Bihar Vidhan Sabha

In order to trace the genesis of the present day Legislature of Bihar, let us turn the pages of modern history. During the rule of the East India Company, the area of Bihar was made a part of the Bengal Presidency. On 12th December, 1911 the British Emperor George V announced in his Delhi Durbar, the creation of a separate province by combining Bihar and Orissa, with Patna as its headquarter. Sir Charles Stuart Bayley, was appointed as first Lieutenant-Governor of the Province.

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Shri Vijay Kumar Sinha,
Hon'ble Speaker,
Bihar Vidhan Sabha

    इतिहास के पन्नों से ......


गोलघर, पटना

बेजोड़ वास्तुकला का उदाहरण पटना का गोलघर है । गोलघर पटना के बाँकीपुर इलाके में गंगा के निकट अवस्थित है । इसका निर्माण 1786 में किया गया था । इसके निर्माण का उद्देश्य अनाज का भंडारण था ताकि यदि कभी अकाल की स्थिति उत्पन्न हो तो उसका सामना भंडारित अनाज से किया जा सके ।
विशाल गुम्बद के साथ यह गोलाकार संरचना, जिसका नाम गोलघर है, पटना की पहचान है ।

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    माननीय अध्यक्ष महोदय का संदेश......

■ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जन्मतिथि पर उन्हें नमन कर श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं ।
■ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकरजी शौर्य एवं सामाजिक पीड़ा के आवेश और पूर्ण स्वाधीनता की अभिलाषा के रचनाकार के रूप में जाने जाते हैं । उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति की यथार्थ की तस्वीर झलकती है । आरंभिक समय से ही उन्होंने राष्ट्र के जीवन, राष्ट्र की संवेदना तथा समकालीन राजनीतिक चेतना में आ रहे परिवर्तनों को सजगता के साथ दिखाया है । शुरू से अंत तक उनकी सोच शोषित-पीड़ित जनता के साथ रही है । उनकी रचना में वैसे समाज की कल्पना झलकती है जहां उत्पीड़न और असमानता की जगह न हो । शोषणमुक्त समाज का निर्माण उनका वैचारिक पक्ष था । उनके सम्पूर्ण रचना संसार में इन सभी प्रतिबद्धताओं की झलक दिखाई देती है ।
■ हिन्दी काव्य के अप्रतिम आलोक पुरूष रामधारी सिंह दिनकर आग और राग के ही नहीं बल्कि युगधर्म के भी कवि हैं जिन्होंने अपने समय में तत्कालीन संसार की समस्त प्रवृतियों को समझा था और अपनी रचनाओं में प्रस्फुटित भी किया था । अपने 34 काव्य पुस्तकों एवं 27 गद्य ग्रंथों में जिनमें संस्कृति के चार अध्याय नामक रचनाओं में उन्होंने भारतवासियों की सोच संस्कृति और विविधताओं को अलग होते हुए भी एक जैसी बताई हैं जिनका अर्थ है अनेकता में एकता । दिनकर जी ने अपनी रचनाओं में अधिकांश वीर रस से संबंधित रचनाएं लिखी ।
■ सच है, विपत्ति जब आती है,
■ कायर को दहलाती है
■ सूरमा नहीं विचलित होते
■ क्षण एक नहीं धीरज खोते
■ विघ्नों को गले लगाते हैं
■ कांटो में राह बनाते हैं ।
■ दिनकर जी की रचनाएं एक तरफ समाज सुधार तथा समाज में व्याप्त अनीति और अत्याचार के खिलाफ थी तो वहीं दूसरी तरफ अपनी रचनाओं में शृंगार, मानवीय प्रेम की आशा झलकती है । रश्मिरथी, परशुराम की प्रतिज्ञा वीर रस की प्रमुख रचनाएं हैं जिनसे देश के वीर सपूतों में साहस और जोश उत्पन्न करने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है ।
■ दिनकर जी की रचना कुरूक्षेत्र भी अत्यंत प्रसिद्ध रचना है जो महाभारत के पद् चिन्हों पर रचित है । आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में छाया वादोत्तर काल की प्रथम पीढ़ी के इन महानतम् कवि में पूर्णकाल के प्रणम्य कवि भूषण से बढ़कर ओज और पराक्रम दिखलाई देता है । उनकी ओजस्वी रचनाओं में पर्वतों की चोटी से गिरते जलप्रपात की ध्वनि है, तो सरिताओं का कल कल, छल छल मधुर संगीत भी है । उनकी कविताओं के भीतर जिस आग की कल्पना की गयी है वह जलाती नहीं अपितु प्रकाश और उत्साह प्रदान करती है । वह मनुष्यता के सामने आ खड़ी हुई अंधेरी गलियों और सुरंगों को आलोकित करती है ।
■ दिनकरजी हिंदी साहित्य के एक महान प्रगतिवादी रचनाकार हैं । ओज गुण के प्रसिद्ध गायक और राष्ट्रीयता के परम भक्त कवि तथा रचनाकार माने जाने वाले दिनकर जी जिनकी वाणी में देश के लिए पीड़ा तथा देश के लोगों के लिए दया और करूणा समाहित है । ऐसी जागृति की मशाल लेकर चलने वाले सभी अर्थों में दिनकरजी का साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अद्वितीय और उल्लेखनीय स्थान है । उनकी जन्मतिथि पर एक बार फिर मैं उन्हें नमन करता हूं ।

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    माननीय सदस्यों एवं राज्य की जनता से अपील.....

भय बीमारी को बढ़ा देता है। हम सभी योद्धाओं को युद्ध के मैदान में जाने के पहले अपने अस्त्र-शस्त्र और प्रतिरोधात्मक क्षमता से सुसज्जित होकर कोरोना महायुद्ध से लड़ना है।डरना नहीं लड़ना है । सतर्कता और सावधानी के साथ युद्ध जीतकर समाज राष्ट्र की रक्षा करने का संकल्प लेना है।

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