरु वृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए स्वस्तिवाचन किया ।

दिनांक 21.08.2021

■ भारत के प्रत्येक परिवार और समाज के लिए उसके वरिष्ठ जन अपने ज्ञान, बुद्धि और संस्कार की बदौलत अनुभव की जीती जागती किताब, अद्भुत संस्कारशाला, अमूल्य निधि और कुशल मार्गदर्शक होते हैं । वह अपने परिवार के लिए ऐसे विशाल वट वृक्ष की तरह होते हैं, जिनकी छत्र छाया में परिवार का हर सदस्य सुरक्षित और सुकून महसूस करता है । सनातन संस्कृति में सदियों से अपनों से बड़ों की इज्जत करना और उनके अनुभव से लाभान्वित होते हुए खुद को सही राह पर रखने की परंपरा रही है । परिवार, समाज और देश के निर्माण में वरिष्ठ जनों की अहम भूमिका होती है । भारत में हमेशा संयुक्त परिवार की परंपरा रही है, लेकिन उपभोक्तावादी संस्कृति ने इसको हाल के वर्षों में छिन्न-भिन्न कर दिया है, एकल परिवार के चलन शुरू होने के बाद बच्चों का सर्वांगीण विकास भी अवरूद्ध हो गया है । आज सबसे ज्यादा जरूरी है कि एकल परिवार को संयुक्त परिवार की ओर ले जाया जाय ताकि परिवार के वरिष्ठ जनों का लाभ परिवार को फिर से मिल सके । हमें अपने बड़े बुजुर्गों के प्रति संवेदनशील और उदार बनकर उनकी इज्जत और देखभाल करनी होगी । इससे न केवल हम संस्कारवान बन सकेंगे बल्कि उनके अनुभवों से हम समृद्ध भी बन सकेंगे । ये बातें बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिन्हा ने अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर कही । श्री सिन्हा ने कहा कि सभी वृद्घजन हमारी समृद्ध विरासत हैं, उनकी समुचित देखभाल करने वाले समाज की तरक्की को कोई भी बाधा रोक नहीं सकती है ।

दिनांक 20.08.2021

■ विश्व मच्छर दिवस-20 अगस्त
■ मच्छरों से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विश्व मच्छर दिवस का आयोजन प्रत्येक वर्ष 20 अगस्त को मनाया जाता है । मच्छरों से होने वाली अनेक बीमारियों के बारे में सावधानी बरतने हेतु लोगों को जागरूक करना इस दिवस का उद्देश्य है ।
■ सर रोनाल्ड रांस के प्रयासों को मान्यता देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मच्छर दिवस मनाया जाता है । 1897 में सर रोनाल्ड रांस ने एक अभूतपूर्व खोज की जिससे अंततः मच्छरों और मलेरिया के बीच संबंध स्थापित किया । उस समय तक मच्छरों और उनके कारण होनेवाली घातक बीमारी के बीच इस संबंध के बारे में दुनिया अंधेरे में थी ।
■ विश्व मच्छर दिवस वर्ष 1930 से लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रापिकल मेडिसिन द्वारा आयोजित किया जाता है । मैं आह्वान करता हूं कि आइये हम सब मच्छरों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलावें ।

********

■ मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर वर्ष का पहला महीना है । मुहर्रम की 10वीं तारीख हजरत इमाम हुसैन की उस शहादत की याद दिलाती है जो सच्चाई और ईमान के रास्ते पर चलते हुए नफरत और जुल्म के खिलाफ हुई थी । वस्तुतः इस अवसर पर धर्म और अपने सिद्धान्तों के लिए शहीद होने वाले के प्रति श्रद्धा-भक्ति प्रकट कर उनकी पावन स्मृति को ताजा किया जाता है और यह संदेश दिया जाता है कि निष्ठा का मार्ग ही सन्मार्ग है । मुहर्रम हमें सच्चाई की राह पर चलते हुए हर तरह की कुर्बानी देने की प्रेरणा भी देता है ।
■ मुहर्रम मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा पैगंबर मोहम्मद के पोते इमाम हुसैन की शहादत के लिए मनाया जाता है । कर्बला की लड़ाई के दौरान उनके परिवार के सदस्यों और अनुयायियों के साथ उनकी मृत्यु हो गयी थी । लोगअली और उनके बेटे हसन को याद करते हुए मुहर्रम मनाते हैं क्योंकि पूरे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के लिए उनका निधन हो गया था ।

दिनांक 16.08.2021

■ आज स्व0 अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ स्व० अटल बिहारी वाजपेयीजी भारत के सम्माननीय और प्रेरक राजनीतिज्ञ थे । वाजपेयी जी प्रखर वक्ता एवं प्रभावशाली कवि थे, जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला । एक नेता के तौर पर वे अपनी स्वच्छ छवि, लोकतांत्रिक और उदार विचारों के लिए जाने जाते हैं । सन् 2015 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया ।
■ स्व० अटल बिहारी वाजपेयीजी की राजनैतिक यात्रा की शुरुआत एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई । 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण वह अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर लिये गए । उसी समय उनकी मुलाकात डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी से हुई जो भारतीय जनसंघ के नेता थे । मुखर्जी जी के राजनीतिक एजेंडे में वाजपेयी जी ने सहयोग किया एवं भारतीय जनसंघ की कमान संभाली । सर्वप्रथम 1954 में वह बलरामपुर लोकसभा सीट से संसद सदस्य निर्वाचित हुए । छोटी उम्र के बावजूद वाजपेयीजी के विस्तृत नजरिए और जानकारी ने उन्हें राजनीतिक जगत में सम्मान और स्थान दिलाने में मदद की ।
■ 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार में वाजपेयी जी को विदेश मंत्री बनाया गया । भारत-पाकिस्तान के 1971 युद्ध के कारण प्रभावित हुए भारत-पाकिस्तान के व्यापारिक रिश्ते को सुधारने के लिए उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा कर नई पहल की ।
■ अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में एन0डी0ए0 सरकार ने मई 1998 में राजस्थान के पोखरन में परमाणु परीक्षण संपन्न किया ।
■ अटल जी का महत्वपूर्ण वक्तव्य था कि ‘‘भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता, और अभाव से मुक्त हो ।’’ स्व० अटलजी के इस सपने को पूरा करने के क्रम में
■ स्वतंत्रता दिवस का 75 वां वर्ष, भारत अमृत महोत्सव, एक इतिहास रचेगा । भारत के समक्ष स्वामी विवेकानंद जी के सपनों को साकार करने का अवसर आया है। युवा भारत युग परिवर्तन करने वाला होगा । युवा भारत विश्व की मानव जाति के कल्याण के लिए काम करेगा और वसुधैव कुटुंबकम की स्थिति को फिर से स्थापित करने में सफल होगा ।

दिनांक 15.08.2021

■ 15 अगस्त, 1947 भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण और गौरवशाली दिन है । 15 अगस्त, 2021 को भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनायी जा रही है । इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा गया एक ऐसा दिन जिस दिन भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने सब कुछ न्यौछावर कर देने के बाद स्वतंत्रता का स्वाद चखा । भारत के लिये ऐसा ऐतिहासिक दिन जब पहली बार दिल्ली में लाल किले पर तिरंगा लहराया गया था । प्रत्येक भारतीय के लिये यह एक उत्सव का दिन है । ■ देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने के लिये लाखों लोगों ने अपनी प्राणाहुति दे दी । प्रत्येक वर्ष इस दिन उन महान् वीर सपूतों को पूरे देशवासियों की तरफ से नमन किया जाता है । जिन वीर सेनानियों के नेतृत्व में देश आजाद हुआ आज भी उन्हें प्रत्येक भारतवासी सम्मान की दृष्टि से देखता है । ■ ब्रिटिश शासन ने देश को सम्पूर्ण रूप से जीर्ण-शीर्ण कर दिया था परंतु हमारे पुरखों ने युगों से संचित नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक शक्ति और आत्मबल को अपना संबल बनाकर कदम आगे बढ़ाया । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम उन सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं का स्मरण करते हुए उनके सपनों के भारत का सृजन का संकल्प दोहराते हैं । यह राष्ट्रीय पर्व हमें अपनी उपलब्धियों के गौरव गान का दिवस है । ■ आज हम सबको प्रतिज्ञा लेनी है एक ऐसे भारत के निर्माण के लिये जो पूर्णतः आत्मनिर्भर हो और विश्वगुरू हो ।

दिनांक 12.08.2021

■ आज अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर मैं सभी युवाओं को शुभकामनाएँ देता हूँ । प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है । किसी भी देश का युवा उस देश के विकास का सशक्त आधार होता है । संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1985 ई0 को अंतर्राष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया गया । पहली बार सन् 2000 में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन किया गया था ।
■ पूरे विश्व में भारत को युवाओं का देश कहा जाता है । अपने देश में 35 वर्ष की आयु तक के लगभग 65 करोड़ युवा हैं अर्थात हमारे देश में अथाह श्रम शक्ति उपलब्ध है । आज जरूरत है देश की युवा शक्ति को उचित मार्गदर्शन देकर उन्हें देश की उन्नति में भागीदार बनाने की, उनमें अच्छे संस्कार, उचित शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ बनाने की, उनके चरित्र निर्माण की ।
■ भारत में युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद ने 20वीं सदी में 21वीं सदी के भारत की कल्पना की और 21वीं सदी में भारत के विश्व गुरु बनने की भविष्यवाणी की । भारत युवाओं का हो, भारत आत्मनिर्भर राष्ट्र बने इस पर युवाओं को स्वामीजी ने मार्गदर्शन दिया । उन युवाओं के लिए स्वामी जी के सपनों पर खड़ा उतरने का, कौशल युक्त, हुनर युक्त बनकर विश्व का गुरू बनने का अवसर है, इसे हमारे युवा गंवायें नहीं । हमारे युवा राष्ट्र निर्माण में गवाह नहीं भागीदार बनें ।
■ देश के निर्माण के लिए, देश की उन्नति के लिए, देश को विश्व के विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करने के लिए युवा वर्ग को मेधावी, श्रमशील, देश भक्त और समाज सेवा की भावना से ओत-प्रोत होना चाहिये ।
■ मैं आह्वान करता हूँ आज के युवा वर्ग का कि वे अपने विद्यार्थी जीवन में अध्ययनशील, संयमी, चरित्र निर्माण के लिए आत्मानुशासन लाकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने का प्रयास करें ।

दिनांक 09.08.2021

■ 9 अगस्त- अगस्त क्रांति दिवस
■ भारत छोड़ो आंदोलन की 79वीं वर्षगांठ है, जिसे अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है । ऐसा माना जाता है कि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का आखिरी बड़े पैमाने पर किया गया आंदोलन था जिसमें सभी भारतवासियों ने एक साथ बड़े स्तर पर भाग लिया । कई जगहों पर समानांतर सरकारें बनाई गयीं । स्वतंत्रता सेनानी भूमिगत होकर भी लड़े।
■ 14 जलाई, 1942 को वर्धा में कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया एवं 8 अगस्त, 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस की बैठक मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में हुई और भारत छोड़ो आंदोलन के प्रस्ताव को मंजूरी मिली । इस प्रस्ताव में यह घोषणा की गयी थी कि भारत में ब्रिटिश शासन की तत्काल समाप्ति भारत में स्वतंत्रता तथा लोकतंत्र की स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है ।
■ भारत छोड़ो आंदोलन का लक्ष्य भारत से ब्रिटिश साम्राज्य को समाप्त करना था । यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान काकोरी कांड के ठीक 17 साल बाद 9 अगस्त, 1942 को गांधी जी के आह्वान पर पूरे देश में एक साथ प्रारंभ हुआ ।
■ भारत छोड़ो आंदोलन या अगस्त क्रांति के दौरान गांधी जी ने कहा किः
■ एक छोटा सा मंत्र है जो मैं आपको देता हूँ । इसे आप अपने हृदय में अंकित कर लें और अपनी हर सांस में उसे अभिव्यक्त करें । यह मंत्र है ‘‘करो या मरो’’ । अपने इस प्रयास में हम या तो स्वतंत्रता प्राप्त करेंगे या फिर जान दे देंगे ।
■ प्रमुख नेताओं के जेल में जाने के बाद नेतृत्व के अभाव में लोगों के बीच से ही नेतृत्व उभरा ।इसी दौरान पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के दौरान सात युवा छात्र शहीद हो गए ।
■ अगस्त क्रांति या भारत छोड़ो आदोलन देश की आजादी के लिए एक निर्णायक मोड़ था । विभिन्न स्त्रोतों से आजादी की जो इच्छा और उसे हासिल करने की जो शक्ति भारत में बनी थी उसका अंतिम प्रदर्शन अगस्त क्रांति था । आंदोलन ने इस बात पर निर्णय किया कि आजादी की इच्छा में भले ही नेताओं का भी साथ था, लेकिन उसे हासिल करने की ताकत निर्णायक रूप से जनता की थी ।

दिनांक 27.07.2021


■ स्वर्गीय ए0पी0जे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि
■ स्वर्गीय ए0पी0जे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें नमन करता हूँ ।
■ ए0पी0जे अब्दुल कलाम भारत के यशस्वी वैज्ञानिकों में से एक तथा उपग्रह प्रक्षेपण यान और रणनीतिक मिसाइलोें के स्वदेशी विकास के वास्तुकार थे । SLV-3 ‘अग्नि’ और ‘पृथ्वी’ उनकी नेतृत्व क्षमता के प्रमाण हैं । उनके अथक प्रयासों से भारत रक्षा तथा वायु-आकाश प्रणालियों में आत्मनिर्भर बना है । इन्हें बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपन यान प्रौद्योगिकी के विकास कार्यों के लिए भारत में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता है । अनेक पुरस्कारों-सम्मानों के साथ उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया । विज्ञान प्रसार में योगदान हेतु उन्हें प्रतिष्ठित ‘किंग चार्ल्स 11’ मेडल से सम्मानित किया गया ।
■ भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान देश भर के आठ लाख से अधिक छात्रों से भेंट कर उन्होंने महाशक्ति भारत के स्वप्न को रचनात्मक कार्यों द्वारा साकार करने का आह्वान किया । उन्होंने सिखाया जीवन में चाहे जैसी भी परिस्थिति क्यों न हो पर जब आप अपने सपने को पूरा करने की ठान लेते हैं तो उन्हें पूरा करके ही रहते हैं । अब्दुल कलाम साहब के विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं ।

दिनांक 26.07.2021

■ कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई के अवसर पर मैं कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि देता हूँ ।
■ कारगिल युद्ध भारतीय सेना के पराक्रम और शौर्य की एक ऐसी गाथा है जो अमर और अमिट है इसका स्मरण आवश्यक है कि 22 वर्ष पहले 26 जुलाई, 1999 को हमारे पराक्रमी सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना की धोखाधड़ी का मुँहतोड़ जबाव देकर अद्भुत विजय हासिल की । कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के सम्मान में मनाया जाता है ।
■ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीजी ने घुसपैठ कर आई पाकिस्तानी सेना की मंशा को पहचाना और तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी । इसे ऑपरेशन विजय नाम दिया गया । करीब दो लाख सैनिक मोर्चे पर भेजे गये । दुर्गम परिस्थितियों में भारतीय सेना की रणनीति, सेना के सभी अंगों का समन्वय और अद्भुत साहस के परिणामस्वरूप विजय हासिल की ।

दिनांक 21.07.2021


■ बकरीद के शुभ अवसर पर सभी मुस्लिम भाइयों को बधाई देता हूं । ईद अल अजहा या बकरीद इस्लाम धर्मावलंबियों का प्रमुख त्यौहार है । ईद अल अजहा का अर्थ कुरबानी का ईद माना जाता है । यह रमजान के पवित्र महीने के पश्चात् लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है ।
■ इस्लामिक मान्यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने पुत्र हजरत इस्माइल को बकरीद के दिन ही खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में कुर्बान करने जा रहे थे तो अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवन दान दे दिया । जिसकी याद में बकरीद का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।
■ बकरीद हमें यह संदेश देता है कि परिवार के बड़े सदस्य को स्वार्थ से परे होना चाहिये और मनुष्य को अपने कार्य का संपादन मानव कल्याण हेतु करना चाहिये ।
■ इस महीने इस्लाम धर्मावलंबी मक्का (सउदी अरब) में एकत्रित होकर हज करते हैं ।

दिनांक 18.07.2021


■ नेल्सन रोलिहलाहला मंडेला की जयंती पर मैं उन्हें नमन करता हूं। वे एक दक्षिण अफ्रीकी रंगभेद विरोधी क्रांतिकारी राजनेता थे । उन्होंने 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वह दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत प्रमुख थे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुए चुनाव में चुने गए थे। उनकी सरकार ने संस्थागत नस्लवाद से निपटने और नस्लीय सुलह को बढ़ावा देकर रंगभेद को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया। वैचारिक रूप से वे राष्ट्रवादी और समाजवादी थे ।

दिनांक 17.07.2021

■ सभी के लिए समान न्याय व्यवस्था, स्वस्थ और सुदृढ़ समाज के निर्माण हेतु अतिआवश्यक शर्त है।आईये अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर हम संकल्प लें कि कोई व्यक्ति या वर्ग न्याय से वंचित न रहे व सबको आसानी से न्याय मिल सके ।

दिनांक 15.07.2021

■ आज विश्व युवा कौशल दिवस पर मैं सभी युवाओं को शुभकामना देता हूँ ।
■ संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में युवाओं को रोजगार, अच्छे काम और उद्यमिता के लिए कौशल से युक्त हुनर को निखारने के लिए 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में घोषित किया । तब से विश्व युवा कौशल दिवस ने युवा लोगों को जागरूक किया है । इस दिवस ने प्रशिक्षण संस्थानों, फर्मों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नीति निर्माताओं और विकास भागीदारों के बीच संवाद का एक अनूठा अवसर प्रदान किया है । प्रतिभागियों ने कौशल के लगातार बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला है क्योंकि दुनिया विकास के एक स्थाई मॉडल की ओर अग्रसर है ।

दिनांक 12.07.2021

■ आज राष्ट्रीय सादगी दिवस पर मैं आह्वान करता हूं कि आइए हम अपने जीवन में सादगी अपनाएं ।
■ राष्ट्रीय सादगी दिवस हर साल 12 जुलाई को मनाया जाता है । यह एक जीवनशैली है। सादा जीवन के लिए प्रमुख हैं अपनी सम्पत्ति को कम करना और भौतिक सुविधाओं पर निर्भरता कम करना। सादा जीवन की विशेषता है कि व्यक्ति उससे संतुष्ट होता है जो उसे प्राप्त है न कि जो वह चाहता है। आम तौर पर तप और योग सादा जीवन जीने और विलास से बचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं । मजबूरी के कारण गरीबी में रहने वाले लोग सादा जीवन नहीं जीते बल्कि यह एक स्वैच्छिक जीवनशैली है। सादा जीवन के दौरान आप सरल चीजों में आनंद लेते हैं जैसे टहलना, बादलों को निहारना आदि । गैरजरूरी चीजों पर ध्यान नहीं देने के कारण आपकी मानसिक शांति अपेक्षाकृत अधिक होती है।

********




■ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं।
■ जगन्नाथपुरी स्थित भगवान जगन्नाथ का धाम हिंदुओं के चार धामों में से एक है। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सैकड़ों साल से हो रही है। इसके महत्व का वर्णन पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में किया गया है। भगवान जगन्नाथ, विष्णु जी के पूर्णावतार श्री कृष्ण के ही एक रूप हैं। रथ यात्रा में सबसे आगे बलभद्र के रूप में बलरामजी बीच में बहन सुभद्रा और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ निकलता है। मान्यता है कि इस रथ यात्रा के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं और भगवत् कृपा से वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। जगन्नाथ पुरी की यात्रा आदिशंकराचार्य, चैतन्य महाप्रभु, रामानुजाचार्य, जयदेव, कबीर और तुलसी जैसे अनेक संतों ने की है और भगवान जगन्नाथ की महिमा को स्वीकार कर उनके अनन्य भक्त बन गये।

दिनांक 11.07.2021

■ विश्व जनसंख्या दिवस पर मैं शुभकामना देता हूं। यह कार्यक्रम हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है ताकि वैश्विक जनसंख्या के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़े । यह दिवस 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालन परिषद द्वारा स्थापित किया गया था । 11 जुलाई, 1987 को दुनिया की आबादी पांच अरब तक पहुंच गई थी।
■ विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य लोगों में जनसंख्या के मुद्दों जैसे परिवार नियोजन, लैंगिक समानता , गरीबी , मातृ स्वास्थ्य और मानवाधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

दिनांक 10.07.2021




■ भिखारी ठाकुरजी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें नमन करता हूं।
■ स्वर्गीय ठाकुर भोजपुरी भाषा के कवि, नाटककार, गीतकार, अभिनेता, लोक नर्तक, लोक गायक और सामंती व्यवस्था के विरोधी थे । उन्हें भोजपुरी भाषा के सबसे महान लेखक और पूर्वांचल के सबसे लोकप्रिय लोक लेखक के रूप में माना जाता है। उन्हें "भोजपुरी का शेक्सपियर" और "राय बहादुर" कहा जाता है।उनकी रचनाओं में एक दर्जन से अधिक नाटक, एकालाप, कविताएँ, भजन आदि शामिल हैं जो लगभग तीन दर्जन पुस्तकों के रूप में छपे। उनकी उल्लेखनीय कृतियाँ बिदेसिया, गबरघिचोर, बेटी बेचवा और भाई बिरोध हैं। उन्हें बिदेसिया लोक रंगमंच परंपरा के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

दिनांक 08.07.2021




■ हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह के निधन की सूचना से मन व्यथित है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को चिर शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को दारूण दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। भावपूर्ण और विनम्र श्रद्धांजलि।।

दिनांक 07.07.2021




■ स्वर्गीय दिलीप कुमार हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय अभिनेता थे जो राज्य सभा के सदस्य रह चुके थे। दिलीप कुमारजी को उनके दौर का बेहतरीन अभिनेता माना जाता है, त्रासद या दु:खद भूमिकाओं के लिए मशहूर होने के कारण उन्हें 'ट्रेजिडी किंग' भी कहा जाता था। उन्हें भारतीय फ़िल्मों के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, इसके अलावा दिलीप कुमार को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज़ से भी सम्मानित किया गया था। आज दिनाँक 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार जी का दुःखद निधन सुबह 7:30 पर हो गया जिससे भारतीय सिनेमा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
■ उनकी पहली फ़िल्म 'ज्वार भाटा' थी, जो 1944 में आई। 1949 में बनी फ़िल्म अंदाज़ की सफलता ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई, इस फ़िल्म में उन्होंने स्वर्गीय राज कपूर के साथ काम किया। दीदार (1951) और देवदास (1955) जैसी फिल्मों में दुखद भूमिकाओं के मशहूर होने के कारण उन्हें ट्रेजिडी किंग कहा गया। मुगल-ए-आज़म (1960) में उन्होंने मुग़ल राजकुमार जहांगीर की भूमिका निभाई। वे आज भी अभिनेताओं के प्रेरणास्रोत्र है।
■ भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

दिनांक 06.07.2021




■ आदरणीय डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें नमन करता हूं ।
■ डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी शिक्षाविद्, चिन्तक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे । 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता के अत्यन्त प्रतिष्ठित परिवार में स्व0 मुखर्जी जी का जन्म हुआ । वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । उन्होंने अल्प आयु में ही विद्या-अध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित कीं । 33 वर्ष की आयु में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने । एक विचारक तथा प्रखर शिक्षाविद् के रूप में उनकी उपलब्धि तथा ख्याति निरंतर आगे बढ़ती गयी ।
■ डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया । वे सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धांतवादी थे । उन्होंने बहुत से गैर कांग्रेसी की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबंधन का निर्माण किया । इस सरकार में वे वित्तमंत्री बने । इसी समय स्व0 वी0डी0 सावरकर जी के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए ।
■ मुस्लिम लीग की राजनीति से बंगाल का वातावरण अशांत हो रहा था । वहां सांप्रदायिक विभाजन की नौबत आ गयी एवं ब्रिटिश सरकार भी सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही थी । ऐसी विषम परिस्थितियों में अपनी विशिष्ट रणनीति से उन्होंने बंगाल के विभाजन के मुस्लिम लीग के प्रयासों को नाकाम कर दिया ।
■ डाॅ0 मुखर्जी का मानना था कि सभी भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि से समान हैं । एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है ।
■ महात्मा गांधी एवं सरदार पटेल के अनुरोध पर वे भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में शामिल हुए । उन्हें उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेवारी मिली । संविधान सभा और प्रांतीय संसद के सदस्य और केन्द्रीय मंत्री के नाते उन्होंने शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान बना लिया । राष्ट्रीय हितों की प्रतिबद्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानने के कारण उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया । कश्मीर को एक संविधान के अंतर्गत लाने के लिये उन्होंने अपना बलिदान दे दिया । उनका नारा था:
■ एक राष्ट्र, एक विधान ।
■ एक प्रधान, एक निशान ।।
■ आदरणीय स्वर्गीय डॉक्टर मुखर्जी के इस सपने को 21वीं सदी में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पूरा किया और डॉक्टर मुखर्जी का यह नारा आज कामयाब हो गया ।

********




■ आदरणीय दलाई लामा के जन्म दिवस पर मैं उन्हें नमन करता हूँ ।
■ आदरणीय दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष और आध्यात्मिक गुरू हैं । उनका जन्म 6 जुलाई 1935 को उत्तर-पूर्वी तिब्बत के ताकस्तेर क्षेत्र में रहने वाले ओमान परिवार में हुआ था । दलाई लामा एक मंगोलियाई पदवी है जिसका अर्थ है ज्ञान का महासागर ।
■ आदरणीय दलाई लामा के वंशज, अवलोकेतेश्वर के बुद्ध के गुणों के साक्षात रूप माने जाते हैं एवं मान्यता है कि मानवता की रक्षा के लिए इनका पुनर्जन्म हुआ है । आदरणीय दलाई लामा ने तिब्बत के लिए एक लोकतांत्रिक संविधान का प्रारूप प्रस्तुत किया ।
■ तिब्बत में शांति बहाल करने हेतु उन्होंने शांति योजना प्रस्तुत की । उन्होंने विचार रखा कि तिब्बत को एशिया के हृदय स्थल में स्थित एक शांति क्षेत्र में बदला जा सकता है ।
■ आदरणीय दलाई लामा के द्वारा तिब्बत मुक्ति के लिए अहिंसक संघर्ष जारी रखने हेतु 1989 को नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया । उनका मानना है कि शांति, अहिंसा और हर सचेतन प्राणी के कल्याण हेतु कार्य करना बुनियादी सिद्धान्त है ।

दिनांक 01.07.2021

■ आज डॉक्टर्स डे पर मैं सभी चिकित्सकों, जो धरती के लिए भगवान समान हैं, को शुभकामनाएं देता हूं। कोरोना के इस भीषण दौर में जिस त्याग, तपस्या, निष्ठा और समर्पण से चिकित्सकों ने पीड़ितों की सेवा की है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।
■ नेशनल डॉक्टर्स डे डॉक्टर बी. सी. राय के चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उनकी जन्मतिथि पर 1जुलाई को मनाया जाता है।

दिनांक 26.06.2021

■ नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। यह नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध नशीली दवाओं के व्यापार के खिलाफ एक संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस है। यह 1989 से 26 जून को प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
■ आइये इस दिवस पर नशा मुक्त समाज बनाने का संकल्प लें।

********

■ भारत में किसान आंदोलन के जनक, महान समाज-सुधारक, प्रकांड विद्वान, इतिहासकार और शंकराचार्य सम्प्रदाय के दसनामी संन्यासी अखाड़े के दण्डी संन्यासी स्वामी सहजानंद सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन ।

दिनांक 24.06.2021

■ दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करे तो दुःख काहे को होय॥
■ ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय । औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय ।।
■ दुर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय । मरी खाल की सांस से, लोह भसम हो जाय ।।
■ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोई ।।
■ ऐसे कालजयी दोहों और कविताओं के रचयिता कवि व समाज सुधारक, ज्ञानाश्रयी और निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक महान संत कबीरदास जी की जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूं। ।
■ कबीरदास ऐसे सरल और दृढ़निश्चयी थे कि समाज का कोई भी रंग कबीर पर नहीं चढ़ पाया । जीवन जीने और जीवन के उद्देश्य को पहचानने का प्रतिरूप हैं कबीर । कबीर का उद्देश्य किसी का विरोध करना मात्र नहीं था बल्कि उनका व्यक्तित्व एक दर्शन था। उन्होंने हर कुरीति, आडंबर और मानव के पतन के कारणों का विरोध किया तथा मानव जीवन के लिए जो सर्वोत्तम और एकमात्र सही रास्ता है, सदाचार, उसके बारे में बताया ।

दिनांक 23.06.2021

■ ओलंपिक दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं।
■ ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने और इस आयोजन के दौरान आयोजित खेलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 23 जून को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाया जाता है।
■ मेरी शुभकामना है कि भारत के खिलाड़ी ओलंपिक में देश का नाम रौशन करें ।

दिनांक 21.06.2021

■ 7वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मैं सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ और योग से जुड़ने के लिए आह्वान करता हूँ ।
■ 27 सितंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी ने योग को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया जिसे 11 दिसंबर, 2014 को स्वीकार करते हुए 21जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया ।
■ योग किसी धर्म, किसी संप्रदाय की निजी वस्तु नहीं बल्कि यह मानव के लिए सबसे उपयोगी क्रियाओं में से एक है । प्रधानमंत्रीजी ने योग को विश्व स्वीकार्य बनाने के लिए कहा था "स्वास्थ्य और कल्याण के लिए योग सार्वभौमिक आकांक्षा का प्रतीक है । यह शून्य बजट में स्वास्थ्य बीमा, शरीर एवं आत्मा के सहज एकीकरण का विज्ञान, मानवता के लिए सद्भाव और शांति प्रकट करता है । यह स्वयं के लिए और स्वास्थ्य के लिए यात्रा है ।"
■ आज जब पूरी दुनिया कोविड-19 जैसी महामारी से जूझ रही है ऐसी परिस्थिति में योग और भी प्रासंगिक हो जाता है । योग ही एक ऐसा साधन है जो बिना किसी खर्च के अपने शरीर को कोविड-19 जैसी महामारी से लड़कर विजय प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है ।

दिनांक 20.06.2021

■ पितृ देवो भवः । भारत में यह मूल मंत्र है पिता को सम्मान देने के लिए । फादर्स डे मनाए जाने की परंपरा यूरोप में शुरू हुई और अब भारत में भी जोर शोर से मनाया जा रहा है । यह दिवस पिता को सम्मान देकर उनके साथ अपने संबंध को मजबूत करने के लिए मनाया जाता है ।
■ फादर्स डे पर मैं युवाओं से आह्वान करता हूं कि वह पिता को सम्मान देने की भारत की स्वस्थ परंपरा को आगे बढ़ाएं और इसी आह्वान के साथ मैं फादर्स डे पर सभी पिताओं को शुभकामना देता हूं।

दिनांक 19.06.2021

■ आज वर्ल्ड एथनिक डे है। इस दिन के मनाने का आधार है अपनी संस्कृति के दायरे में डूबने और जीवन भर के अनुभवों का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करना।विभिन्न सांस्कृतिक, अनुवांशिक, भाषाई और सामाजिक विविधता के साथ दुनिया में यह मानव जीवन यात्रा चलती है । सोशल मीडिया और डिजिटलीकरण के युग ने हम सभी को एक-दूसरे की संस्कृतियों का अनुभव करने का अवसर दिया है ।

दिनांक 18.06.2021

■ महान वीरांगना, अप्रतिम शौर्य की प्रतिमूर्ति, मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति देने वाली, नारी शक्ति एवं वीरता की प्रतीक महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

********

■ बिहार विभूति, शिक्षक, वकील, चंपारण सत्याग्रह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी राजनीतिज्ञ तथा बिहार के पहले उप मुख्यमंत्री अनुग्रह नारायण सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन ।

दिनांक 15.06.2021

■ आज विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस है । यह इसलिए मनाया जाता है ताकि लोगों को जागरूक कर बुजुर्गों के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया जा सके । मैं आह्वान करता हूँ कि आइये, सभी वृद्धजनों के साथ हम सम्मानपूर्ण व्यवहार करें ।

दिनांक 14.06.2021

■ आज विश्व रक्तदान दिवस है। आईए इस अवसर पर हम सभी रक्तदान जैसे पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें एवं लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित और जागरूक करने का संकल्प लें ।
■ रक्तदान महादान ।

दिनांक 12.06.2021

■ आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस है । इस अवसर पर मैं आह्वान करता हूँ कि हमलोग संकल्प लें कि बाल श्रम न करायेंगे और न ही उसे प्रोत्साहन देंगे ।
■ बालक किसी भी देश का भविष्य होता है । उसकी पढ़ाई-लिखाई, उसकी देखभाल आदि उसके मौलिक अधिकार हैं लेकिन बाल श्रम के रूप में उसके मौलिक अधिकारों का हनन कर हम उसे प्रदत्त अधिकारों से वंचित कर अन्य कामों में लगा देते हैं ।
■ विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की शुरूआत 2002 में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ ने की थी । इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है ।

दिनांक 09.06.2021

■ आदिवासियों की संस्कृति, अधिकार एवं स्वाभिमान की रक्षा तथा गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक उठ खड़े होने वाले बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए श्रृद्धांजलि अर्पित करता हूं। बिरसा मुंडाजी का संघर्ष सदा अमर स्मृति बनकर रहेगा।

दिनांक 08.06.2021

■ आज विश्व महासागर दिवस है । इस दिवस पर हम लोग महासागर के प्रति जागरूक होने के लिए संकल्प लें । महासागर हमारे पृथ्वी पर जीवन का प्रतीक है । पर्यावरण संतुलन में यह प्रमुख भूमिका अदा करता है । अगर महासागर नहीं हो तो न बादल बने, न ही बारिश हो और बारिश बंद होने से धरती पर मानव जीवन नष्ट हो जायेगा ।
■ पहला विश्व महासागर दिवस 8 जून, 2009 को मनाया गया था जिसे 2008 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी । महासागर दिवस का उद्देश्य महासागरों के महत्व और उनकी वजह से आने वाली चुनौतियों के प्रति विश्व में जागरूकता पैदा करना है ।

दिनांक 05.06.2021

विश्व पर्यावरण दिवस
■ आज विश्व पर्यावरण दिवस है । पर्यावरण की रक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है । 1972 में पर्यावरण पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन स्टॉकहोम में हुआ था । इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम निर्धारित करने एवं 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया ।
■ वर्ष 2021 के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली है जो कई रूपों में हो सकती है जैसे पेड़ लगाना, शहर को हरा-भरा करना, नदियों एवं तटों की सफाई इत्यादि । कोविड- 19 महामारी ने जिस तरह से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है उसके मूल में कहीं न कहीं पर्यावरण भी है । यदि हरे-भरे ऑक्सीजन दायक पेड़ होते तो साफ आकाश, शुद्ध हवा और पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन लोगों को मिलता जिससे कोरोना का दुष्प्रभाव कम होता । संपूर्ण मानव जीवन प्रकृति पर ही निर्भर है । प्रकृति को बचाये रखने हेतु हम सबको को संकल्प लेने की जरूरत है अन्यथा प्रकृति के कोपभाजन हम लोग होंगे और उस स्थिति में हमारी मानव जाति संकट में आ जायेगी ।

********

स्वर्गीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकरजी
■ आज स्वर्गीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकरजी की पुण्यतिथि है । उनकी विद्वत्ता और अध्यापन कार्य के कारण उन्हें गुरु गोलवलकर के नाम से ज्यादा जाना जाता है।स्व॰ गोलवलकरजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक थे । गुरु गोलवलकरजी अत्यंत मेधावी थे । विश्वविद्यालय में बिताये चार वर्षों के कालखंड में उन्होंने संस्कृत महाकाव्य, पाश्चात्य दर्शन, श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद के विचारों को तथा भिन्न-भिन्न उपासना ग्रंथों, शास्त्रों का आस्थापूर्वक अध्ययन किया जिसके कारण उनकी रुचि आध्यात्मिक जीवन की ओर जागृत हुई । 1946 में देश विभाजन के निर्णय के खिलाफ डटकर खड़ा होने के लिए वे जनता से आह्वान करते रहे । उनका प्रेरणादायक कथन है :
■ "मेरा रूझान राष्ट्र संगठन कार्य की ओर प्रारंभ से है । यह कार्य संघ में रहकर अधिक परिणामकारिता से मैं कर सकूँगा । इसलिए मैंने संघ के कार्य में ही स्वयं को समर्पित कर दिया । मुझे लगता है कि स्वामी विवेकानंद के तत्वज्ञान और कार्यपद्धति से मेरा यह आचरण सर्वथा सुसंगत है ।"

********

आज संपूर्ण क्रांति दिवस है । 5 जून 1974 को स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण जी द्वारा संपूर्ण क्रांति का नारा और विचार दिया गया था । उन्होंने तत्कालीन जनविरोधी सरकार की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए इस नारे के माध्यम से लोगों का आह्वान किया था ।
■ लोकनायक स्वर्गीय जय प्रकाश नारायण जी ने कहा था :
■ "संपूर्ण क्रांति से मेरा तात्पर्य समाज के सबसे अधिक दबे कुचले व्यक्ति को सत्ता के शिखर पर देखना है ।"
■ 5 जून के विशाल प्रदर्शन को देख कर ऐसा लगता था जैसे पूरा बिहार खड़ा हो गया हो । स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण के इस संपूर्ण क्रांति के नारे ने जनता में अभूतपूर्व साहस भर दिया यह संघर्ष सत्ता बनाम आम जनता का हो गया था ।
■ संपूर्ण क्रांति दिवस के अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 04.06.2021

■ आज अंतर्राष्ट्रीय अबोध बालक दिवस है। समाज में बच्चों के प्रति हिंसा एवं अन्याय को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष 4 जून को विशेष तौर पर मासूम बच्चों को हिंसा से बचाने के लिए International day of innocent children victims of aggression घोषित किया । यह कदम संयुक्त राष्ट्र ने फिलीस्तीन और लेबनान युद्ध में बच्चों की मौत के बाद उठाया । संयुक्त राष्ट्र का मानना था कि यह केवल दो देशों की बात नहीं विश्व के हरेक घर मुहल्ले में अबोध बच्चे किसी न किसी तरह की हिंसा के शिकार हैं ।
■ आईए, अंतरराष्ट्रीय अबोध बालक दिवस पर हम सब संकल्प लें कि बच्चों के भविष्य की रक्षा करेंगे और उन्हें हिंसा से बचाने के लिए भरपूर प्रयास करेंगे ।

दिनांक 03.06.2021

■ आज विश्व साइकिल दिवस पर मैं पर्यावरण के संरक्षक के तौर पर साइकिल चलाने वाले लोगों को बधाई देता हूं।
■ अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 3 जून को अंतरराष्ट्रीय विश्व साइकिल दिवस घोषित किया गया। विश्व साइकिल दिवस का संकल्प साइकिल की विशेषता के कारण लिया गया। साइकिल के उपयोग से जहां पर्यावरण संरक्षित होता है वहीं लोग स्वस्थ और दीर्घायु होते हैं। साईकिल दो शताब्दियों से उपयोग में है और यह परिवहन का एक सरल एवं विश्वसनीय साधन है।

दिनांक 31.05.2021

■ तंबाकू सेवन से विश्व में 50 लाख लोगों की और भारत में 14 लाख लोगों की मृत्यु हर वर्ष होती है। तंबाकू से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। तंबाकू का सेवन बिहार में 25% लोग करते हैं। कैंसर से होनेवाली कुल मौतों में से 40% की मौत तंबाकूजनित कैंसर से होती है। आज अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस है। आईए, इस अवसर पर बिहार को तंबाकू मुक्त बनाने का हमलोग संकल्प लें।

दिनांक 30.05.2021

■ हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर मैं हिंदी पत्रकारिता से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन करते हुए उन्हें शुभकामना देता हूं
■ हिंदी पत्रकारिता का प्रारंभ 1826 में एक साप्ताहिक पत्र "उदंत मार्तंड" के रूप में प्रारंभ हुआ । इसके संपादक पंडित जुगल किशोर थे। पत्र की भाषा को संपादकों ने मध्यदेशीय भाषा कहा । यह पत्र सरकारी सहयोग के अभाव में अगले ही वर्ष बंद हो गया । कंपनी सरकार ने मिशनरियों के पत्र को डाक आदि की सुविधा दे रखी थी परंतु काफी प्रयास करने पर भी उदंत मार्तंड को यह सुविधा नहीं दी गई ।
■ हिंदी पत्रकारिता का दूसरा युग 1873 से 1900 तक चला । इस दौर में एक किनारे पर भारतेंदु हरिश्चंद्र पत्रिका थी और दूसरे किनारे पर सरस्वती । इन 27 वर्षों में प्रकाशित पत्रों की संख्या 300 से 350 तक हो गई इनमें से अधिकांश पत्र मासिक थे या साप्ताहिक।
■ आज हिंदी की पत्र, पत्रिकाएं और पत्रकारिता स्थापित हो चुकी है तथा किसी भी अन्य भाषा से कमतर नहीं है।

दिनांक 29.05.2021

■ स्वंतत्रता सेनानी, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और महान् किसान नेता स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें सादर नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

दिनांक 28.05.2021

■ आज श्रद्धेय विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती के अवसर पर उन्हें सादर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ विनायक दामोदर सावरकरजी जो सामान्यतः वीर सावरकर के नाम से जाने जाते हैं उन्होंने हिंदुत्व के राष्ट्रीय दर्शन को स्थापित किया । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भागीदारी अतुलनीय है । उन्हें मारने के लिए अंग्रेजों ने काला पानी की सजा दी और अंडमान में काल कोठरी में बंद करके रखा । उन्हें वहां जितनी यातनाएं दी गईं उसे बर्दाश्त करना किसी सामान्य मानव के लिए संभव नहीं है । उनके प्रति जितनी श्रद्धा की जाए वह कम है ।
■ वीर सावरकर बाल्यावस्था से ही प्रखर बुद्धि के थे । चाफेकर बंधुओं को जब ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा दी तो यह बालक बेचैन हो गया और 14 वर्ष की अवस्था का वह सुकुमार बालक देवी को साक्षी मानकर शपथ ले बैठा कि मैं क्रांति करके भारत को स्वतंत्रता दिलाउंगा ।
■ सन 1857 में जो स्वतंत्रता की पहली क्रांति हुई थी उसे ब्रिटिश सरकार ने सिपाही विद्रोह नाम दे दिया ताकि वह आगे नहीं फैले लेकिन मेधावी सावरकर ने तर्क और वास्तविक तथ्यों के आधार पर The Indian War of Independence 1857 नामक ऐसी पुस्तक तैयार की जिसने साबित कर दिया कि वह स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रथम आंदोलन था।
■ मैं उन महान् विभूति वीर सावरकर को पुनः नमन करता हूं ।

दिनांक 26.05.2021

■ बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
■ वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था । इसी दिन वे गौतम से गौतम बुद्ध हुए।
■ गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म विकसित किया जिसकी मूल अवधारणा है कि जन्म मरण का चक्र ही सारे दुखों की जड़ है और इस चक्र का मूल कारण तीन हैं मोह, राग और द्वेष अर्थात् भ्रम, लालच और जलन । इन्हीं तीनों पर नियंत्रण के लिए गौतम बुद्ध ने लोगों को उपदेश दिया और बताया कि कैसे पुनर्जन्म के चक्र से मनुष्य बचेगा ।
■ यही मूल अवधारणा सनातन धर्म की भी है कि जन्म मरण के चक्र से बचने के लिए अपनी आत्मा को जानो और सभी को समान जानो किसी से लोभ,मोह, द्वेष न करो और सदाचार को सर्वोच्च मानो । इसीलिए गौतम बुद्ध को हिंदू विष्णु भगवान के दशावतारों में से एक मानते हैं।
■ भगवान बुद्ध ने प्रेम, सत्य, अहिंसा, करूणा, सदाचार और भाईचारा का जो संदेश दिया वह आज भी हमारी प्रेरणा है ।

दिनांक 25.05.2021

■ आज नृसिंह जयंती के शुभ अवसर पर मैं सभी को बधाई देता हूं।
■ हिरण्यकशिपु नामक दैत्य ने ऐसा अद्भुत वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसका वध न दिन में न रात में, न घर के अंदर न घर के बाहर, न जल में, न आकाश में न धरती पर, न पाताल में, न किसी शस्त्र से, न मनुष्य से, न देवता से, न असुर से, न किसी जानवर से मारा जा सकेगा लेकिन भगवान विष्णु ने चौथा अवतार नृसिंह के रूप में लेकर हिरण्यकशिपु का वध करके यह सन्देश दिया कि बुराई में चाहे जितनी भी ताकत हो अच्छाई के हाथों उसकी मौत होना सुनिश्चित है।

दिनांक 22.05.2021

■ सती प्रथा जैसे समाजिक कोढ़ को समाप्त करने वाले समाज सुधारक राजा राममोहन रायजी की जयंती पर मैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
■ राजा राममोहन रायजी ब्रह्म समाज, आत्मीय सभा, प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी, साधारण ब्रह्म समाज और हिंदू स्कूल के संस्थापक थे । उनके जैसे समाज सुधारक विरले ही पैदा होते हैं।
■ राजा राममोहन रायजी को राजा की पदवी मुगल सम्राट अकबर-II द्वारा दी गई थी । राजा राममोहन राय को बहुत सारे इतिहासकारों ने बंगाल के नवयुग का पिता घोषित किया है।

दिनांक 20.05.2021

■ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की अर्द्धांगिनी जनकनंदिनी मां सीता के जन्मोत्सव जानकी नवमी के पावन अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं।
■ मां सीता ने जिस उत्तम चरित्र का उदाहरण जगत में प्रस्तुत किया वह अनुपम और अनुकरणीय है। भगवान श्रीराम के लिए उनमें जो सेवा भाव तथा प्रेम था वह आज भी अमर और प्रेरणादायक है ।
■ मां जानकी सम्पूर्ण जगत की जननी हैं । उन्हें मैं सादर नमन करता हूं ।

दिनांक 17.05.2021

■ अल्प आयु में ही भारत के चारों कोणों पर भगवान विष्णु के विभिन्न रूपोंवाले पीठ के संस्थापक, प्रकांड विद्वान, उपनिषदों के भाष्यकार,सनातन धर्मरक्षक, संन्यासी आदिगुरू शंकराचार्य जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन करता हूं ।

********

■ हिंदी साहित्य में भक्ति संबंधी कविताओं के अनुपम रचनाकार, जिनकी कविताएं हमें भगवान श्रीकृष्ण के सानिध्य का एहसास कराती हैं, भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त,भक्त शिरोमणि महाकवि सूरदास को उनकी जयंती पर सादर प्रणाम करता हूँ।

दिनांक 14.05.2021

■ मैं सभी मुस्लिम भाइयों को ईद उल फित्र की शुभकामनाएं देता हूं।
■ ईद उल फित्र की शुरुआत मोहम्मद साहब द्वारा की गई । कई मान्यताओं के अनुसार जब मोहम्मद साहब मक्का से मदीना स्थानांतरित हुए तब उन्होंने वहां इसकी शुरुआत की ।

********

■ तेज के पुंज, पुरुषार्थ के प्रतीक, अन्याय के घोर वैरी तथा विष्णु भगवान के दशावतारों में से छठे अवतार भगवान श्री परशुरामजी की जयंती पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं ।
■ कहा जाता है कि वे भगवान विष्णु के आवेशावतार हैं ।
■ पितामह भृगु द्वारा नामकरण राम किए जाने और शिवजी द्वारा प्रदत्त दिव्य परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये।
■ परशुराम जी का तेज, शौर्य और धनुर्विद्या की महानता इसी से प्रकट होती है कि वे भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों के गुरु थे।

दिनांक 12.05.2021

■ महर्षि पराशर मन्त्रद्रष्टा ऋषि, शास्त्रवेत्ता, ब्रह्मज्ञानी थे। येे महर्षि वसिष्ठ के पौत्र और व्यासजी के पिता हैं। कहा जाता है कि प्राचीन विष्णु पुराण पराशर जी ने ही लिखा था । ये गोत्रप्रवर्तक भी थे।
■ महर्षि पराशर की जयंती पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं।

********

■ अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस पर 12 मई को मनाया जाता है। नर्स का एक शाब्दिक अर्थ यह भी होता है "किसी व्यक्ति या वस्तु को प्यार से हाथों या गोद में लेना।" नर्सों का काम है अपनी सेवा से मरीजों को जीवन दान देना । नर्सेज जिस तरह से मरीजों की देखभाल करती हैं उतनी सेवा सुश्रुषा तो मरीजों के अपने परिजन भी शायद नहीं कर पाते । अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस पर मैं सभी नर्सेज को बधाई देता हूं और उनकी सेवा को सलाम करता हूं।

दिनांक 09.05.2021

■ आज मैं मदर्स डे की शुभकामनाएं देता हूं।
■ यह दिन मां और मातृत्व को सम्मान देने के लिए यूरोप और अमेरिका में प्रारंभ हुआ और आज हमारे यहां भी प्रचलित हो गया ।
■ भारतवर्ष में तो मां को जीवनदायिनी कहा गया है । इसीलिए हमारे यहां जो भी जीवन में सहयोग देती है सभी को मां पुकार कर चरम सम्मान दिया गया है जैसे गाय को दूध देने के कारण गो माता कहा जाता है, नदी को जल देने के कारण माता कहा जाता है और धरती जो अपनी छाती चीर कर हमें अन्न प्रदान करती है उसे धरती माता कहा जाता है । मां है तो सृष्टि है, मां नहीं तो सृष्टि नहीं । मां सर्वोपरि है । हिंदुओं में धन, विद्या शक्ति सभी की अधिष्ठात्री मां ही कही जाती हैं । भारतवर्ष में सब दिन मां को पूजने की परंपरा है वह चाहे जिस रूप में भी हो ।

दिनांक 08.05.2021

■ वर्ल्ड रेड क्रॉस डे पर मैं शुभकामनाएं देता हूं ।
■ इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमिटी के संस्थापक हेनरी डुना की जन्म तिथि 8 मई को वर्ल्ड रेड क्रॉस डे के रूप में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है ।
■ 8 मई 1948 से शुरू हुआ यह सफर 73 वर्षों से लगातार जारी है । यह ऐसी संस्था है जो विश्व के किसी भी कोने में आई किसी भी आपदा की घड़ी में सक्रिय हो जाती है । इसके सम्मेलनों में जो विचार विमर्श होता है वह बहुत ही सार्थक होता है और मानवता ही उसका आधार होती है। 2009 में जो विमर्श हुआ उसका विषय था Change in climate. 2013 के सम्मेलन का विषय था Be together for the reason of humanity. 2014 में विषय था Get together for everyone people और 2015 में चर्चा का विषय था Together for humanity .
■ Red cross society मनुष्य जाति की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहती है।

दिनांक 07.05.2021

■ आज सगुण धारा की कृष्ण भक्ति शाखा के आधार स्तंभ स्व० वल्लभाचार्य जी की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें नमन करता हूं।
■ वल्लभाचार्यजी के अनुसार ब्रह्म के तीन स्वरूप हैं अधिदैविक, आध्यात्मिक एवं अंतर्यामी रूप । लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण को ही परब्रह्म स्वीकारते हुए उनके रूप और लीलाओं को ही उन्होंने जगत में आनंद का स्रोत माना गया । उनके मतानुसार जगत ब्रह्म की लीला का विलास है संपूर्ण सृष्टि लीला के निमित्त ब्रह्म की कृति है ।
■ मैं एक बार फिर वल्लभाचार्यजी को सादर प्रणाम करता हूं ।
■ आज स्वर्गीय रवींद्रनाथ टैगोर की भी जयंती है । मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ स्व० टैगोर एशिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। उन्हें गीतांजलि लिखने के लिए नोबेल साहित्य पुरस्कार दिया गया । स्वर्गीय टैगोर लेखक, कवि के साथ साथ दार्शनिक थे । वे भारतीय संस्कृति की चेतना में बंगला साहित्य के माध्यम से जान फूंकने वाले माने जाते हैं ।
■ वे एकमात्र ऐसे कवि थे जिन्होंने दो देशों को राष्ट्रगान दिया, भारत को जन गण मन और बंगलादेश को आमार सोनार बांगला ।
■ स्वर्गीय रवींद्र नाथ टैगोर को उनकी विद्वत्ता और उनके प्रति श्रद्धा के कारण गुरुदेव के नाम से भी पुकारा जाता है ।
■ बंगला साहित्य में बोलचाल की भाषा का नवीन प्रयोग कर उन्होंने बंगला साहित्य को अभिजात्य के प्रभाव से मुक्त किया ।

दिनांक 03.05.2021

■ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर मैं सभी प्रेस मीडिया के बंधुओं को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ संयुक्त राष्ट्र संघ ने 3 मई की तारीख को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस घोषित किया । संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा यह कदम प्रेस के प्रति सरकारों के कर्तव्य को याद कराने के लिए उठाया गया । यूनेस्को प्रेस मीडिया के लोगों का प्रत्येक वर्ष कांफ्रेंस आयोजित करता है जिसमें अन्य विषयों के साथ साथ चर्चा का मुख्य विषय होता है प्रेस की स्वतंत्रता की विश्व में स्थिति ।
■ प्रेस भारत में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है इसलिए उसकी स्वतंत्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र मीडिया सरकारों का पथ प्रदर्शन करने का काम करती है ।

दिनांक 01.05.2021

■ आज विश्व श्रम दिवस पर मैं सभी कर्मयोगी श्रमिक भाइयों को शुभकामनाएं देता हूं।
■ श्रम को सम्मान देने की बहुत ही स्वस्थ परंपरा हमारे देश में, हमारे धर्म में रही है । श्रमिक आंदोलन जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चले उसी के परिणामस्वरुप एक दिन के 24 घंटों को तीन भागों में बांटा गया और 8 घंटे काम के, 8 घंटे मनोरंजन के तथा 8 घंटे विश्राम के निर्धारित किए गए । आज का दिन श्रमिकों के लिए जश्न का दिन होता है । हर आदमी के अंदर एक श्रमिक होता है। श्रम के बिना इस देश और समाज का विकास नहीं हो सकता ।श्रमिक ही विकास की बुनियाद होते हैं । इसलिए "श्रमिक का सम्मान, राष्ट्र का उत्थान" है । श्रमिक कर्मयोगी हैं।
■ मैं प्रदेश और देश के सभी कर्मवीरों, कर्मयोगियों का अभिनंदन करता हूं, उनके श्रम को नमन करता हूं ।

दिनांक 27.04.2021

■ हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ हनुमानजी असीमित शक्तिशाली और ज्ञान के भंडार हैं । वे संकट मोचन हैं । लोग किसी भी भय के अवसर पर हनुमानजी को याद करते हैं जिससे उन्हें आत्मिक बल प्राप्त होता है ।
■ कोरोना काल के भीषण संकट से हनुमानजी ही पार लगायेंगे -
■ ‘‘नासै रोग हरै सब पीड़ा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ।’’
■ कोरोना जैसी महामारी भी भाग जायेगी यदि हनुमानजी हमें सम्बल देंगे, आत्मविश्वास देंगे ।
■ मैं सभी के लिये प्रार्थना करता हूं कि संकट मोचन हनुमानजी सभी को आरोग्य प्रदान करें तथा मानवता पर छाये सबसे बड़े संकट कोरोना से हम सबकी रक्षा करें ।

दिनांक 25.04.2021

■ जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पर मैं सभी जैन धर्मावलंबी बंधुओं को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ भारत में जो सर्व धर्म समभाव है उसी का यह प्रभाव है कि इस देश में दुनिया के सभी धर्मावलंबी रहते हैं और स्वतंत्र एवम् निर्भीक वातावरण में अपने अपने धर्म का पालन करते हैं।
■ यह बिहार का सौभाग्य है कि यहां 24 वें तीर्थंकर ने जन्म लिया । भगवान महावीर का जन्म चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी को हुआ था।
■ जैन धर्म की मूल अवधारणा अहिंसा है और सनातन धर्म की भी मूल अवधारणा अहिंसा ही है।
■ मैं फिर एक बार महावीर जयंती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 24.04.2021

■ बिहार के सिमरिया में 23 सितंबर 1908 को जन्म लेने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की आज 24 अप्रैल को पुण्यतिथि है । मैं उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं ।
■ दिनकरजी क्रांतिकारी और वीर रस से भरी कविताओं द्वारा लोगों में जोश का जो वातावरण तैयार करते थे वह किसी से छुपा नहीं है । उनके वीर रस की कविताएं लोगों को क्रांति के लिए जोश से भर देती थीं । शुरू में दिनकरजी क्रांतिकारियों के पक्ष में रहे परंतु बाद में उन्होंने गांधीवाद को स्वीकार किया परंतु उनका यह भी मानना था कि युद्ध विनाशकारी है परंतु स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए युद्ध अपरिहार्य है।
■ चीन से मिली हार के बाद जहां देश का मनोबल टूटा हुआ था दिनकर जी ने संसद में हुंकार भरते हुए सरकार और आम जनता का आह्वान किया था :
■ "रे रोक युधिष्ठिर को न यहां, जाने दे उनको स्वर्ग धीर ।
■ पर फिरा हमें गांडीव गदा, लौटा दे अर्जुन भीम वीर ।।"
■ इमर्जेंसी के विरुद्ध स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण द्वारा दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में दिनकर जी की कविता को ही उद्धृत किया गया
■ "सिहासन खाली करो कि जनता आती है " ।
■ इस नारे के साथ जयप्रकाश नारायण जी ने जो आंदोलन शुरू किया उसने कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंका ।
■ मैं एक बार फिर कालजयी कविताओं के रचनाकार महान् कवि दिनकर जी को नमन करता हूं ।

दिनांक 21.04.2021

सियाराम मय सब जग जानी ।
करहुं प्रणाम जोरी जुग पानी ।।
■ प्रभु श्रीराम और मां सीता पूरे जगत में व्याप्त हैं । सियाराम के चरणों में वंदना करते हुए मैं श्रीराम की जन्म तिथि रामनवमी के शुभ अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देता हूँ ।
■श्रीराम मर्यादा और आदर्श के साकार स्वरूप हैं । श्रीराम ने मर्यादा का जो उदाहरण समाज को दिया वह युगों के परिवर्तन के बावजूद आज भी सबों के लिए अनुकरणीय है । वे पिता की इच्छा को ही आदेश मानकर राजसत्ता को मिट्टी के ढेले के समान त्याग कर वन को चले गये । किष्किंधा और लंका पर विजय प्राप्त कर लेने के बावजूद उन्होंने वहाँ का राजा बनना स्वीकार नहीं किया बल्कि दोनों राज्यों को अपने मित्रों सुग्रीव और विभीषण के सुपुर्द कर दिया ।
■ राजा की मर्यादा के लिए उन्होंने लोकापवाद को ध्यान में रखते हुए माँ जानकी तक को वन में भेज दिया । यहाँ तक कि अपने वचन की मर्यादा का पालन करने के लिए उन्होंने अपने परमप्रिय भाई लक्ष्मण को मृत्युदंड दे दिया ।
■ भगवान श्रीराम के चरणों में सबके लिए स्थान रहा वह चाहे पशु-पक्षी हो, राक्षस हो या नगरवासी-वनवासी मानव की कोई भी जाति हो । भगवान श्रीराम के चरित्र को जिसने भी सुना उसने उन्हें अपना आदर्श पाया । इसीलिए हजारों वर्ष बीत जाने के बावजूद मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम आज भी हमारे आदर्श हैं। श्रीराम की कथा रामायण सामाजिक और पारिवारिक जिंदगी के लिए आदर्श संबंधी ग्रंथों में सबसे ऊपर है ।
■कलियुग में श्रीराम का नाम ही भवसागर पार कराने वाला है ।
नामु राम को कल्पतरू कलि कल्याण निवासु ।
जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु ।।
■कलियुग में श्रीराम का नाम कल्पतरू और कल्याण कराने वाला है जिसके स्मरण करने से भाँग-सा का निकृष्ट तुलसीदास तुलसी के समान पवित्र हो गया ।
■ राम नाम मनिदीप धरू जीह देहरीं द्वार ।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर ।।
■ तुलसीदासजी कहते हैं यदि तू भीतर और बाहर दोनों ओर उजाला चाहता है तो मुखरूपी द्वार की जीभरूपी देहली पर रामनामरूपी मणि-दीपक को रख ।
■ प्रभु श्रीराम के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए उनके नाम का जप करते रहें ।
■आज मां सिद्धिदात्री की आराधना का भी दिन है । मैं प्रभु श्रीराम और मां सिद्धिदात्री से मानव जाति पर आए कोरोना महामारी जैसे संकट को दूर करने हेतु प्रार्थना करता हूं और एक बार फिर सभी को रामनवमी तथा नवरात्र की शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 19.04.2021

■ जनता दल (यू ) के प्रत्याशी के रुप में 2015 और 2020 में तारापुर विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित माननीय सदस्य, श्री मेवालाल चौधरी जी का निधन 19.4.21 को हो गया । मैं इसे सुनकर अवाक हूं। काल ने असमय ही एक विद्वान और समाज को कुछ दे सकने योग्य व्यक्ति को समाज से छीन लिया जिसकी भरपाई कतई नहीं हो पाएगी ।
■ श्री मेवालाल चौधरी अत्यंत लोकप्रिय होने के साथ साथ उद्यान विधा के बहुत ही अच्छे जानकार थे। वे भारत सरकार में हॉर्टिकल्चर कमिश्नर, राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय,पूसा, समस्तीपुर और बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति रहे।
■ मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को वे चिर शांति प्रदान करें।

दिनांक 14.04.2021

■ आज 14 अप्रैल को डाॅ॰ भीम राव अम्बेदकर या बाबा साहब अम्बेदकर की जन्मतिथि के अवसर पर मैं उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं ।
■ बाबा साहब अम्बेदकर एक भारतीय न्यायविद्, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे जिन्होंने दलित आंदोलन को प्रेरित किया और अस्पृश्यता(दलितों) तथा सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाया ।
■ बाबा साहब अम्बेदकर की विद्वत्ता और स्पष्ट सकारात्मक सोच के कारण ही संविधान सभा ने संविधान की रचना का भार देते हुए उन्हें संविधान प्रारूप समिति (ड्राफ्ट्स कमिटी) का अध्यक्ष नियुक्त किया और इसीलिये वे भारत के संविधान के मुख्य वास्तुकार माने जाते हैं । 25 नवम्बर, 1949 को बाबा साहब द्वारा संविधान का प्रारूप अंतिम रूप से तैयार कर संविधान सभा के अध्यक्ष डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसादजी को प्रस्तुत किया गया ।
■ उनकी विद्वत्ता और दूरदर्शिता का ही प्रभाव था कि उन्हें स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया ।
■ बाबा साहब को 1990 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न दिया गया ।

दिनांक 29.03.2021

■ मैं होली के शुभ अवसर पर सभी बिहारवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
■ होली केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि संस्कृति है । यह संस्कृति हमें सिखाती है कि चाहे विगत एक वर्ष में हमारा रिश्ता किसी के साथ कैसा भी रहा हो सब भूल कर नये सिरे से उत्साहजनक रिश्ता कायम हो । किसी से कोई शिकवा शिकायत शेष न रहे । होली सारे तनावों को भूल कर उत्साह से सराबोर हो मस्त हो जाने का त्यौहार है ।
■ मैं कामना करता हूं कि राज्य में सबों के बीच सकारात्मक एवं सौहार्द का माहौल कायम हो ।

दिनांक 22.03.2021

■संघीय ढांचे का एक राज्य बिहार जो 1912 में स्वतंत्र रुप से एक राज्य के तौर पर अस्तित्व में आया वह बिहार राज्य 94,163 किलोमीटर में फैला हुआ एक भूभाग मात्र नहीं है बल्कि यह संवेदना की जीती जागती मिसाल है ।
■ यह बिहार की ही धरती है जहां मां सीता ने जन्म लिया और जहां देव नदी गंगा बहती है।
■ बिहार क्रांति की धरती रही है, परिवर्तन की धरती रही है और यही कारण है कि बिहार ने दुनिया को सबसे पहला लोकतंत्र दिया।
■ बिहार की धरती वह धरती है जो गौतम को बुद्ध बना देती है, मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा बनने की शुरुआत करा देती है।
■ यह हम लोगों के लिए गौरव का विषय है कि बिहार में सबसे अधिक आबादी युवाओं की है । दुनिया को बिहार ने गुप्त काल और मौर्य काल जैसे कालखंड दिए हैं ।गुप्त काल को भारत का स्वर्णिम काल कहा जाता है । मगध साम्राज्य की सीमाएं तो आज के भारत की सीमाओं से बहुत आगे थीं ।
■ हिंदी भाषी बिहार राज्य की मिट्टी अत्यंत ही संवेदनशील है और यही कारण है कि जितनी भी क्रांतियां देश में हुई हैं उनमें बिहार आगे रहा है लेकिन बिहार में क्रांति अफवाहों पर नहीं होती है बल्कि यहां के संवेदनशील लोग सारी सच्चाई को जानकर आगे बढ़ते हैं और पूरे भारत में नेतृत्व करते हैं। यही कारण है कि चाहे नागरिकता कानून हो या कृषि कानून, दोनों के संबंध में फैलाए गए भ्रम पर बिहार ने प्रतिक्रिया नहीं दी ।
■ बिहार समाजवाद और सामाजिक परिवर्तन की भूमि है । बिहार में ही पहली बार जमींदारी उन्मूलन कानून बनाया गया जिसने देश को दिशा दी।
■ जयप्रकाश आंदोलन बिहार से ही शुरू हुआ जिसने देश की राजनीतिक दिशा और दशा बदल कर रख दी। आज राजनीति में जितने भी अग्रणी लोग हैं अधिकांश उसी आंदोलन की उपज हैं।
■ बिहार ने चाणक्य जैसी विभूति को जन्म दिया जिन्होंने सत्ता को कुछ नहीं समझा ।
■ बिहार में राजनीतिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक चेतना भी अपने चरम पर रही है और आज भी है।
■ गंगाजल से पवित्र, दुनिया को लोकतंत्र से परिचित करानेवाली और भारत को एक कर देनेवाले मगध साम्राज्य की धरती है बिहार ।
■ इस पावन धरती को नमन करते हुए मैं बिहार वासियों को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

दिनांक 11.03.2021

■ आशुतोष, शशांक शेखर, चंद्रमौलि, देवों के देव महादेव के चरणों में सादर वंदना करते हुए आज प्रदेश एवं देश के सभी वासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनायें देता हूँ।
■ महादेव इस भौतिक जगत के सभी प्राणियों को अपार सुखों के दाता हैं । महाशिवरात्रि के बारे में विभिन्न मान्यतायें हैं जिनमें एक महादेवजी का विवाह है और दूसरा उनका मनमोहक नृत्य ।
■ स्वयं भभूत लपेटकर रहने वाले भोले शंकर जरा-सी आराधना में ही प्रसन्न होकर कोई भी वर देने के लिए प्रसिद्ध हैं । ये ऐसे देव हैं जिनके परिवार में एक-दूसरे के घोर विरोधी प्रेम से रहते हैं जैसे भोले शंकर के गले में लिपटे हुए नाग का प्रिय भोजन चूहा है जो गणेशजी का वाहन है । इसी तरह नाग का वैरी मोर है जो कार्तिकेयजी का वाहन है और महादेवजी की सवारी बैल देवी पार्वती की सवारी सिंह का प्रिय आहार है । परस्पर विरोधी होने के बावजूद सब एक ही परिवार में स्नेहपूर्वक रहते हैं । यह उदाहरण हम लोगों को प्रेरणा देता है कि चाहे कोई कितना भी वैरी हो, हम उसके साथ चाहें तो सप्रेम रह सकते हैं ।
■ पुनः उन महायोगी, जटाधार, त्रिनेत्रधारी, त्रिशूलधारी महादेवजी को प्रणाम करते हुए सभी को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देता हूँ ।

दिनांक 08.03.2021

■ आज महिला दिवस के अवसर पर मैं बिहार प्रदेश सहित देश और दुनिया की सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देता हूं ।
■ सबसे पहला महिला दिवस 28 फरवरी,1909 को मनाया गया । 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में इसे अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया । इसका उद्देश्य उस समय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था । बाद में कई सम्मेलनों के बाद आधिकारिक तौर पर वर्ष 1921 से 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाने लगा । इस तरह 8 मार्च को मनाया जानेवाला महिला दिवस अपने 100 वर्ष पूरे कर चुका है ।
■ 8 मार्च, 1975 को संयुक्त राष्ट्र में महिला दिवस को आधिकारिक तौर पर मनाया गया। इस महिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण है । आज के दौर में महिलाएं न सिर्फ सशक्त हुई हैं बल्कि कई क्षेत्रों में पुरूषों को पीछे छोड़ चुकी हैं ।
■ सनातन धर्म में महिलाओं को शुरू से ही सम्मानित किया गया और शक्ति, बुद्धि, धन सभी की देवी महिला ही रहीं । हमारे वैदिक काल में कहा भी गया कि
■ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः
■ यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफलाः क्रियाः ।
■ अर्थात् जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता का वास होता है और जहां उनकी पूजा नहीं होती वहां की सभी क्रिया निष्फल हो जाती है । वैदिक काल से यह प्रेरणा हमें मिलती रही ।
■ महिला दिवस पर सभी महिलाओं को एक बार फिर मैं शुभकामना देता हूं ।

दिनांक 17.02.2021

■जननायक स्व॰ कर्पूरी ठाकुरजी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ ।
■स्व॰ कर्पूरी ठाकुरजी ने राजनीति में सादगी का एक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसके लिये वे सदैव याद किये जायेंगे । उनकी सादगी अनुकरणीय है ।

दिनांक 16.02.2021

■वसंत पंचमी या श्रीपंचमी हिंदुओं का एक त्यौहार है । इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है । यह पूजनोत्सव माघ शुक्ल पंचमी को भारत के साथ साथ नेपाल और जहां भी हिंदू हैं उन राष्ट्रों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है । शास्त्रों में वसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है ।
■देवी सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी सहित अनेक नामों से जाना जाता है । देवी सरस्वती ज्ञान की प्रदातृ हैं और यही कारण है कि सरस्वती पूजा के दिन से हिंदुओं में बच्चों को पढ़ना सिखाये जाने की परम्परा है । संगीत की उत्पत्ति का उद्गम होने के कारण ये संगीत की देवी हैं । वसंत पंचमी के दिन को इनके प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाते हैं । ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है : -
■ये परम चेतना हैं । सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं । हममें जो आचार और मेधा है, उसका आधार सरस्वती हैं । इनकी स्मृति और स्वरूप का वैभव अद्भुत है । शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत में व्याप्त, सभी भयों से अभयदान देनेवाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटानेवाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करनेवाली तथा पद्मासन पर विराजमान माॅं सरस्वती की मैं वंदना करता हूं ।

दिनांक 31.01.2021

■ आज बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी की पुण्यतिथि है । मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी, जो श्रीबाबू के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे, न सिर्फ बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री हुए बल्कि वे युगद्रष्टा थे । आधुनिक बिहार उन्हीं की देन है । जो भी कल-कारखाने लगे उनमें से अधिकांश उन्हीं के कार्यकाल के हैं ।
■ श्रीबाबू स्वतंत्रता सेनानी तो थे ही संविधान निर्मातृ संविधान सभा के प्रमुख सदस्य भी थे । श्रीबाबू को भारत रत्न दिये जाने की मांग बिहार राज्य में तो की ही जाती रही बिहार विधान सभा में भी दिनांक 26.07.2019 को गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उन्हें भारत रत्न दिये जाने की सिफारिश केन्द्र सरकार से करने हेतु अनुरोध किया गया । श्रीबाबू की प्रसिद्धि यहां तक थी कि भले ही उनका जन्म माउर गांव में हुआ था लेकिन लोग माउर से ज्यादा श्रीबाबू के गांव के नाम से माउर को जानते थे । श्री बाबू जैसा व्यक्तित्व बार-बार पैदा नहीं होता बल्कि कई सदियों में कोई होता है ।
■ मैं उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें बिहार की जनता और बिहार विधान सभा की तरफ से भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।

दिनांक 30.01.2021

■ महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ । यह दिन गांधीजी के अनुकरणीय जीवन को याद करने और अपनाने का संकल्प लेने का दिन है ।
महात्मा गांधी ने सात सामाजिक पाप कर्म बताएं हैं :
1. सिद्धांत के बिना राजनीति।
2. नैतिकता के बिना व्यापार ।
3. मानवता के बिना विज्ञान ।
4. विवेक के बिना सुख ।
5. चरित्र के बिना ज्ञान ।
6. त्याग के बिना पूजा ।
7. काम के बिना धन ।
इन वचनों को हमें आत्मसात करना होगा।
■ श्रीमद् भगवद गीता में कर्म से ही व्यक्ति का परिचय बताया गया है । स्व0 मोहन दास करमचंद गाँधीजी ने गीता के इस मूल वाक्य को याद रखा और अपने आचरण को उस उंचाई तक पहुंचाया जहां जाकर वे एक साधारण आदमी न रहकर महात्मा हो गये, एक व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा बन गये । आज वैश्विक सद्भावना का मामला जहाँ भी आता है वहां महात्मा गाँधी प्रासंगिक हो उठते हैं । महात्मा गाँधी ने ऐसा कोई उपदेश नहीं दिया जिसे उन्होंने स्वयं अपने पर लागू नहीं किया और यही कारण रहा कि लोग उनकी बातों को न सिर्फ सुनते रहे बल्कि उसे अपने आचरण में समाविष्ट करते रहे । उनकी बातों को सुनकर पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ और परिणाम है कि आज हमलोग स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं ।
■ गांधीजी की पूरी जीवन यात्रा प्रयोगों की अविरल धारा के समान है । गांधीजी ने सत्य और अहिंसा का जो अद्भुत प्रयोग अपने साथ किया उसके बारे में उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये दोनों उनके आविष्कार नहीं वरन् ये शाश्वत मूल्य तभी से विद्यमान हैं जब से प्रकृति अस्तित्व में आयी है । इन दो मूल्यों को अपना कर ही गांधीजी भौतिक संसार में रहकर भी संन्यासी बने रहे ।
■ गाँधीजी के प्रति श्रद्धा का यह चरम ही है कि पूरे देश ने उन्हें बापू कह कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की । कोई औपचारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद गांधीजी को राष्ट्रपिता का पद इस देश ने प्रदान किया ।
■ महात्मा गांधी का बिहार से गहरा लगाव था क्योंकि चंपारण सत्याग्रह से ही वे महात्मा बनने की ओर अग्रसर हुए ।
■ महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और उनके बताये रास्तों पर चलने का प्रयास करने हेतु बिहार समेत पूरे देश की जनता का आह्वान करता हूँ ।

दिनांक 26.01.2021

■ 26 जनवरी का दिन केवल एक तिथि नहीं है बल्कि हमारा अपना शासन लागू किये जाने का दिन है । इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू कर तीन स्तंभ प्रणाली विकसित की गई जिसमें कानून बनाने का काम संसद को दिया गया, कानून संविधान सम्मत हो इसकी देखरेख के लिये न्यायपालिका बनायी गयी तथा बनाये गये कानूनों के कार्यान्वयन के लिये कार्यपालिका बनायी गयी ।
■ लोकतंत्र नागरिकों को प्रगति हेतु विस्तृत उड़ान भरने का मार्ग प्रशस्त करता है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और यह संविधान जनता को यह ताकत देता है कि वह कानून सम्मत व्यवस्था के लिये जिसे चाहे अपना सेवक चुने ।
■ यह सुदृढ़ व्यवस्था भारत की खूबसूरती है और हम सब लोगों का सौभाग्य है कि हम एक ऐसी व्यवस्था में रह रहे हैं जहां जीने का अधिकार सुरक्षित है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है । इस देश में किसी व्यक्ति से किसी खास धर्म या संप्रदाय का होने के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता । संविधान उसे संरक्षित करता है। संविधान सबको समान रूप से आजीविका पाने और अपने आप को मताधिकार के माध्यम से सत्ता में भागीदार बनने का अधिकार देता है। आज ही के दिन देश में संविधान लागू किया गया था इसलिए यह दिन अविस्मरणीय होने के साथ-साथ आदरणीय भी है ।
■ मैं बिहार विधान सभा भवन में बिहार उड़ीसा विधायी परिषद की पहली बैठक के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लोकतंत्र की सबसे प्राचीन धरती बिहार को नमन कर बिहार सहित देश के सभी लोगों को 72वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

दिनांक 24.01.2021

■ सहज जीवन शैली के धनी, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और बिहार के एक बार उपमुख्यमंत्री तथा दो बार मुख्यमंत्री रहने वाले कर्पूरी ठाकुरजी का आज जन्म दिवस है। मैं उनके जन्मदिवस पर उनकी सादगी और उनके द्वारा उपस्थित किए गए आदर्शों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता हूं।
■ कर्पूरी ठाकुर जी की पहचान उनका मुड़ा तुड़ा कुर्ता, घिसी चप्पल और बिखरे बाल थे । उनकी सादगी प्रेरित करने वाली थी ।
■ कर्पूरी जी जीवन भर कांग्रेस के वंशवाद का विरोध करते रहे और यही कारण था कि उन्होंने अपने जीवन काल में अपने वंश के किसी व्यक्ति को राजनीतिक विरासत थामने के लिए आगे नहीं बढ़ाया। आज भी कर्पूरी जी को सब लोग उनकी सादगी के लिए याद करते हैं । कर्पूरी जी प्रथम विधान सभा यानी 1952 से ही विधायक,उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अपने लिए एक अच्छा सा घर भी न बना सके । वे अपनी विरासत के तौर पर घरवालों के लिए वही टूटी झोंपड़ी छोड़कर गए ।
■ कर्पूरी जी जितना सादगी भरा जीवन जीते रहे उतने ही प्रखर वक्ता रहे ।
■ जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुरजी के जन्मदिवस पर उन्हें स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

दिनांक 23.01.2021

■ महान स्वतंत्रता सेनानी और देश को गुलामी से आजाद कराने को बेताब महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन करता हूं।
■ नेताजी में जो जोश था, देश को आजाद कराने की जो तड़प थी उसकी कल्पना हम लोग आज शायद ही कर पाएं ।
■ जिन लोगों ने आजाद भारत में जन्म लिया है वह गुलामी की पीड़ा का एहसास भी नहीं कर सकते । गुलामों की जिंदगी जिंदगी नहीं एक सजा होती है।ऐसे ही महान क्रांतिकारियों की प्राणाहुति ने हमें यह अवसर दिया है कि आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं और हमलोग जो भी हैं ऐसे ही महापुरुषों की वजह से हैं।
■ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें फिर एक बार नमन करता हूं।

दिनांक 20.01.2021

■ आज सिखों के दसवें गुरु, खालसा सेना के संस्थापक एवं प्रथम सेनापति तथा सिख धर्म के लिये अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुरु गोविंद सिंहजी की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं ।
■ यह बिहार की पावन धरती है जहां श्री गोविंद राय जन्म लेते हैं और अपने कामों से गुरु गोविंद सिंहजी बन जाते हैं । गुरु गोविंद सिंहजी केवल एक धर्मगुरु ही नहीं थे बल्कि वे वीर योद्धा और विद्वान भी थे ।
■ गुरु गोविंद सिंहजी ने सिखों के पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा कर उन्हें गुरु के रूप में स्थापित किया । आज गुरु ग्रंथ साहिब ही सबके गुरु हैं ।
■ गुरू गोविंद सिंह पूरी मानवजाति को एक ही पिता की संतान मानते थे और इसीलिये उन्होंने कविता भी लिखी कि -
न कोई बैरी नाहि बेगाना
एक पिता एकस के हम बारिक ।
मानस की जात सबै एकै पहचानबो
एक ही सरूप सबै एकै जोत जानबो ।
■ गुरु गोविंद सिंह जी स्वयं तो अनेक भाषाओं के विद्वान थे ही अन्य विद्वानों का वे भरपूर सम्मान भी करते थे । यही कारण है कि उनके दरबार में अनेक कवियों और लेखकों की उपस्थिति रहती थी ।
■ मैं गुरू गोविंद सिंहजी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए अपने सभी सिख भाईयों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 14.01.2021

■ हिंदुओं के सभी त्यौहार धर्म से जुडे़ हैं । ऐसा ही एक त्यौहार मकर संक्रांति भी है । मकर संक्रांति पर्व सूर्यदेव से जुड़ा हुआ है । इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसी के साथ हिंदुओं में सभी शुभकर्मों की शुरुआत होती है । धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन देवलोक में दिन का आरंभ होता है] इसलिए इसको देवायन भी कहा जाता है । इस दिन देवलोक के दरवाजे खुल जाते हैं । मकर संक्रांति का त्यौहार देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है, कहीं खिचड़ी, कहीं पोंगल, कहीं संक्रांति और कहीं उत्तरायणी आदि ।
■ उत्तरायण सूर्य का महत्व प्राचीन काल से है और यदि हम महाभारत के काल में जायं तो देखते हैं कि इच्छामृत्यु के वरदान के बावजूद पितामह भीष्म तब तक बाणों की कष्टदायी शय्या पर लेटे रहे जब तक भगवान सूर्य उत्तरायण नहीं हुए । उन्होंने अपने प्राण सूर्यदेव के उत्तरायण होने के बाद ही त्यागे ।
■ मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से उत्तरायण सूर्य को नमन करते हुए बिहार सहित संपूर्ण देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 12.01.2021

■ स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मैं आज उन्हें सादर नमन करता हूँ। स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व जितना ही पारदर्शी रहा है उतना ही विराट रहा है । उनके व्यक्तित्व के बारे में कुछ लिखना सूरज को दीपक दिखाने के समान है लेकिन उनकी जयंती के शुभ अवसर पर मेरे मन की श्रद्धा दो-चार पंक्तियाँ लिखने के लिये मुझे विवश कर रही है।
■ कितना अच्छा और सार्थक नाम दिया नरेंद्र को गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस ने । उन्हें नर के इंद्र अर्थात राजा से सीधे विवेक के आनंद में डूबे रहने का आशीर्वाद दिया क्योंकि गुरुदेव जानते थे इंद्र या राजा के पद में मद है जबकि विवेक यानी ज्ञान का पद परम पद है । इसी परम पद को स्वामी विवेकानंद ने न सिर्फ प्राप्त किया बल्कि पूरी दुनिया को अपने जीवन काल तक उस ज्ञान का दान अनवरत रूप से करते रहे ।
■ सनातन धर्म के लोच को स्वामीजी ने अपने आचरण में अपनाया । यही कारण है कि शिकागो की धर्मसभा में विश्वबंधुत्व का संदेश देते हुए उन्होंने उस सभा को मेरे अमेरिकी भाई-बहनो कहकर संबोधित किया। विश्वबंधुत्व की यह अद्भुत अवधारणा सनातन धर्म में है ।
■ स्वामीजी ने सनातन धर्म की इस विशेषता को आत्मसात किया कि यह किसी पर थोपा नहीं जाता बल्कि इसकी मूल अवधारणा है अपने आपको जानो ।
■ स्वामीजी का जीवनकाल मात्र 39 वर्ष का रहा लेकिन उन्होंने इसी अल्पावधि में ऐसा काम किया जो सौ वर्ष जीने वाले भी लोग नहीं कर पाते हैं । उन्होंने समाज को यह दिखाया कि महत्व आयु नहीं रखती बल्कि व्यक्ति के द्वारा किये गये काम महत्व रखते हैं ।
■ स्वामी विवेकानंद की विशेषताओं में एक यह भी रही कि उनमें नकारात्मकता बिल्कुल नहीं रही । वे सदैव सकारात्मक सोचते रहे और अपनी सोच को आम जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने परिव्राजक के रूप में भारत सहित पूरी दुनिया में भ्रमण किया । सनातन धर्म की आध्यात्मिक शक्ति से दुनिया को परिचित कराने के लिये ही वे संन्यासी होकर भ्रमण करते रहे । स्वामीजी का नियंत्रण अपनी हर साँस पर था तभी उन्होंने अपनी मृत्यु को स्वयं अंगीकार किया और ध्यानावस्था में ही उन्होंने महासमाधि ली । यह भारत की विशेषता है कि जहाँ बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं को लोग झुठला देते हैं वहाँ एक संन्यासी को आज भी अपने मन में बसाये हुये हैं । यही स्वामीजी के प्रति देश की सच्ची श्रद्धा है ।
■ स्वामीजी ने 19वीं शताब्दी में 21वीं शताब्दी के भविष्य की जो भविष्यवाणी की थी अब वह सफलीभूत हो रही है ।
■ स्वामीजी के सम्मान में 12 जनवरी को युवा दिवस मनाया जाता है । युवा दो अक्षरों से बना है - यु और वा । हम दोनों को देखें तो यु से युग और वा से वाहक बनता है । युवा ही युग के वाहक हैं और 21वीं सदी की नींव, रीढ़ और मस्तिष्क हैं । युवा अपने कौशल और हुनर से आगे बढ़ेगा । यही युवा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेगा और भारत विश्वगुरु बनेगा ।
■ स्वामी विवेकानंद हम लोगों के आदर्श हैं, मार्गदर्शक हैं और सदैव हमारे प्रेरणास्रोत बने रहेंगे । उनकी जयंती के अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से सादर नमन करते हुए उनके प्रति विनम्र श्रद्धा व्यक्त करता हूँ ।

दिनांक 01.01.2021

■ नव वर्ष 2021 का आगमन हो चुका है । हर नया वर्ष एक नयी आशा-विश्वास लिये आता है कि हमारे जीवन में कुछ सकारात्मक होगा और यही भाव हमें नये वर्ष का स्वागत करने के लिये प्रोत्साहित करता है । बीता वर्ष 2020 पूरे विश्व के लिये एक संकट लेकर आया और लगा कि मानवजाति का ही नाश हो जायेगा परंतु मानव संघर्षशील है । मानव जीवन एक धारा है जो हजारों लाखों वर्षों से निरंतर चली आ रही है । इसी संघर्ष की क्षमता के आधार पर चिकित्सा विज्ञानियों ने इस संकट से निपटने के लिये कमर कसी और वे कोरोना की वैक्सीन बनाकर उसका परीक्षण कर रहे हैं ।
■ मैं इस नव वर्ष पर माननीय प्रधानमंत्रीजी द्वारा कोविड-19 से निपटने के सटीक समय और रणनीति के लिये उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि यदि माननीय प्रधानमंत्रीजी तथा माननीय मुख्यमंत्रीजी ने आवश्यक तैयारियों के लिये सम्पूर्ण लाॅक डाउन न किया होता तो आज बिहार सहित भारतवर्ष में शायद ही कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण से बच पाता ।
■ मैं न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञानियों को इस नव वर्ष के अवसर पर विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूं कि मानव जीवन के संरक्षण के लिये जिस उत्साह और तत्परता से उन्होंने काम किया वह मानव जाति पर उपकार है ।
■ मैं राज्य एवं देश के सभी कोरोना योद्धाओं को भी धन्यवाद देता हूं तथा उनके समर्पण को नमन करता हूं ।
■ मैं बिहार विधान सभा की तरफ से बिहार सहित पूरे देश की जनता को नव वर्ष 2021 की शुभकामनाएं देता हूं ।