माननीय अध्यक्ष महोदय का संदेश......

दिनांक 17.02.2021


Shri Vijay Kumar Sinha,
Hon'ble Speaker,
Bihar Vidhan Sabha

■जननायक स्व॰ कर्पूरी ठाकुरजी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ ।
■स्व॰ कर्पूरी ठाकुरजी ने राजनीति में सादगी का एक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसके लिये वे सदैव याद किये जायेंगे । उनकी सादगी अनुकरणीय है ।

दिनांक 16.02.2021

■वसंत पंचमी या श्रीपंचमी हिंदुओं का एक त्यौहार है । इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है । यह पूजनोत्सव माघ शुक्ल पंचमी को भारत के साथ साथ नेपाल और जहां भी हिंदू हैं उन राष्ट्रों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है । शास्त्रों में वसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है ।
■देवी सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादिनी सहित अनेक नामों से जाना जाता है । देवी सरस्वती ज्ञान की प्रदातृ हैं और यही कारण है कि सरस्वती पूजा के दिन से हिंदुओं में बच्चों को पढ़ना सिखाये जाने की परम्परा है । संगीत की उत्पत्ति का उद्गम होने के कारण ये संगीत की देवी हैं । वसंत पंचमी के दिन को इनके प्रकाशोत्सव के रूप में भी मनाते हैं । ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है : -
■ये परम चेतना हैं । सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं । हममें जो आचार और मेधा है, उसका आधार सरस्वती हैं । इनकी स्मृति और स्वरूप का वैभव अद्भुत है । शुक्लवर्ण वाली, सम्पूर्ण चराचर जगत में व्याप्त, सभी भयों से अभयदान देनेवाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटानेवाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करनेवाली तथा पद्मासन पर विराजमान माॅं सरस्वती की मैं वंदना करता हूं ।

दिनांक 31.01.2021

■ आज बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी की पुण्यतिथि है । मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।
■ डाॅ0 श्रीकृष्ण सिंहजी, जो श्रीबाबू के नाम से ज्यादा प्रसिद्ध थे, न सिर्फ बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री हुए बल्कि वे युगद्रष्टा थे । आधुनिक बिहार उन्हीं की देन है । जो भी कल-कारखाने लगे उनमें से अधिकांश उन्हीं के कार्यकाल के हैं ।
■ श्रीबाबू स्वतंत्रता सेनानी तो थे ही संविधान निर्मातृ संविधान सभा के प्रमुख सदस्य भी थे । श्रीबाबू को भारत रत्न दिये जाने की मांग बिहार राज्य में तो की ही जाती रही बिहार विधान सभा में भी दिनांक 26.07.2019 को गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उन्हें भारत रत्न दिये जाने की सिफारिश केन्द्र सरकार से करने हेतु अनुरोध किया गया । श्रीबाबू की प्रसिद्धि यहां तक थी कि भले ही उनका जन्म माउर गांव में हुआ था लेकिन लोग माउर से ज्यादा श्रीबाबू के गांव के नाम से माउर को जानते थे । श्री बाबू जैसा व्यक्तित्व बार-बार पैदा नहीं होता बल्कि कई सदियों में कोई होता है ।
■ मैं उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें बिहार की जनता और बिहार विधान सभा की तरफ से भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं ।

दिनांक 30.01.2021

■ महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ । यह दिन गांधीजी के अनुकरणीय जीवन को याद करने और अपनाने का संकल्प लेने का दिन है ।
महात्मा गांधी ने सात सामाजिक पाप कर्म बताएं हैं :
1. सिद्धांत के बिना राजनीति।
2. नैतिकता के बिना व्यापार ।
3. मानवता के बिना विज्ञान ।
4. विवेक के बिना सुख ।
5. चरित्र के बिना ज्ञान ।
6. त्याग के बिना पूजा ।
7. काम के बिना धन ।
इन वचनों को हमें आत्मसात करना होगा।
■ श्रीमद् भगवद गीता में कर्म से ही व्यक्ति का परिचय बताया गया है । स्व0 मोहन दास करमचंद गाँधीजी ने गीता के इस मूल वाक्य को याद रखा और अपने आचरण को उस उंचाई तक पहुंचाया जहां जाकर वे एक साधारण आदमी न रहकर महात्मा हो गये, एक व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा बन गये । आज वैश्विक सद्भावना का मामला जहाँ भी आता है वहां महात्मा गाँधी प्रासंगिक हो उठते हैं । महात्मा गाँधी ने ऐसा कोई उपदेश नहीं दिया जिसे उन्होंने स्वयं अपने पर लागू नहीं किया और यही कारण रहा कि लोग उनकी बातों को न सिर्फ सुनते रहे बल्कि उसे अपने आचरण में समाविष्ट करते रहे । उनकी बातों को सुनकर पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ और परिणाम है कि आज हमलोग स्वतंत्र जीवन जी रहे हैं ।
■ गांधीजी की पूरी जीवन यात्रा प्रयोगों की अविरल धारा के समान है । गांधीजी ने सत्य और अहिंसा का जो अद्भुत प्रयोग अपने साथ किया उसके बारे में उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये दोनों उनके आविष्कार नहीं वरन् ये शाश्वत मूल्य तभी से विद्यमान हैं जब से प्रकृति अस्तित्व में आयी है । इन दो मूल्यों को अपना कर ही गांधीजी भौतिक संसार में रहकर भी संन्यासी बने रहे ।
■ गाँधीजी के प्रति श्रद्धा का यह चरम ही है कि पूरे देश ने उन्हें बापू कह कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की । कोई औपचारिक घोषणा नहीं होने के बावजूद गांधीजी को राष्ट्रपिता का पद इस देश ने प्रदान किया ।
■ महात्मा गांधी का बिहार से गहरा लगाव था क्योंकि चंपारण सत्याग्रह से ही वे महात्मा बनने की ओर अग्रसर हुए ।
■ महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और उनके बताये रास्तों पर चलने का प्रयास करने हेतु बिहार समेत पूरे देश की जनता का आह्वान करता हूँ ।

दिनांक 26.01.2021

■ 26 जनवरी का दिन केवल एक तिथि नहीं है बल्कि हमारा अपना शासन लागू किये जाने का दिन है । इसी दिन 1950 में भारत का संविधान लागू कर तीन स्तंभ प्रणाली विकसित की गई जिसमें कानून बनाने का काम संसद को दिया गया, कानून संविधान सम्मत हो इसकी देखरेख के लिये न्यायपालिका बनायी गयी तथा बनाये गये कानूनों के कार्यान्वयन के लिये कार्यपालिका बनायी गयी ।
■ लोकतंत्र नागरिकों को प्रगति हेतु विस्तृत उड़ान भरने का मार्ग प्रशस्त करता है। लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और यह संविधान जनता को यह ताकत देता है कि वह कानून सम्मत व्यवस्था के लिये जिसे चाहे अपना सेवक चुने ।
■ यह सुदृढ़ व्यवस्था भारत की खूबसूरती है और हम सब लोगों का सौभाग्य है कि हम एक ऐसी व्यवस्था में रह रहे हैं जहां जीने का अधिकार सुरक्षित है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है । इस देश में किसी व्यक्ति से किसी खास धर्म या संप्रदाय का होने के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता । संविधान उसे संरक्षित करता है। संविधान सबको समान रूप से आजीविका पाने और अपने आप को मताधिकार के माध्यम से सत्ता में भागीदार बनने का अधिकार देता है। आज ही के दिन देश में संविधान लागू किया गया था इसलिए यह दिन अविस्मरणीय होने के साथ-साथ आदरणीय भी है ।
■ मैं बिहार विधान सभा भवन में बिहार उड़ीसा विधायी परिषद की पहली बैठक के शताब्दी वर्ष के अवसर पर लोकतंत्र की सबसे प्राचीन धरती बिहार को नमन कर बिहार सहित देश के सभी लोगों को 72वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

दिनांक 24.01.2021

■ सहज जीवन शैली के धनी, स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और बिहार के एक बार उपमुख्यमंत्री तथा दो बार मुख्यमंत्री रहने वाले कर्पूरी ठाकुरजी का आज जन्म दिवस है। मैं उनके जन्मदिवस पर उनकी सादगी और उनके द्वारा उपस्थित किए गए आदर्शों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता हूं।
■ कर्पूरी ठाकुर जी की पहचान उनका मुड़ा तुड़ा कुर्ता, घिसी चप्पल और बिखरे बाल थे । उनकी सादगी प्रेरित करने वाली थी ।
■ कर्पूरी जी जीवन भर कांग्रेस के वंशवाद का विरोध करते रहे और यही कारण था कि उन्होंने अपने जीवन काल में अपने वंश के किसी व्यक्ति को राजनीतिक विरासत थामने के लिए आगे नहीं बढ़ाया। आज भी कर्पूरी जी को सब लोग उनकी सादगी के लिए याद करते हैं । कर्पूरी जी प्रथम विधान सभा यानी 1952 से ही विधायक,उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद अपने लिए एक अच्छा सा घर भी न बना सके । वे अपनी विरासत के तौर पर घरवालों के लिए वही टूटी झोंपड़ी छोड़कर गए ।
■ कर्पूरी जी जितना सादगी भरा जीवन जीते रहे उतने ही प्रखर वक्ता रहे ।
■ जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुरजी के जन्मदिवस पर उन्हें स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

दिनांक 23.01.2021

■ महान स्वतंत्रता सेनानी और देश को गुलामी से आजाद कराने को बेताब महान क्रांतिकारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन करता हूं।
■ नेताजी में जो जोश था, देश को आजाद कराने की जो तड़प थी उसकी कल्पना हम लोग आज शायद ही कर पाएं ।
■ जिन लोगों ने आजाद भारत में जन्म लिया है वह गुलामी की पीड़ा का एहसास भी नहीं कर सकते । गुलामों की जिंदगी जिंदगी नहीं एक सजा होती है।ऐसे ही महान क्रांतिकारियों की प्राणाहुति ने हमें यह अवसर दिया है कि आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं और हमलोग जो भी हैं ऐसे ही महापुरुषों की वजह से हैं।
■ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें फिर एक बार नमन करता हूं।

दिनांक 20.01.2021

■ आज सिखों के दसवें गुरु, खालसा सेना के संस्थापक एवं प्रथम सेनापति तथा सिख धर्म के लिये अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुरु गोविंद सिंहजी की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें सादर नमन करता हूं ।
■ यह बिहार की पावन धरती है जहां श्री गोविंद राय जन्म लेते हैं और अपने कामों से गुरु गोविंद सिंहजी बन जाते हैं । गुरु गोविंद सिंहजी केवल एक धर्मगुरु ही नहीं थे बल्कि वे वीर योद्धा और विद्वान भी थे ।
■ गुरु गोविंद सिंहजी ने सिखों के पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को पूरा कर उन्हें गुरु के रूप में स्थापित किया । आज गुरु ग्रंथ साहिब ही सबके गुरु हैं ।
■ गुरू गोविंद सिंह पूरी मानवजाति को एक ही पिता की संतान मानते थे और इसीलिये उन्होंने कविता भी लिखी कि -
न कोई बैरी नाहि बेगाना
एक पिता एकस के हम बारिक ।
मानस की जात सबै एकै पहचानबो
एक ही सरूप सबै एकै जोत जानबो ।
■ गुरु गोविंद सिंह जी स्वयं तो अनेक भाषाओं के विद्वान थे ही अन्य विद्वानों का वे भरपूर सम्मान भी करते थे । यही कारण है कि उनके दरबार में अनेक कवियों और लेखकों की उपस्थिति रहती थी ।
■ मैं गुरू गोविंद सिंहजी की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए अपने सभी सिख भाईयों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 14.01.2021

■ हिंदुओं के सभी त्यौहार धर्म से जुडे़ हैं । ऐसा ही एक त्यौहार मकर संक्रांति भी है । मकर संक्रांति पर्व सूर्यदेव से जुड़ा हुआ है । इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसी के साथ हिंदुओं में सभी शुभकर्मों की शुरुआत होती है । धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन देवलोक में दिन का आरंभ होता है] इसलिए इसको देवायन भी कहा जाता है । इस दिन देवलोक के दरवाजे खुल जाते हैं । मकर संक्रांति का त्यौहार देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है, कहीं खिचड़ी, कहीं पोंगल, कहीं संक्रांति और कहीं उत्तरायणी आदि ।
■ उत्तरायण सूर्य का महत्व प्राचीन काल से है और यदि हम महाभारत के काल में जायं तो देखते हैं कि इच्छामृत्यु के वरदान के बावजूद पितामह भीष्म तब तक बाणों की कष्टदायी शय्या पर लेटे रहे जब तक भगवान सूर्य उत्तरायण नहीं हुए । उन्होंने अपने प्राण सूर्यदेव के उत्तरायण होने के बाद ही त्यागे ।
■ मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से उत्तरायण सूर्य को नमन करते हुए बिहार सहित संपूर्ण देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देता हूं ।

दिनांक 12.01.2021

■ स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मैं आज उन्हें सादर नमन करता हूँ। स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व जितना ही पारदर्शी रहा है उतना ही विराट रहा है । उनके व्यक्तित्व के बारे में कुछ लिखना सूरज को दीपक दिखाने के समान है लेकिन उनकी जयंती के शुभ अवसर पर मेरे मन की श्रद्धा दो-चार पंक्तियाँ लिखने के लिये मुझे विवश कर रही है।
■ कितना अच्छा और सार्थक नाम दिया नरेंद्र को गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस ने । उन्हें नर के इंद्र अर्थात राजा से सीधे विवेक के आनंद में डूबे रहने का आशीर्वाद दिया क्योंकि गुरुदेव जानते थे इंद्र या राजा के पद में मद है जबकि विवेक यानी ज्ञान का पद परम पद है । इसी परम पद को स्वामी विवेकानंद ने न सिर्फ प्राप्त किया बल्कि पूरी दुनिया को अपने जीवन काल तक उस ज्ञान का दान अनवरत रूप से करते रहे ।
■ सनातन धर्म के लोच को स्वामीजी ने अपने आचरण में अपनाया । यही कारण है कि शिकागो की धर्मसभा में विश्वबंधुत्व का संदेश देते हुए उन्होंने उस सभा को मेरे अमेरिकी भाई-बहनो कहकर संबोधित किया। विश्वबंधुत्व की यह अद्भुत अवधारणा सनातन धर्म में है ।
■ स्वामीजी ने सनातन धर्म की इस विशेषता को आत्मसात किया कि यह किसी पर थोपा नहीं जाता बल्कि इसकी मूल अवधारणा है अपने आपको जानो ।
■ स्वामीजी का जीवनकाल मात्र 39 वर्ष का रहा लेकिन उन्होंने इसी अल्पावधि में ऐसा काम किया जो सौ वर्ष जीने वाले भी लोग नहीं कर पाते हैं । उन्होंने समाज को यह दिखाया कि महत्व आयु नहीं रखती बल्कि व्यक्ति के द्वारा किये गये काम महत्व रखते हैं ।
■ स्वामी विवेकानंद की विशेषताओं में एक यह भी रही कि उनमें नकारात्मकता बिल्कुल नहीं रही । वे सदैव सकारात्मक सोचते रहे और अपनी सोच को आम जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने परिव्राजक के रूप में भारत सहित पूरी दुनिया में भ्रमण किया । सनातन धर्म की आध्यात्मिक शक्ति से दुनिया को परिचित कराने के लिये ही वे संन्यासी होकर भ्रमण करते रहे । स्वामीजी का नियंत्रण अपनी हर साँस पर था तभी उन्होंने अपनी मृत्यु को स्वयं अंगीकार किया और ध्यानावस्था में ही उन्होंने महासमाधि ली । यह भारत की विशेषता है कि जहाँ बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं को लोग झुठला देते हैं वहाँ एक संन्यासी को आज भी अपने मन में बसाये हुये हैं । यही स्वामीजी के प्रति देश की सच्ची श्रद्धा है ।
■ स्वामीजी ने 19वीं शताब्दी में 21वीं शताब्दी के भविष्य की जो भविष्यवाणी की थी अब वह सफलीभूत हो रही है ।
■ स्वामीजी के सम्मान में 12 जनवरी को युवा दिवस मनाया जाता है । युवा दो अक्षरों से बना है - यु और वा । हम दोनों को देखें तो यु से युग और वा से वाहक बनता है । युवा ही युग के वाहक हैं और 21वीं सदी की नींव, रीढ़ और मस्तिष्क हैं । युवा अपने कौशल और हुनर से आगे बढ़ेगा । यही युवा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेगा और भारत विश्वगुरु बनेगा ।
■ स्वामी विवेकानंद हम लोगों के आदर्श हैं, मार्गदर्शक हैं और सदैव हमारे प्रेरणास्रोत बने रहेंगे । उनकी जयंती के अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से सादर नमन करते हुए उनके प्रति विनम्र श्रद्धा व्यक्त करता हूँ ।

दिनांक 01.01.2021

■ नव वर्ष 2021 का आगमन हो चुका है । हर नया वर्ष एक नयी आशा-विश्वास लिये आता है कि हमारे जीवन में कुछ सकारात्मक होगा और यही भाव हमें नये वर्ष का स्वागत करने के लिये प्रोत्साहित करता है । बीता वर्ष 2020 पूरे विश्व के लिये एक संकट लेकर आया और लगा कि मानवजाति का ही नाश हो जायेगा परंतु मानव संघर्षशील है । मानव जीवन एक धारा है जो हजारों लाखों वर्षों से निरंतर चली आ रही है । इसी संघर्ष की क्षमता के आधार पर चिकित्सा विज्ञानियों ने इस संकट से निपटने के लिये कमर कसी और वे कोरोना की वैक्सीन बनाकर उसका परीक्षण कर रहे हैं ।
■ मैं इस नव वर्ष पर माननीय प्रधानमंत्रीजी द्वारा कोविड-19 से निपटने के सटीक समय और रणनीति के लिये उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि यदि माननीय प्रधानमंत्रीजी तथा माननीय मुख्यमंत्रीजी ने आवश्यक तैयारियों के लिये सम्पूर्ण लाॅक डाउन न किया होता तो आज बिहार सहित भारतवर्ष में शायद ही कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण से बच पाता ।
■ मैं न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञानियों को इस नव वर्ष के अवसर पर विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूं कि मानव जीवन के संरक्षण के लिये जिस उत्साह और तत्परता से उन्होंने काम किया वह मानव जाति पर उपकार है ।
■ मैं राज्य एवं देश के सभी कोरोना योद्धाओं को भी धन्यवाद देता हूं तथा उनके समर्पण को नमन करता हूं ।
■ मैं बिहार विधान सभा की तरफ से बिहार सहित पूरे देश की जनता को नव वर्ष 2021 की शुभकामनाएं देता हूं ।